आप यहाँ है :

देश के दुश्मनों के लिए एक चुनौती थे स्व. बिपिन रावत

भारत के पहले रक्षा प्रमुख या चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) थे; उन्होंने ने १ जनवरी २०२० को रक्षा प्रमुख के पद का भार ग्रहण किया। इससे पूर्व वो भारतीय थलसेना के प्रमुख थे। रावत ३१ दिसंबर २०१६ से ३१ दिसंबर २०१९ तक थल सेनाध्यक्ष के पद पर रहे।

स्वर्गीय बिपिन रावत से जुड़े बहुत सारे किस्से हैं, जिन्हें लोग याद कर रहे हैं. ऐसा ही एक किस्सा नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में सेलेक्शन का है, जिसके बारे में उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि कैसे एक माचिस की डिबिया की वजह से उनका चयन हुआ था.

मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले बिपिन रावत ने बचपन में ही भारतीय सेना में शामिल होने का सपना देखा था. बिपिन रावत से जुड़े बहुत सारे किस्से हैं, जिन्हें लोग याद कर रहे हैं. ऐसा ही एक किस्सा नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में चयन होने के समय का है, जिसके बारे में उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था.

बिपिन रावत ने अपने संस्मरणों में एक रोमांचक किस्सा बताया था, ‘यूपीएससी द्वारा आयोजित नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की लिखित परीक्षा को पास करने के बाद उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था. इसमें चयन के लिए मैं इलाहाबाद गया था, जहां 4 से 5 दिनों की सख्त ट्रेनिंग और टेस्टिंग के बाद फाइनल इंटरव्यू होना था.’ इंटरव्यू के लिए सभी प्रत्याशी कमरे के बाहर लाइन में खड़े थे और इस दौरान बिपिन रावत थोड़ा नर्वस हो गए थे, क्योंकि यही मौका था जो एनडीए में एंट्री दिला सकते थे या फिर बाहर कर सकते थे.

‘इंटरव्यू हॉल में ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी मौजूद थे. उन्होंने मेरी हॉबी पूछी. मैं उन्हें बताया कि मुझे ट्रैकिंग का बहुत शौक है. उन्होंने पूछा कि यदि आपको ट्रैकिंग पर जाना हो और वो ट्रैकिंग 4-5 दिन की हो तो आप एक सबसे अहम सामान का नाम बताएं जो आप अपने पास रखना चाहेंगे? इस पर मैंने कहा था कि ऐसी स्थिति में में अपने पास माचिस रखूंगा.’

इस पर अधिकारी ने पूछा कि माचिस ही क्यों? तो बिपिन रावत ने कहा कि माचिस से मैं बहुत सारे काम कर सकता हूं? बिपिन रावत ने उनसे कहा था, ‘जब आदिकाल में मनुष्य जंगलों में रहा करता था तो उसने सबसे पहले आग की खोज की थी, इसलिए मेरी नजर में मेरे लिए माचिस ही सबसे जरूरी है.’

बहुत कम लोग जानते हैं कि साल 2015 में भी जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) इसी तरह की एक दुर्घटना का शिकार हुए थे. उस समय वो नागालैंड में पोस्टेड थे और उनका हेलीकॉप्टर एक ऑपरेशन के दौरान क्रैश हो गया था. इस हेलीकॉप्टर का नाम चीता है और ये भी काफी आधुनिक माना जाता है. इस हादसे के बाद काफी लोगों को लगा था कि जनरल बिपिन रावत इसमें सुरक्षित नहीं बचेंगे, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ये खबर आई थी कि वो इस हादसे में बाल बाल बचे गए हैं.

