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संघ प्रमुख ने उज्जैन में भारत माता मंदिर का लोकार्पण किया

उज्जैन। देश को सामाजिक तौर पर समरस और भेदभावमुक्त बनाने पर जोर देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख श्री मोहन भागवत ने कहा कि सभी नागरिकों को एक-दूसरे के साथ समान रूप से आत्मीयता भरा बर्ताव करना चाहिए. श्री भागवत ने स्थानीय परमार्थ संस्था माधव सेवा न्यास द्वारा नवनिर्मित मंदिर में भारत माता की 16 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया. उन्होंने इस मौके पर आयोजित समारोह में कहा, “हमें मातृभूमि की भक्ति करते हुए सम्पूर्ण समाज को अपना मानना होगा. हमें अपने-पराये और छोटे-बड़े के भेदभाव से मुक्त होना होगा. हमें सबसे एक समान बर्ताव करना होगा।”

संघ प्रमुख ने देश के सभी नागरिकों के एक-दूसरे के साथ “सगे भाई-बहनों की तरह” आत्मीयता से रहने पर बल देते हुए कहा, “जहां आत्मीयता होती है, वहां अहंकार नहीं होता.” संघ प्रमुख ने कहा, “जैसे किसी परिवार का कोई होनहार पुत्र अपने कार्यों से सारे परिवार की कीर्ति और संपत्ति बढ़ाता है, वैसे ही परमवैभव संपन्न, समरस और शोषणमुक्त भारत के अवतरण से पूरी दुनिया का चित्र बदलेगा. हमें इस बात को आत्मसात कर संकल्प लेना पड़ेगा और इसके मुताबिक अपने जीवन को बदलना पड़ेगा.”

उन्होंने “अखंड भारत” की संघ की परिकल्पना का हवाला देते हुए कहा, “हमें हमेशा भारत माता के अखंड स्वरूप की भक्ति करनी चाहिए.” संघ प्रमुख ने कहा, “हम पूरी धरती को अपना कुटुंब मानते हैं. हम अपने अंदर और दुनिया के कण-कण में ईश्वर को देखते हैं. भारत की मूल विचारधारा इसी बात पर आधारित है.” उन्होंने कहा, “भारत, भूमि के किसी टुकड़े भर का नाम नहीं है. हालांकि, ऐसे भी कुछ लोग हैं जो भारत को केवल भूमि का टुकड़ा बताकर कुछ न कुछ कहते रहते हैं. वैसे ये लोग भी हमारे भाई-बहन और भारत माता की संतान ही हैं.”

उन्होंने कहा कि अन्नादुरै एक जमाने में यह विचार रखते थे कि तमिलनाडु “अलग देश” है और भारत से इसका कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन जब वर्ष 1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण किया, तो दक्षिण भारत के इस बड़े राजनेता ने एक सभा में कहा कि “भारत की उत्तरी सीमा पर चीन का हमला तमिलनाडु पर विदेशी आक्रमण है.” भागवत ने कहा, “अन्नादुरै ने स्वस्फूर्त भाव से यह बात कही. आखिर यह बात उन्हें किसने सिखायी थी. दरअसल भारत की मिट्टी ने हर नागरिक के मन में देशभक्ति का बीज स्वाभाविक रूप से पहले ही बो दिया है. भले ही कुछ लोग इस बात को न जानते या न मानते हों.”

उन्होंने कहा- भारत के ही कुछ पुत्र हैं जो इसे धरती का टुकड़ा कहते हैं लेकिन भारत हमारी माता है, हमें जो कुछ भी मिला है इसी से मिला है।

-हम जिस भूमि में रहते हैं, वह सर्वदा देने वाली है। हमारे पास सब कुछ था इसलिए हम शांतिप्रिय बन गए। इसीलिए जहां दुनिया रुक गई वहां से हम आगे बढ़ गए। हमने जाना विश्व रूप परमात्मा है।

– भारत का यही संदेश विश्व में सुख और शांति ला सकता है। हमें इस संदेश को देने के लिए अपने आप को तैयार करना पड़ेगा।

– हमारे मन में अखंड भारत का स्वरूप हमेशा रहना चाहिए और यह भाव भी कि इसके लिए यदि मरना भी पड़े तो यह मेरा सौभाग्य होगा।

– डॉ.भागवत ने अखबार में छपी एक खबर का हवाला देते हुए कहा कि एक तकनीकी विशेषज्ञ ने उस खबर में कहा है कि तकनीकी ज्ञान में हम अपने में पराए हो गए हैं, कई समस्याएं पैदा हो रही है लेकिन भारत के पास इसका उपाय है।

इस अवसर पर साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि हमें अपने जीवन पुष्प चढ़ाकर मां भारती की सेवा करनी है। जो दिया जाता है, वही वापस मिलता है। जो चोट सहता है, वह पत्थर मूर्ति बन जाता है। जो चोट से बिखर जाता है, वह कंकर बन जाता है। दुनिया सुख और शांति के लिए भारत की ओर देख रही है। भारत के अध्यात्म की धारा ही विश्व को तृप्त करेगी। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि हम दुनिया को बदल रहे हैं या दुनिया हमको बदल रही है? जब दुनिया भौतिकता से त्रस्त हो जाती है तो वह भारत की ओर देखती है। हर समय खुशहाल रहने की कला केवल भारत ही दुनिया को सिखा सकता है। झंझटों से भागना तो आसान है लेकिन झंझटों में रहकर बनना कोई हमसे सीख ले।

ऐसे बना मंदिर

– 16 मई 1931 को 13 बीघा जमीन दान में मिली थी।

– 7 बीघा जमीन पर भारतमाता मंदिर की योजना बनी।

– 2008 में स्वामी सत्यमित्रानंदजी की उपस्थिति में मंदिर निर्माण का भूमिपूजन।

– 24 मई 2012 को मंदिर निर्माण आरंभ हुआ।

-मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन 2008 में किया गया था।

-2012 में निर्माण के लिए औपचारिक काम शुरू किया गया।

-निचले तल पर ध्यानकेंद्र और पुस्तकालय।

-इसके ऊपर 14 फीट ऊंची भारत माता की संगमरमर से बनी मूर्ति।

-4 हजार वर्ग फीट का गर्भगृह।

-सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक कर सकेंगे दर्शन।

-मंदिर में ऑडिटोरियम का निर्माण भी किया गया है।

मंदिर निर्माण में मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष एवँ संघ के समर्पित कार्यकर्ता श्री प्रदीप पाण्डेय की उल्लेखनीय भूमिका रही।

श्री प्रदीप पाण्डेय की नमामि देवी नर्मदे-नर्मदा यात्रा, नर्मदा किनारे 6 करोड़ पौधों के रोपण में मुख्य भूमिका रही है। इसके साथ ही वे मध्य प्रदेश में शंकराचार्य के एकात्म दर्शन को घर घर तक पहुँचाने के लिए 19 दिसंबर से 22 जनवरी तक आयोजित एकात्म यात्रा से भी जुड़े हैं।



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