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व्यंग्य को साहित्य के पंगत के साथ बैठाना स्वागत योग्य: प्रेम जनमेजय

नई दिल्ली। ¨हिंदी को समृद्ध और मजबूत करने के लिए चलाई जा रही दैनिक जागरण की मुहिम ‘¨हिंदी है हम’ के अंतर्गत मासिक कार्यक्रम सान्निध्य का दूसरा आयोजन रविन्द्र भवन स्थित साहित्य अकादमी सभागार में हुआ । इस बार के सान्निध्य में नवोदित से लेकर वरिष्ठ कवियों, रचनाकारों, स्तंभकारों और व्यंग्यकारों ने हिस्सा लिया । दो सत्रों में आयोजित इस कार्यक्रम के पहले सत्र में व्यंग्य की समकालीनता विषय पर व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय, सुभाष चंदर, आलोक पुराणिक, सुनीता शानू व पीयूष पांडे ने लोगों को गुदगुदाया, तो वहीँ इस सत्र का संचालन लालित्य ललित द्वारा किया गया.कार्यक्रम के दुसरे सत्र काव्य पाठ में लीलाधर मंडलोई की अध्यक्षता में तजेन्द्र सिंह लूथरा, निखिल आनंद गिरि, पूनम अरोड़ा, पूजा पुनेठा ने अपनी कविताओं के माध्यम से जिन्दगी के विभिन्न पहलूओं को पिरोया।

व्यंग्य की समकालीनता पर सत्र की अध्यक्षता कर रहे व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय ने कहा कि इस तरह की पहल की शुरुवात करना बड़ा ही सराहनीय कदम है साथ ही दुसरे ही कार्यक्रम में व्यंग्य को साहित्य के पंगत के साथ बैठाना उससे भी अधिक स्वागत योग्य है. आगे उन्होंने ‘हंसो हंसो या हंसो’ व्यंग्य से हंसी की विभिन्न प्रकारों पर व्यंग्य भी किया.व्यंग्यकार पीयूष पांडे ने पत्रकारिता के बाजारवाद पर जोरदार कटाक्ष किया. व्यंग्यकार आलोक पुराणिक ने वक्त अच्छा आया या बुरा आया में बाजारवाद ,बेरोजगारी ,विज्ञापनों पर जमकर व्यंग्य किया वहीँ ‘आंतकवाद का मोबाइल सलूशन’ व्यंग्य पर लोगों ने जमकर ठहाके लगाए। सुनीता शानू ने लेखक निर्माण और तालुका व्यंग्य के जरिये बताया कि कैसे आजकल कई फ़िल्में चाहे कुछ समझ में नही आई मगर कैसे सौ करोड़ कमा जाती है। व्यंग्यकार लालित्य ललित ने ‘दिवाली का सनाटा’ और ‘भविष्य के शोक समाचार’ से लोगों को गुदगुदाया तो वहीँ व्यंग्यकार सुभाष चंदर ने नेताओं और उनके जनता के लिए लॉलीपाप वाले खिलौने पर कटाक्ष किया.

दूसरा सत्र कविता पाठ पर समर्पित था, इसमें तजेंद्र सिंह लूथरा ,निखिल आनंद गिरि ,पूनम अरोड़ा ,पूजा पूनेठा ने अपनी पस्तुतियों से श्रोताओं को ठिठकने ,विचारमग्न्न होने के साथ वाह-वाह कहने को मजबूर किया। कवियित्री पूजा पूनेठा ने ‘बंजर जमीन का पौधा’, ‘अपनी सवालों की गठरियां’, ‘आवारा हवाएं’, खामोश पोधें जैसी कविताओं से लोगों मुग्ध किया. कवि निखिल आनंद गिरि ने ‘हँसना एक जरूरी हो तो ठीक’, ‘तीस की उम्र’ , ‘मेरी माँ बड़ी अबोध है’ से लोगों के दिलों को छुआ. कवि तजेंद्र सिंह लूथरा ने ‘अस्सी घाट का बांसुरीवाला’, ‘एक बूंद निश्चित’ आदि कवितायेँ सुनाई. कवियित्री पूनम अरोड़ा ने बटवारे की त्रासदी और बचपन पर खुबसूरत कविताँए प्रस्तुत की. कवि लीलाधर मंडोलई के सान्निध्य में कविता का यह मंच ओजपूर्ण कवियों-कवियित्रियों से रोशन रहा. कवि लीलाधर मंडोलई ने ‘मिथिला के लोग अब नही बिहाते अपनी बेटी अयोध्या में’ और ‘पत्थर की कोमलता हर कोइ नही जानता’ से इस सत्र का समापन किया ।

दैनिक जागरण सान्निध्य में एक सत्र कविताओं और दूसरा सत्र साहित्य की अलग-अलग विधाओं पर होता है और यह महीने के दुसरे शनिवार को आयोजित किया जाता है।

सान्निध्य के बारे में :-

अपनी भाषा हिंदी को समृद्ध और मजबूत करने के लिए दैनिक जागरण के मुहीम ‘हिंदी है हम’ के अंतर्गत सान्निध्य नाम का मासिक कार्यक्रम होता है .यह मासिक आयोजन हर महीने के दुसरे शनिवार को होता है .इसमें दो सत्र होते हैं जिसमे कला,साहित्य ,संस्कृति के अलावा सामजिक और अन्य मुदों पर विशेषज्ञों द्वारा मंथन किया जाता है.

संपर्क

संतोष कुमार 9990937676



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