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नागपुर में सप्त सिंधु महोत्सवः जम्मू-कश्मीर और लेह लद्दाख की संस्कृति के दर्शन

नागपुर के दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में जम्मू – कश्मीर स्टडी सेंटर द्वारा आयोजित “सप्तसिंधु, जम्मू – कश्मीर, लद्दाख महोत्सव का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने किया। इस मौके पर मिजोरम के राज्यपाल निर्भय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थेI संघ प्रमुख ने कश्मीर मुद्दे पर अपने संबोधन में कहा कि कश्मीर के बारे में समस्या हम लोगो में है I उस मुद्दे पर प्रश्न उपस्थित करमे के लिए अलगाववाद जिम्मेदार है I जिसका हमें उपाय निकालना है क्योंकि जम्मू-कश्मीर लद्दाख गिलगित बाल्टिस्तान भारत का अभिभाज्य अंग है।

कार्यक्रम में मिजोरम के राज्यपाल निर्भय शर्मा ने कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान की अहमियत को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। जम्मू कश्मीर के ऐतिहासिक तथ्यों पर जोर देते हुए कहा कि सम्राट अशोक ने ही श्रीनगर शहर का नाम दिया था। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के बच्चों के मन में भारत के प्रति नफरत के बीज बोये जा रहे हैं । उन्होंने मिजोरम के जम्मू कश्मीर में सेना में बिताए अपने 20 बरस याद करते हुए कई रोचक प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं ऐसा भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। सम्राट अशोक ने श्रीनगरी की स्थापना की थी। वहां हिंदू एवं बौद्धधर्म के अवशेष हैं। गिलगिस्तान देखेंगे, तो हमें पता चलेगा कि कश्मीर भारत का मुकुट है। यह बात महाभारत, पुराण में भी बताई गई है, लेकिन कश्मीर में जहर घोलने की कोशिश की जा रही है कि वह अलग है। मैंने सेना के 40 वर्ष के कार्याकाल में 20 वर्ष जम्मू में बिताए हैं।

अपने संबोधन में डॉ. मोहन भागवत ने जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के ‘लोगों को बांटने की कोशिश करने वाली ताकतों’ से निपटने के लिए शक्ति और युक्ति के इस्तेमाल का आह्वान करते हुए कहा कि परेशानी पैदा करने वाले ताकत की ही भाषा समझते हैं। उन्होंने कहा कि ‘सत्य की जीत’ सुनिश्चित करने के लिए शक्ति और युक्ति की जरूरत है। भागवत गुरुवार शाम नागपुर में जम्मू-कश्मीर स्टडी सेंटर द्वारा आयोजित सप्त-सिंधु जम्मू कश्मीर लद्दाख महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने अपने ‘प्रयासों, बलिदानों एवं समर्पण के साथ’ शक्ति बनाए रखी है। इसकी इसलिए जरूरत है, क्योंकि परेशानी पैदा करने वाले ‘केवल ताकत की भाषा समझते हैं।’ उन्होंने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप एक राष्ट्र का है और उसका डीएनए एक ही है।

लेह लद्दाख के महान बौध्द भिक्षुक कुशल बकुला बकुला का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम एक नहीं होते तो जम्मू-कश्मीर में जब पाकिस्तान के कबाइलियों ने हमला किया तो उस वक्त कुशोक बकुला ‘ नुब्रा आर्मी ’ का गठन क्यों करते। उन्होंने कहा कि पूरे भारत में दर्शन की पद्धित चलती है और जो घाटी में भी चलती है। श्रीनगर लगा श्री शब्द इसका परिचायक है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर स्टडी सेंटर ने अध्ययन करके आचार्य अभिनवगुप्त, कुशक बकुला और राज्य संस्कृति को आम जनमानस तक पहुंचाने का बड़ा किया किया है।

उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने औरंगजेब को काशी विश्वनाथ मंदिर तोड़ने पर पत्र लिखकर कहा कि इस्लाम के नाम पर हिंदुओं का उत्पीड़न गलत है, क्योंकि काशी विश्वनाथ हमारा है। वहीं खुद को द्रविड़ कह कर अलग देश बताने वाले अन्नादुरै मुख्यमंत्री बने और जब चीन ने हिमालय पर हमला किया तो उन्होंने कहा कि ये हमला हिमालय पर नहीं हम पर हुआ है।

डॉ. भागवत ने कहा कि हम एक हैं। इसका प्रमाण है कि पाक से हमला करने के लिए आने वाले कबायलियों को बौद्ध संत कुशक बकुला ने अपनी सेना बनाकर रोक दिया था। हमें युक्ति और शक्ति से काम करना होता है। हमारे देश में शक्ति को नहीं सत्य को मानते हैं, जबकि दुनिया शक्ति को मानती है। जम्मू कश्मीर, लद्दाख में सेना पड़ोसी को शक्ति से समझाती है, क्योंकि वह वही समझते हैं। हमें युक्ति और शक्ति के पीछे भक्ति खड़ी करना है।

श्री मोहन भागवत ने कहा, “कश्मीर समस्या को समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। समस्या की जड़ यह है कि हम अपनी एकता भूल गए हैं और यह भूल गए हैं कि भारत एक (देश) है। उन्होंने कहा ,”हम सब अखंड भारत के लोग एक हैं। यहां रहने वाले लोगों का डीएनए 40 हजार वर्षों से एक-सा है। हम खुद को भूल गए, तो बाहर वालों ने हमें ही बाहर का बता दिया और हम उनके झांसे में आ गए। काबुल का पूर्वी हिस्सा, चीन की ढलान से लेकर दक्षिण में श्रीलंका तक पूरा एक देश है। इसे बताने की आवश्यकता नहीं है।”

इस मौके पर जम्मू कश्मीर स्टडी सेंटर की नागपुर इकाई की अध्यक्ष मीरा खडक्कार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ये महोत्सव जम्मू कश्मीर लद्दाख से जुड़ी हुई तमाम जानकारियों से लोगों को रूबरू करवाएगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर तमाम तरह की भ्रांतियां लोगों के मन में पैदा की गई हैं जिन्हें अब दूर करने की जरूरत है।

सप्तसिंधु जम्मू-कश्मीर लद्दाख महोत्सव में चार यात्राओं का शुभारंभ किया गया जो देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर कुशोक बकुला के विचारों से लोगों को अवगत कराएंगी। 19 मई को लेह में जाकर ये यात्राएं सम्पन्न होगी।

इससे पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सप्तसिंधु जम्मू-कश्मीर लद्दाख महा उत्सव की प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में जम्मू कश्मीर लद्दाख के महापुरुषों के जीवन , पर्यटन स्थल और धार्मिक – आध्यात्मिक स्थल और संस्कृति को दर्शाते हुए कलाकृतियां दर्शायी गई हैं। आचार्य अभिनवगुप्त , शैव दर्शन , खूबसूरत वादियां और कुशोक बकुला पर दर्शायी गईं कलाकृतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। दिल्ली और बेंगलुर स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में तैयार की गई कला को इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया है I शैवपंथ की किताबे आचर्य अभिनव गुप्त, बौद्ध धर्मगुरु कुशक बकुला रिम्पोछे और जम्मू कश्मीर स्थित स्मारक की जानकारी देनेवाली करीबन 150 छायाचित्र यहाँ प्रदर्शित की गई हैI ख़ास बात यह है की इस प्रदर्शनी में भारतीय सेना का स्टॉल भी लगाया गया है, जिसमें भारत में ही निर्मित टैंक को नष्ट करने वाली मिसाईल से लेकर दो किलोमीटर दूर खड़े दुश्मन को ढेर कर देने वाली मिसाईलें तक शामिल है। इस समारोह में जम्मू, कश्मीर, लद्दाख से कई छात्र, बुध्दिजीवी, कलाकार आदि शामिल होने आए।



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