पिछले दिनों सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने कहा कि पाकिस्तान भारत का नंबर वन दुश्मन नहीं बल्कि चीन है। भारत को आने वाले समय में दो मोर्चों पर दुश्मनों का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान भारत का नंबर वन दुश्मन नहीं बल्कि चीन है। बिपिन रावत ने एक कार्यक्रम में कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत का प्राथमिक फोकस डी एस्केलेशन से पहले विघटन है क्योंकि चीन हमारा नंबर एक दुश्मन है, न कि पाकिस्तान। रावत ने कहा कि भारत को आने वाले समय में दो मोर्चों पर दुश्मनों का सामना करना पड़ सकता है। विश्व शक्ति बनने की चीन की चाह ने दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। जनरल रावत ने कहा कि एक उभरती हुई विश्व शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए चीन दक्षिण एशिया और हिंद महासागर में अपनी व्यापक पैठ बना रहा है। म्यांमार और बांग्लादेश में चीन की घुसपैठ भारत के राष्ट्रीय हितों के लिए ठीक नहीं है, क्योंकि यह भारत को घेरने का प्रयास है। इससे दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए खतरा पैदा हो गया है।

सीडीएस जनरल बिप‍िन रावत ने साफ साफ कहा था कि गुलाम कश्मीर में हिंसा को सुविधाजनक बनाने के लिए चीन पाक को सैन्य उपकरण दे रहा है। पाकिस्तान को चीन का निरंतर समर्थन एक स्पष्ट भारत विरोधी रुख है। सीडीएस म्यांमार में चीन का बार-बार निवेश देश में भारत के प्रभाव को कम करने का एक प्रयास है, जो पूर्वोत्तर राज्यों के लिए खतरा है क्योंकि उनका देश के साथ मजबूत संबंध हैं। सीडीएस जनरल रावत ने कहा कि चीन, भारत, जापान, तुर्की और इंडोनेशिया 2030 तक दुनिया की शीर्ष दस अर्थव्यवस्थाओं की सूची में शामिल होंगे।

उन्होंने कहा था कि जब हम जम्मू-कश्मीर की बाते करते हैं, तब इसमें पीओके और गिलगिट बाल्टिस्तान भी शामिल हैं। सेना प्रमुख ने बिना पाक का नाम लिए कहा कि पीओके इसलिए अवैध कब्जे वाला क्षेत्र है, जिसे हमारे पड़ोसियों ने अवैध तरीके से कब्जा लिया है। बिपिन रावत ने कहा था कि पाकिस्तान ने जिस इलाके पर अवैध कब्जा जमा रखा है, उसे पाकिस्तान नहीं, आतंकवादी नियंत्रित करते हैं। पीओके आतंकियों के द्वारा नियंत्रित देश है। पाकिस्तान आगे भी जम्मू-कश्मीर में ‘छद्म युद्ध’ जारी रखेगा। यही नहीं वह पंजाब समेत देश के बाकी हिस्सों में भी समस्‍याएं पैदा करेगा। इसके लिए वह कोशिशें कर रहा है।

पिछले जून महीने में पाकिस्तानी सैनिक कई बार सीजफायर का उल्लंघन कर चुके थे, जिसके बाद सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने कहा कि अगर पाकिस्तान शांति चाहता है तो युद्धविराम लंबे समय तक चलने वाला है। यह दोनों देशों के लिए अच्छा होगा। सीडीएस ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से युद्धविराम का बड़े पैमाने पर उल्लंघन हुआ है, जहां न केवल छोटे हथियार थे बल्कि उच्च क्षमता वाले हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। सीजफायर उल्लंघन ने पाकिस्तानी सेना के रक्षात्मक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। उनके काफी संख्‍या में सैनिक हताहत हुए हैं।

रायसीना डायलॉग 2020 को संबोधित करते हुए सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने पाक को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा था कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को आतंक निरोधक संस्था एएफटीएफ की काली सूची में डालने और कूटनीतिक रूप से अलग- थलग करने की जरूरत है। जनरल रावत ने कहा था कि कश्‍मीर घाटी में 10 और 12 साल के लड़के-लड़कियों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है, जो चिंता का विषय है।

