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रामप्यारी गुर्जरः भारत की महान वीरांगना नारी

भारत भूमि पर अनेक वीर योद्धाओ, सेनापति, सम्राट तथा महान देशभक्त शूरमाओं ने जन्म लिया वहीं रानी लक्ष्मीबाई, दुर्गावती, अवन्तीबाई, महारानी चोलादेवी, मीनल देवी, नायिकी देवी, मृगनयनी, मीना गुर्जर, रामप्यारी गुर्जर जैसी वीरांगना भी इसी वीर भुमि में पैदा हुई. जब भी तैमूरलंग के भारत पर आक्रमण का इतिहास लिखा जाएगा और सेनापति जोगराज गुर्जर का उससे टक्कर लेने का वृतान्त आएगा तो रामप्यारी गुर्जर की कहानी भी अवश्य लिखी जायेगी, इतिहास में जिस की उपेक्षा होती रही है. वीरांगनाएं सदैव जन्म नहीं लिया करती, वीरांगना रामप्यारी गुर्जर का जन्म तत्कालीन गुर्जरगढ (प्राचीन नाम) वर्तमान सहारनपुर में हुआ था, उनका गोत्र चौहान था, रामप्यारी ने ग्राम कुंजा सुन्हेटी के प्रसिद्ध योद्धा पहलवान योगराज सिंह जिसे जोगराज कहते थे, बाद में यह गाँव मुगलों ने उजाड़ दिया था,

वीर जोगराज सिंह के वंशज उस गांव से लंढोरा में आकर आबाद हो गये थे, जिन्होंने बाद में लंढोरा राज्य की स्थापना की, जोगराज सिंह बाल ब्रह्मचारी एवं विख्यात पहलवान था, का नाम और उसकी प्रशंसा सुनी थी, बचपन से ही रामप्यारी को वीरता की कहानियां और किस्से सुनने का शौक था, जन्म से ही वह निर्भय और लड़ाकू स्वभाव की थी. रामप्यारी ने जोगराज को अपना गुरू धारण करके महिला सुधार तथा महिलाओं को बहादुर बनाने का अभियान चलाया, जोगराज ने रामप्यारी को आर्शीवाद दिया और गांवों महिलाओं को मल विद्या, भाला, बरछा, तलवार आदि चलाने का प्रशिक्षण दिया, यही रामप्यारी गुर्जर सर्वखाप पंचायत की सेना की महिला सेनापति और जोगराज गुर्जर प्रधान सेनापति सन 1398 ई. में हरिद्वार से पांच कोस दूर दक्षिण दिशा में ग्राम तुगलकपुर, तत्कालीन पथरीगढ वर्तमान पथरी ज्वालापुर के रणक्षेत्र में तैमूर जैसे भंयकर आक्रमणकारी लुटेरे की सेना से लड़े थे, जिनकी वीरता और शौर्य की गाथा स्वर्णाक्षरों में लिखने योग्य है.

रामप्यारी गुर्जर ने जोगराज के नेतृत्व में 40000 हजार ग्रामीण महिलाओं को युद्ध विद्या का प्रशिक्षण दिया था, तैमूर के साथ होने वाले युद्ध के लिए रामप्यारी गुर्जर को हरियाणा सर्वखाप पंचायत के विशेष अधिवेशन में जो हरिद्वार में हुआ था, महिला सेनापति घोषित किया गया था. 40000 हजार महिलाएं जिनमे चौहान, गुर्जर, अहीर, राजपूत, जाट, हरिजन, वाल्मीकि, ब्राह्मण, त्यागी अन्य वीर जातियों की वीरांगनाएं थी, इस महिला सेना का गठन रामप्यारी गुर्जर ने उसी ढंग से किया था जिस ढंग से सर्वखाप पंचायत की सेना का था. प्रत्येक गांव के युवक युवतियां अपने नेता के संरक्षण में प्रतिदिन शाम को गांव के अखाड़े पर एकत्र हो जाया करते थे और व्यायाम, मल्ल विद्या तथा युद्ध विद्या का अभ्यास किया करते थे. खाप की सेना विशेष पर्वो व आयोजन पर दुसरो को प्रेरणा हेतु अपने कौशल का सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शन भी किया करती थी. सर्वखाप पंचायत के सैनिक प्रदर्शन वार्षिक अथवा विशेष संकट काल में होते थे लेकिन संकट का सामना करने को सैनिक सदैव तैयार रहते थे, इसी प्रकार रामप्यारी गुर्जर की महिला सेना भी पुरूषों के समान सदैव तैयार रहती थी.

विद्वान् चन्द्रदत्त भट, जिसने तैमूर के साथ युद्धों की घटनाओं का इतिहास लिखा था, के अनुसार प्रधान सेनापति जोगराज सिंह ने कहा -“वीरो! भगवान् कृष्ण ने गीता में अर्जुन को जो उपदेश दिया था, उस पर अमल करो, हमारे लिए स्वर्ग का द्वार खुला है. ऋषि मुनि योग साधना से जो मोक्ष पद प्राप्त करते हैं, उसी पद को वीर योद्धा रणभूमि में बलिदान देकर प्राप्त कर लेता है. भारत माता की रक्षा हेतु तैयार हो जाओ, देश को बचाओ अथवा बलिदान हो जाओ, संसार तुम्हारा यशोगान करेगा. आपने मुझे सेनापति चुना है, में प्राण रहते पग पीछे नहीं हटाऊंगा, में पंचायत को प्रणाम करता हूँ तथा प्रतिज्ञा करता हूँ कि अन्तिम श्वास तक भारत भूमि की रक्षा करूंगा. हमारा देश तैमूर के आक्रमणों तथा अत्याचारों से तिलमिला उठा है. वीरो! उठो, अब देर मत करो, शत्रु सेना से युद्ध करके देश से बाहर निकाल दो.”

यह भाषण सुनकर सैनिकों में वीरता की लहर दौड़ गई, 80,000 हजार वीरों तथा 40,000 हजार वीरांगनाओं ने अपनी तलवारों को चूमकर प्रण किया और कहा –
“हे सेनापति! हम प्राण रहते आपकी आज्ञाओं का पालन करेगे और अंत में देश रक्षा हेतु बलिदान हो जायेंगे.”

वीर देवियां सैनिकों को खाद्य सामग्री एवं युद्ध सामग्री बड़े उत्साह से युद्ध स्थान पर पहुंचाती थीं. शत्रु की रसद को ये वीरांगनाएं छापा मारकर लूटतीं थीं, युद्ध में तैमूर के ढ़ाई लाख सैनिकों में से हमारे वीर योद्धाओं ने 1,60,000 हजार को मौत के घाट उतार दिया था और तैमूर की विजयी आशाओं पर पानी फेर दिया. पंचायती सेना के 35000 हजार वीर एवं वीरांगनाएं देश के लिये वीरगति को प्राप्त हुए थे.

साभारः https://www.facebook.com/shouryagaatha/ से

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