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‘प्रणाम पर्यटन’का “औरंगाबाद को प्रणाम”

हिन्दी में पर्यटन पर आधारित देश की पहली पत्रिका “प्रणाम पर्यटन” का जनवरी-मार्च 2021 का अंक महाराष्ट्र के ऐतिहासिक शहर औरंगाबाद पर केन्द्रित है। इस अंक को पढ़ कर पर्यटक व आमजन महाराष्ट्र के औधोगिक शहर औरंगाबाद के बारे में काफी कुछ जान पाएंगे। इस पत्रिका की खासियत यह है कि यह कोविड काल के कठिन दौर में भी इसने अपना अस्तित्व बनाए रखा और छपती रही। इसके अंक निरंतर पाठकों तक पहुँचते रहे। आलोच्य अंक में पत्रिका के प्रदीप श्रीवास्तव ने अपने संपादकीय में इस शहर के क्रमिक विकास का पूरा खाका खींचा है । इसी तरह कवर स्टोरी ’52 दरवाजों का शहर औरंगाबाद’ में विजय चौधरी ने शहर के अतीत से अब तक का ऐतिहासिक साक्ष्य को समेटा है,वहीं वह निकटवर्ती शहर खुलताबाद ,जिसे ‘सूफी संतों का शहर भी कहते हैं’ पर भी काफी रोचक सामग्री दी है। डॉ श्रीमंत हरकर का आलेख भी पाठकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है । इसमें कहा गया है कि औरंगाबाद पर्यटन की राजधानी है।

विश्व प्रसिद्ध एलोरा की गुफाओं के निकट बारहवें ज्योर्तिलिंग “घृष्णेश्वर मंदिर” पर भी काफी रोचक सामग्री दी गई है । वहीं गुफा नंबर 16 में स्थित कैलाश मंदिर के बारे में भी ज्ञानवर्धक जानकारी है । मुगल शासक औरंगजेब की कच्ची मज़ार हो या उनकी बेगम दिलरस बानो उर्फ रबिया-उर-दुरानी का मकबरा,जिसे ‘बीबी का मकबरा के नाम से जाना जाता है,पर रोचक सामग्री परोसी गई है। इतिहास व भूगोल की जानकारी देते आलेख पाठकों को भरपूर जानकारी देते हैं। अजंता की गुफाओं व एक दिन की राजधानी के लिए मशहूर दौलताबाद के किले पर भी रोचक जानकारी वाला आलेख है इसमें। इसी किले से मालिक अंबर की सेना ने जहाँगीर की सेना को ‘राकेटों’के हमले सी शिकस्त दी थी। लेखक लिखतें हैं कि इतिहास इस बात का गवाह है कि भारत में पहली बार किसी जंग में ‘राकेटों’ का इस्तेमाल हुआ था। यह वही शहर है जहां एशिया की पहली नौ मंज़िला इमारत का निर्माण हुआ था।छत्रपती शिवाजी महाराज का ददिहाल भी इसी एलोरा गाँव मैं है । यह शहर संत ज्ञानेश्वर की भूमि है तो ज्योतिष बराह मिहिर से भी जुड़ा है। यह जरूर है कि मुहम्मद बिन तुगलक भले ही इसे राजधानी नहीं बना सका लेकिन इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में इस शहर का नाम अंकित जरूर करा दिया। इस अंक में सूलीभ दत्त मंदिर तथा चार सौ साल पुराने पनचक्की के बारे में भी पठनीय सामग्री है। वहीं साड़ियों की रानी कही जाने वाली ‘पैठनी साड़ी’ पर भी रोचक जानकारी है।

पर्यटन के अलावा साहित्य पढ़ने का आनंद भी पाठक ले सकते हैं । इस अंक में कई रोचक कहानियाँ ,कवितायें आदि का भी समावेश है । पर्यटन पर दी गई सामग्री को आकर्षक चित्रों के साथ सजाया गया है। जिसमें से कई चित्र दुर्लभ भी हैं। पर्यटन की दृष्टि से पर्यटकों को जो भी जानकारी चाहिए ,वह सभी इस पत्रिका में मिल जाएगी । लखनऊ से प्रकाशित यह पत्रिका पाठकों को जरूर पसंद आएगी । पत्रिका का मूल्य 75 रुपये है।

पत्रिका : प्रणाम पर्यटन (त्रैमासिक)
कीमत : 75/- पृष्ठ – 52
संपादक : प्रदीप श्रीवास्तव
प्रकाशक : प्रणाम पब्लिशिंग हाउस
‘उद्गम’,537F/64A
इंद्रपुरी कालोनी, निकट भिठोली तिराहा
लखनऊ-226013 (उत्तर प्रदेश)
प्रदीप श्रीवास्तव
8707211135

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