Monday, April 22, 2024
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Homeपत्रिकाकला-संस्कृतिव्यंग्य लेखक कुए के मेंढक ना बनेंः प्रेम जन्मेजय

व्यंग्य लेखक कुए के मेंढक ना बनेंः प्रेम जन्मेजय

मुंबई। चित्रनगरी संवाद मंच मुंबई के सृजन सम्वाद में प्रतिष्ठित व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय के ताज़ा व्यंग्य संकलन ‘सींंग वाले गधे’ के ज़रिए व्यंग्य लेखन पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। रविवार 16 अप्रैल 2023 को मृणालताई गोरे सभागृह, केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट, गोरेगांव, मुम्बई में आयोजित इस कार्यक्रम में व्यंग्यकार सुभाष काबरा और कवि देवमणि पांडेय ने उनसे व्यंग्य की दशा और दिशा पर कई सवाल पूछे। प्रेम जनमेजय ने इन सवालों के रोचक जवाब दिए।

हरिशंकर परसाई पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में जनमेजय जी ने कहा कि हिंदी साहित्य में परसाई व्यंग्य की धार्मिक पुस्तक हैं। इसलिए कोई उनकी आलोचना नहीं करता। हक़ीक़त यह है कि प्रगतिशील ख़ेमे में जाने के बाद परसाई जी ने घोषणा कर दी कि व्यंग्य कोई विधा नहीं है। परसाई एक ऐसी ऊंचाई पर थे कि उनका विरोध करने का किसी में साहस नहीं था। लेकिन व्यंग्य ने अपने बलबूते पर विधा के रूप में अपनी पहचान बनाई।
आज के व्यंग्य लेखन पर चर्चा करते हुए प्रेम जनमेजय ने कहा कि ज़्यादातर व्यंग्य लेखक कुएं के मेंढक हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि वे सिर्फ़ व्यंग्यकार नहीं हैं। वे भी साहित्यकार हैं और साहित्यकार का सामाजिक सरोकार होता है। अच्छा लिखना बहुत मुश्किल काम है। व्यंग्य सुशिक्षित मस्तिष्क की विधा है। हमें समाज में कोई विसंगति यानी बीमारी ढूंढनी पड़ती है। फिर उसकी सर्जरी करनी पड़ती है और फिर मरहम पट्टी भी करनी पड़ती है। सही रचनाकार हमेशा ग़लत का विरोध करता है। एक व्यंग्यकार के रूप में मेरे व्यंग्य लेखन का महत् उद्देश्य व्यंग्य की सभ्यता को नष्ट होने से रोकना है।
 
पंकिरण मिश्र को समर्पित काव्य संध्या
प्रतिष्ठित गीतकार पं किरण मिश्र की द्वितीय पुण्यतिथि 16 जुलाई पर रचनाकारों ने उन्हें याद किया। दूसरे सत्र में आयोजित काव्य संध्या पं किरण मिश्र को समर्पित की गई। सर्वप्रथम कवयित्री कमलेश भट्ट ने अपने नए काव्य संकलन ‘किताबें नदी होती हैं’ से चुनिंदा कविताएं सुनाईं। उनकी कविताओं में निहित संवेदना ने श्रोताओं को अपने साथ जोड़ लिया। हालांकि सार्वजनिक तौर पर कमलेश पाठक का यह पहला काव्य पाठ था लेकिन उन्होंने जिस ख़ूबसूरती और भावनात्मक लगाव के साथ कविताओं को पेश किया उसकी काफ़ी तारीफ़ हुई।
कविता पाठ के इस सत्र में गीत, ग़ज़ल और कविताओं की विविधरंगी छटा दिखाई पड़ी। अपनी काव्य प्रस्तुति से जिन रचनाकारों ने कार्यक्रम को समृद्धि किया उनके नाम हैं- डॉ दमयंती शर्मा, पूनम विश्वकर्मा, श्रुति भट्टाचार्य, अंबिका झा, डॉ राजेंद्र गौतम, सुभाष काबरा, रासबिहारी पांडेय, डॉ बनमाली चतुर्वेदी, नवीन जोशी नवा, राजेश ऋतुपर्ण, गोविंद सिंह राजपूत, कौशिक त्रिवेदी और मनोहर जोशी। आकाश ठाकुर के लोकगीत गायन से कार्यक्रम का समापन हुआ।
व्यंग्य यात्रा के संपादक प्रेम जनमेजय ने नारी व्यंग्य लेखन पर केंद्रित व्यंग्य यात्रा का ताज़ा अंक डॉ मधुबाला शुक्ला को भेंट किया। इस अवसर पर प्रतिष्ठित कथाकार पत्रकार हरीश पाठक और कवि पत्रकार हरि मृदुल विशेष रूप से उपस्थित थे।
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