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पश्चिम रेलवे के वडोदरा मंडल का कायाकल्‍प

बड़ौदा। गुजरात की सांस्कृतिक राजधानी वडोदरा और उसके आसपास के क्षेत्र हाल के वर्षों में विविध बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं के कार्यान्वयन और यात्री सुविधाओं में अभिवृद्धि जैसे प्रमुख परिवर्तनों के साक्षी रहे हैं, जिनमें लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की विश्व की सबसे उँची प्रतिमा के नजदीक विश्वस्तरीय अत्याधुनिक केवडि़या रेलवे स्टेशन के शिलान्‍यास तथा भारत की पहली रेल युनिवर्सिटी अर्थात नेशनल रेल एंड ट्रांसपोर्ट इंस्टीट्यूट-वडोदरा को राष्ट्र को समर्पित करने जैसी उपलब्धियाँ शामिल हैं। वडोदरा गुजरात का तीसरा सबसे बड़ा शहर है, जो विश्वामित्री नदी के किनारे स्थित है। पश्चिमी भारत का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र होने की वजह से इस शहर में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय महत्व के कई संस्थान मौजूद हैं। पूर्व में वडोदरा राजघराना होने के कारण वडोदरा ऐतिहासिक विरासत से धनी है। वडोदरा राज्य के मराठा राज परिवार गायकवाड राजवंश के गायकवाड का निवास स्थल लक्ष्मी विलास महल इस शहर की प्रगति एवं विकास का साक्षी रहा है। वडोदरा स्टेशन दो अति महत्वपूर्ण मार्गों अर्थात स्वर्णिम चतुर्भुज मुंबई नई दिल्ली लाइन और मुंबई-अहमदाबाद लाइन को जोड़ने वाला एक जंक्शन स्टेशन है। यह स्टेशन प्रतिदिन लगभग 200 ट्रेनों को सेवाएं प्रदान करता है और यहां रुकने वाली कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनों में महामना एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस, दुरंतो, हमसफर, अंत्योदय आदि शामिल हैं। यह एनएसजी 2 कोटि का स्टेशन है और यहां सात प्लेटफार्म हैं। 5 वर्षों में 30 से अधिक नई ट्रेनें शुरू की गई और भविष्य में इनकी संख्या में और भी वृद्धि होगी। कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनों में से एक ट्रेन है महामना एक्सप्रेस वडोदरा को अपने जुड़वा सांस्कृतिक नगर वाराणसी से जोड़ती है।

पश्चिम रेलवे वडोदरा के यात्रियों को अधिक सुखद, सुविधाजनक और आरामदेह यात्रा की अनुभूति कराने हेतु हरसंभव प्रयासरत रहती है। वडोदरा स्टेशन को नये रंग रूप और बदलाव के साथ विषयगत चित्रकारी से सौंदर्यीकृत किया गया है। वर्तमान में वडोदरा स्टेशन एफओबी, लिफ्ट, एस्‍केलेटरों, महिलाओं और पुरुषों के लिए प्रतीक्षालय और डॉरमेट्री रूम विश्रामालय, स्टेशन परिसर में बैठने की व्यवस्था, वाटर कूलर, फूड प्लाजा, मॉड्यूलर टॉयलेट ब्लॉक, नम्मा टॉयलेट, दिव्यांग जनों के लिए रैम्‍प सहित फुट ओवरब्रिज, समय सारणी डिस्प्ले के लिए एलईडी स्क्रीन, इलेक्ट्रॉनिक चार्ट डिस्प्ले सिस्टम, नि:शुल्‍क वाईफाई की सुविधा आदि से सुसज्जित है, जिससे यात्रियों को यात्रा में आसानी हो। दिव्यांग जनों एवं वरिष्ठ नागरिकों को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर ले जाने के लिए बैटरी चालित गाडि़यों की व्यवस्था की गई है। चाइल्ड हेल्प डेस्क, बेबी फीडिंग कॉर्नर और सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन एवं इनसिनरेटर की सुविधा भी इस स्टेशन पर उपलब्ध है । पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पैनल और बॉटल क्रशिंग मशीने भी यहां स्थापित की गई हैं। वडोदरा, भरूच, अंकलेश्वर एवं आणंद स्टेशनों पर नि: शुल्क वाईफाई की सुविधा उपलब्ध होने यहां ट्रेनों के लिए प्रतीक्षा का समय अधिक मनोरंजक और सूचनाप्रद हो गया है। यात्री सुविधाओं से संबंधित विभिन्न निर्माण कार्य जैसे कवर शेड और बाउंड्री वॉल की व्यवस्था, प्‍लेटफॉर्मों का विस्तार एवं उनकी ऊंचाई बढ़ाना, प्लेटफार्म की सतह में सुधार, प्रतीक्षा गृह और कॉनकोर्स एरिया का नवीकरण कार्य आदि को बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। वडोदरा मंडल से पिछले 5 वर्षों में लगभग 30 नई ट्रेन सेवाएं शुरू की गई हैं। साथ ही यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई ट्रेनों को अतिरिक्त ठहराव प्रदान किया गया है, जिससे वडोदरा, आणंद, भरूच एवं आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को लाभ होगा।

