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रज्जो [हिंदी अपराध कथा ]

फिल्म समीक्षा 
रामकिशोर पारचा 
रज्जो [हिंदी अपराध कथा ] 
दो टूक : कौन कहता है कि तवायफों के लिए जिंदगी बस कोठा होती है . पर ये  भी सच है कि उस कोठे से उतरकर किसी तवायफ के लिए सीधी जिंदगी का रात आसान नहीं है । निर्देशक विश्वास पाटिल की कंगना राणावत ,  अरोरा महेश ,  प्रकाश राज ,जया  प्रदा , तनुश्री चक्रवर्ती  , दिलीप ताहिल  और स्वाति चिटनिस के साथ कृतिका चौधरी के अभिनय वाली रज्जो भी बस एक ऐसी ही कहानी  कहती है.

कहानी : फ़िल्म की कहानी है रज्जो(कंगना रांवत ) की है जो  नागपाड़ा के एक कोठे की तवायफ हैं। रज्जो अपने इलाके की सबसे मशहूर तवायफ हैं। एक दिन रज्जो के कोठे पर चंदू (पारस अरोड़ा) आता है तो  वह रज्जो की गायिकी का दीवाना हो जाता है और उसे दिल दे बैठता है। पर  उनके रास्ते में हांडे भाऊ [प्रकाश राज ] आ जाता है तो उनका प्रेम भी जिंदगी और मौत के बीच फंस जाता है . उनकी मदद को अति है बेगम [महेश मांजरेका ] और फिर शुरू होती है उनके प्रेम और जिंदगी के एक कड़वे सच को जीने की  शुरुआत .

गीत संगीत : फ़िल्म में उत्तम सिंह का संगीत है और  गीत देव कोहली के साथ समीर और विश्वास पाटिल के हैं लेकिन फ़िल्म के गीत अच्छे होने के बाद भी राम लीला के द्वन्द में फंस कर बस याद रहते हैं लेकिन हाल से बाहर  नहीं आते . 

अभिनय : फ़िल्म में  कंगना केंद्र में हैं और पारस उनके सामने बहुत कुछ नहीं कर पाते . कृष के बाद कंगना को एक नयी भूमिका में देखना सुखद है पर पारस को अभी और मेहनत करनी होगी . महेश किन्नर की भूमिका में जमते हैं लेकिन प्रकाश राज खुद को दोहराते हैं .. दिलीप ताहिल और जया प्रदा के साथ किशोर कदम और उपेन्द्र लिमय ठीक है पर बहुत नया नहीं करते . 
निर्देशन: फ़िल्म की कहानी में कोई नयापन नहीं लेकिन विश्वास पाटिल की ये फ़िल्म बुरी नहीं है और बिनोद प्रधान के कैमरे से निकली ये फ़िल्म कुछ चमकीले और कुछ घहरे रंगों के साथ देख सकते हैं आप .

फ़िल्म क्यों देखें : कंगना के लिए .
फ़िल्म क्यों न देखें : एक पुरानी कहानी पर नयी फ़िल्म है . 
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रामकिशोर पारचा

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