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अपने परिवार को समय देने के लिए स्तीफा देने वाला प्रधानमंत्री

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जाॅन की ने इस्तीफा क्या दिया, सारी दुनिया उन्हें जान गई। न्यूजीलैंड सुदूर पूर्व का महत्वपूर्ण देश है लेकिन वह इतना प्रसिद्ध नहीं है कि दुनिया उसके प्रधानमंत्रियों को नाम से जाने। लेकिन जाॅन की को सारी दुनिया इसलिए जान गई कि उन्होंने सचमुच पद-त्याग किया। प्रधानमंत्री तो क्या, कोई नगरपालिका का पार्षद भी स्वेच्छा से अपना पद-त्याग नहीं करता है। आज तक हमने दुनिया के किसी प्रधानमंत्री के बारे में यह नहीं सुना कि उसने स्वेच्छा से पद-त्याग किया। भारत को ही लें। हमारे यहां एक भी प्रधानमंत्री जाॅन की की तरह नहीं हुआ। या तो यमराज ने उन्हें बुला लिया या संसद ने उनकी टांग खींच दी या वे चुनाव में हार गए। बदनाम होने पर भी वे टिके रहे। देश को भयंकर संकट में फँसाकर भी उनको शर्म नहीं आती।लेकिन जॉन एक शानदार नेता रहे हैं।जॉन की ने अपने इस्तीफे का कारण यह बताया कि वे इस पद पर रहते हुए अपनी पत्नी और बच्चों का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रख पाते। उनके बच्चे कब बड़े हो गए, उन्हें पता ही नहीं चला।

वे पिछले आठ-नौ साल से प्रधानमंत्री रहे हैं। दो दिन पहले प्रेस कांफ्रेस करते हुए वे भावुक हो गए और अचानक उन्होंने इस्तीफे की घोषणा कर दी। पूरा न्यूजीलैंड सन्न रह गया। उनके विरोधी भी अचंभे में पड़ गए। उनके विरोधी भी उनकी तारीफ कर रहे हैं। कुछ यह भी कह रहे हैं कि वे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री पद से नहीं, पार्टी-नेता के पद से भी इस्तीफा दे दिया है। अब वे संसद के साधारण सदस्य के रुप में ही रहेंगे। जाॅन की की उम्र अभी सिर्फ 55 साल है और उन्हें इस बात का श्रेय है कि वैश्विक मंदी के कठिन दौर में से न्यूजीलैंड को बाहर निकाल लिया था। जाॅन के बारे में उनके बेटे का कहना है कि उनके पिता एक आदर्श पुरुष हैं।

जाॅन की के इस इस्तीफे पर दुनिया के अन्य देशों के लोग कैसे भरोसा करेंगे? मुझे भी आश्चर्य है। यह ऐसा है, जैसा कि कोई अरबपति जैन सेठ अचानक मुनि बन जाए, या कोई आम्रपाली-जैसी नगरवधू साध्वी बन जाए या कोई शेर बकरी बन जाए? लेकिन इतिहास में ऐसे कई उदाहरण अवश्य मिलते हैं। सम्राट अशोक का उदाहरण हमारे सामने है। उम्मीद करना चाहिए कि जाॅन की के इस्तीफे के पीछे ऐसा ही कोई आध्यात्मिक कारण रहा होगा। जाॅन की के उच्चाटन से क्या अन्य नेता कुछ सबक लेंगे? जाॅन की के इस्तीफे ने जो सवाल उछाला है, वह यह है कि अपनी खुशी बड़ी चीज़ है या कोई पद बड़ा है?



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