वडोदरा गुजरात के सबसे बड़े विश्‍वविद्यालय महाराज सयाजीराव विश्वविद्यालय का नगर है। अब यह राष्‍ट्रीय रेल और परिवहन संस्थान के रूप में भारत का पहला रेल विश्वविद्यालय होने का श्रेय भी रखता है, भारतीय रेल राष्ट्रीय अकादमी एनएआईआर के परिसर में स्थित है। इसमें लगभग 55 एकड़ का परिसर है। राष्ट्रीय रेल और परिवहन संस्थान परिवहन से संबंधित शिक्षा, बहु विद्या अनुसंधान और प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ-साथ परिवहन क्षेत्र के लिए सर्वश्रेष्‍ठ पेशेवरों के संसाधन पूल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। देश का पहला रेल परिवहन विश्‍वविद्यालय यहाँ स्‍थापित करने की संकल्‍पना माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा प्रदान की गई थी और माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल द्वारा इसे साकार किया गया। यह विज़न 5 सितंबर, 2018 को शिक्षक दिवस के अवसर पर एक वास्तविकता बन गया, जब राष्ट्रीय रेल एवं परिवहन संस्थान ने भारत के 20 राज्यों के 103 छात्रों के पहले बैच में पूर्ण आवासीय अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रम हेतु अपने द्वार खोल दिए। छात्रों को आईआईटी-मद्रास, आईआईटी-मुंबई, एक्सएलआरआई-जमशेदपुर, कनाडा के कैल्गेरी विश्वविद्यालय, अमेरिका के पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थानों में और व्यापक शिक्षण अनुभव के साथ उत्‍कृष्‍ट फैकल्टी द्वारा पढ़ाया जा रहा है। एनआरटीआई दुनिया भर के शीर्ष विश्वविद्यालयों और संगठनों के साथ वैश्विक एवं राष्ट्रीय साझेदारी विकसित करने पर केंद्रित है।

यह नवीनतम शिक्षण और प्रोग्राम डिजाइन, मौजूदा परिवहन संबंधित डोमेन ज्ञान, नवोत्‍पाद तथा अनुसंधान विकास तक पहुंच को सक्षम करेगा। एनआरटीआई ने परिवहन प्रणालियों के अनुसंधान के लिए एक अंतर विषय दृष्टिकोण अपनाया है। यह विभिन्न पृष्ठभूमि से शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को एक साथ ला रहा है तथा इसकी शैक्षणिक और औद्योगिक भागीदारी एवं सहयोग का लाभ उठाने की योजना बना रहा है। इस भवन में 250 कमरों वाला बहुमंजिला हॉस्‍टल भवन, मैस, मनोरंजनात्‍मक हॉल के अतिरिक्त अपग्रेडेशन किये जा रहे हैं, जिनमें सभागार, स्पोर्ट्स एक्टिविटी सेंटर तथा अतिरिक्त 50 कमरों का प्रीमियम हॉस्टल शामिल है। इसके लिए 44 करोड़ रु. की स्वीकृति दी गई है।

इसी प्रकार भारत में बुलेट ट्रेन चलाने की महत्वाकांक्षी परियोजना एवं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का स्वप्न दिन-प्रतिदिन आकार प्राप्त कर रहा है। वडोदरा भी इस मेगा परियोजना का हिस्सा है क्योंकि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन वदोदरा, भरूच एवं आणंद में भी आयेगी। यह परियोजना यात्रा अनुभवों को एक अलग ही स्तर पर ले जाएगी। पश्चिम रेलवे अपने सम्माननीय यात्रियों को स्टेशन एवं सुखद यात्रा अनुभव प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है । बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए हाई स्पीड ट्रैक के निर्माण कार्य हेतु वडोदरा स्टेशन पर प्‍लेटफॉर्म संख्या 6 एवं 7 को लंबे समय तक बंद करने की आवश्यकता है। इसके फलस्वरूप वडोदरा स्टेशन पर यातायात दबाव और अधिक बढ़ेगा। इस समस्या के निराकरण हेतु वडोदरा शहर में वडोदरा स्टेशन के निकट फ्लैग स्टेशन छायापुरी

छायापुरी रेलवे स्टेशन के भवन का डिजाइन

को 43 करोड़ रुपए की लागत से नये सैटेलाइट स्टेशन के रूप में विकसित किया गया है। यह वडोदरा-अहमदाबाद लाइन तथा वडोदरा-रतलाम लाइन को जोड़ने वाले बायपास पर स्थित है। अहमदाबाद-रतलाम तथा आगे की यात्रा की ट्रेनों को चलाने के लिए छायापुरी स्टेशन वडोदरा शहर के लिए एक सेटेलाइट स्टेशन के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान करेगा। यहां 26 डिब्बों की ट्रेनों के लिए लंबे प्लेटफार्म तथा दो लूप लाइन हैं। अहमदाबाद से रतलाम-दिल्ली वाया वडोदरा आने एवं जाने वाली ट्रेनों को वडोदरा स्टेशन पर रिवर्स करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे प्रति ट्रेन के परिचालन में 27 मिनट की बचत की जा सकेगी तथा इससे वडोदरा स्टेशन का दबाव भी कम होगा। इससे इन रूटों पर और अधिक ट्रेनों को चलाने का मार्ग प्रशस्त होगा। साथी ही ट्रेनों की समयपालनता में भी वृद्धि होगी।

छायापुरी स्टेशन के आसपास के क्षेत्रों में भी होगा, क्योंकि नए स्टेशन से संभावनाओं एवं सुविधाओं को नई राह मिलेगी। भारत विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैचू ऑफ यूनिटी का देश है तथा इस प्रतिष्ठित स्मारक एवं नर्मदा घाटी की खूबसूरती ने न केवल भारत बल्कि संपूर्ण विश्व के हजारों पर्यटकों को रोमांचित कर अपनी ओर आकर्षित किया है। भारतीय रेल ने केवड़िया में नए विश्व स्तरीय और अत्याधुनिक रेलवे स्‍टेशन का निर्माण कर इस इंजीनियरिंग चमत्कार को भारत के रेल मानचित्र में शामिल करने हेतु एक महत्‍त्‍वपूर्ण कदम बढ़ाया है। महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद द्वारा गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री श्री विजय भाई रूपाणी, माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल एवं अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में 15 दिसंबर, 2018 को केवडि़या रेलवे स्टेशन की आधारशिला रखी गई थी।

प्रस्तावित केवडिया रेलवे स्टेशन की भव्‍य इमारत का डिजाइन

प्रस्तावित केवड़िया रेलवे स्टेशन स्टैचू ऑफ यूनिटी से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है तथा इससे इस प्रतिष्ठित स्मारक पर आने वाली पर्यटकों को सरल रेल हेड उपलब्ध होगा। प्रस्‍तावित केवडि़या स्टेशन की इमारत का कार्य डभोई-चांदोड (18 किलोमीटर) की गेज रूपांतरण परियोजना सहित केवड़िया तक 32 किलोमीटर की नई लाइन के रूप में विस्तार परियोजना के अंतर्गत होगा। प्रस्तावित केवडि़या स्टेशन भवन का निर्माण 20 करोड़ रु. की अनुमानित लागत से किया जाएगा। स्टेशन पर दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान जैसे व्हील चेयर एक्सेस, विभिन्न मंजिलों पर आवागमन हेतु लिफ्ट एवं एस्केलेटर, रेलवे स्टेशन के दोनों तरफ दिव्यांग मित्रवत शौचालय इत्यादि उपलब्ध कराये जायेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों एवं नेताओं की मेजबानी हेतु सामान्य प्रतीक्षालय सहित मल्टीपल प्रतीक क्षेत्र, प्रतीक्षालय वीआईपी एग्जीक्यूटिव लाउंज होंगे। संपूर्ण स्टेशन भवन एक त्रि-स्तरीय संरचना है, जिसमें पहले एवं दूसरे तल पर सभी स्टेशन संबंधी सुविधाएं जैसे स्टेशन मास्टर का कमरा, सामान्य प्रतीक्षालय, वीआईपी रूम कथा वीवीआईपी एवं विदेशी पर्यटकों के लिए लाउंज होंगे।

तीसरी मंजिल में एक आर्ट गैलरी होगी, जो स्थानीय और जनजातीय कला एवं हस्तशिल्पों को बढ़ावा देगी। निर्माण के समय ही ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन प्राप्त करने वाला यह देश का पहला स्टेशन भी है । इस स्टेशन के भवन की डिजाइन में सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी, आवरण के प्रति सजगता और सौंदर्यपरक तत्वों का अद्भुत मिश्रण शामिल होगा। इस भवन को इतनी सजगता से डिजाइन किया गया है कि इस स्थान के वर्तमान पारिस्थितिकी तंत्र को न्यूनतम नुकसान होगा। इस भवन से समग्र कार्बन निकासी को कम करने के लिए रीसाइकिल्ड सामग्री जैसे फ्लाई ऐश ब्रिक्स, एयर कंडीशन रूम के लिए इंसुलेटेड ग्लास और लोकल सामग्रियों का उपयोग किया जाएगा। इस स्टेशन की छत पर 200 किलो वाट की विद्युत उत्पादन क्षमता वाले सोलर पैनल स्थापित किए जाएंगे। इस स्टेशन पर मल्टीपल वाटर मैनेजमेंट सुविधाएं होंगी, जिसमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग, ट्रीटमेंट प्लांट, वॉटरलेस यूरिनल ट्रीटेड वॉटर के प्रयोग से ड्रिप इरिगेशन टेक्नोलॉजी शामिल है।

पर्यावरण अनुकूल पहल को आगे ले जाते हुए पश्चिम रेलवे ने वडोदरा शेड के 44 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में एचओजी सिस्टम को क्रियान्वित किया है, जिससे डीजल की खपत में कमी के साथ-साथ स्‍टेशन क्षेत्र में ध्‍वनि प्रदूषण की समस्‍या भी कम होगी। एचओजी सिस्‍टम में परिवर्तित होने के फलस्‍वरूप 27.18 करोड़ रु. की कुल बचत होगी। वडोदरा शेड में पैसेंजर ट्रेन को वहन करने वाले 159 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में रियल टाइम ट्रेन सूचना प्रणाली उपलब्ध कराई गई है। इसके फलस्वरूप मेल/एक्‍सप्रेस ट्रेनों की रियल टाइम रनिंग को मॉनिटर करने में मदद मिलती है और यात्रियों को उनकी ट्रेनों के रनिंग की वास्‍तविक स्थिति का भी पता चलता है।

इसी प्रकार 250 डीजल लोकोमोटिव को रियल टाइम लोकेशन के लिए REMMLOT उपकरण के साथ फिट किया गया है। गुजरात के छोटा उदेपुर और मध्यप्रदेश के धार के बीच एक नई ब्रॉडगेज लाइन का कार्य प्रगति पर है। अलीराजपुर तक 40.55 किलोमीटर नई लाइन के एक सेक्‍शन का कार्य पूरा हो चुका है और यात्री तथा गुड्स ट्रेन की आवाजाही के लिए इसे खोला जा रहा है। इसके साथ इस लाइन पर अलीराजपुर तक का क्षेत्र वडोदरा के साथ जुड़ जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप मुंबई-अहमदाबाद-दिल्ली मेन लाइन भी जुड़ जायेगी। इसके फलस्वरूप अलीराजपुर के आसपास के आदिवासी क्षेत्रों के सामाजिक आर्थिक विकास को गति मिलेगी। वडोदरा और आगे के क्षेत्रों तक और सुविधाजनक परिवहन की पद्धति के कारण इस क्षेत्र के लोगों को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर प्राप्‍त होंगे। पूरे भारत में बाजारों में उत्‍पादों की तेज आवाजाही के कारण कृषि उत्पादों को भी लाभ मिलेगा। अलीराजपुर के विश्व प्रसिद्ध ‘नूरजहां’ आम को बाजारों और उपभोक्ताओं तक बेहतर पहुंच के कारण आम के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। माननीय प्रधानमंत्री द्वारा आणंद-गोधरा दोहरीकरण परियोजना के कार्य के लिए शिलान्यास किया गया था। आणंद और गोधरा काफी लंबे समय से सिंगल लाइन के जरिए जुड़ा हुआ था। भले ही गुजरात के ये दो शहर केवल 78.80 किलोमीटर की दूरी पर हैं, मगर ट्रेनों की बढ़ती फ्रीक्वेंसी के कारण यहाँ यातायात का दबाव काफी बढ़ गया है। दोहरीकरण के परिणाम स्वरूप रेल यातायात को पारिचालनिक तेजी मिलेगी। यह परियोजना सुचारु यातायात के लिए फायदेमंद होगी और यातायात दबाव को कम करने में मदद करेगी। इसके अलावा सेक्‍शन की क्षमता भी बढ़ेगी और ट्रेनों की समयपालनता में भी वृद्धि हो जायेगी। कनेक्टिविटी प्रदान करने के अलावा स्‍थानीय तथा आसपास के क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

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