अफगानिस्‍तान पर ताल‍िबान के कब्‍जे के बाद सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि भारत को पहले से इस बात का अंदेशा‌ था कि अफगानिस्तान में तालिबान का राज आने वाला था। उसके लिए भारत ने अलग से प्‍लान पहले से ही तैयार कर रखा था। सीडीएस ने कहा कि अफगानिस्तान की परिस्थितियों को लेकर भारत तैयार है। अगर वहां की परिस्थितियों का भारत पर असर पड़ता है तो उसके लिए भी भारत तैयार है। उसका मुकाबला वैसे ही किया जाएगा, जैसे आतंकवाद का किया जाता रहा है। अफगानिस्‍तान में जो कुछ हुआ है, उसकी तेजी को देखते हुए हैरानी जरूर हुआ। ऐसा इसलिए क्‍योंकि भारत ने सोचा था कि इसमें दो माह का समय लग सकता है। लेकिन ये सब कुछ हमारी सोच से पहले ही हो गया।

सीडीएस बिपिन रावत की पत्नी मधुलिका रावत ने अपने पति का साथ जीवन के हर मोड़ पर दिया। वहीं मृत्यु के समय भी वो उनके साथ रहीं। मधुलिका मध्य प्रदेश के शहडोल के सोहागपुर में पैदा हुईं थी। रीवा घराने से संबंध रखने वाले उनके पिता कुंवर मृगेंद्र सिंह दो बार विधायक भी रहे थे। शहडोल में अब भी उनका महलनुमा घर स्थित है।
शादी के बाद रहे पत्नी से दूर: बिपिन रावत और मधुलिका की शादी साल 1986 में हुई थी। बिपिन रावत उस दौरान सेना में कैप्टन के पद पर थे। शादी के दौरान बिपिन रावत की पोस्टिंग सीमा पर थी। ऐसे में अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए उन्होंने अपने सैनिक मन के चलते परिवार से दूरी बनाए रखी। उनका मानना था कि परिवार को साथ रखने से वे अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभा पाएंगे। ऐसे में बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी उन्होंने मधुलिका पर छोड़ दी और खुद देश सेवा में लगे रहे।

बिपिन रावत और मधुलिका की शादी साल 1986 में हुई थी। बिपिन रावत उस दौरान सेना में कैप्टन के पद पर थे। शादी के दौरान बिपिन रावत की पोस्टिंग सीमा पर थी। ऐसे में अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए उन्होंने अपने सैनिक मन के चलते परिवार से दूरी बनाए रखी। उनका मानना था कि परिवार को साथ रखने से वे अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभा पाएंगे। ऐसे में बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी उन्होंने मधुलिका पर छोड़ दी और खुद देश सेवा में लगे रहे।

जनरल रावत और मधुलिका की दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी का नाम कृतिका रावत है। उनकी शादी मुंबई में हुई है। वहीं छोटी बेटी का नाम तारिणी है और वो अभी पढ़ाई कर रही हैं। वे दिल्ली में अपने माता-पिता के साथ ही रहती थीं।

मधुलिका आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्षा थीं। उन्होंने सैनिकों की विधवाओं के अच्छा जीवन देने के लिए खूब काम किया। उन्होंने महिलाओं को टेलरिंग, ब्यूटीशियन, चॉकलेट बनाने जैसे कामों की ट्रेनिंग के लिए प्रोत्साहित किया।

जनरल बिपिन रावत जवाबी कार्रवाई के एक्सपर्ट थे। सैम मानेक शॉ के बाद वह दूसरे ऐसे जनरल थे जो युद्ध रणनीति में माहिर थे और स्वयं युद्ध क्षेत्रों में पहुंचते थे। उनके रणनीतिक कौशल के चलते चीन और पाकिस्तान की सेनाएं भी उनसे घबराती थीं। सीमा पर चल रहीं गतिविधियों को रोकने के लिए उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक भी कराई। मेजर जनरल रहने के दौरान यूएनओ में शांति सेना का भी उन्होंने नेतृत्व किया था। उनका युद्ध करने का जो तरीका था, वह अपने आप में अनूठा था। वे दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध का विशेष अनुभव रखते थे।

स्वर्गीय रावत का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में राजपूत परिवार मे हुआ ।( ये रावत है ,जो गढ़वाल के उत्तराखंड के राजपूत की शाखा है। जनरल रावत की माताजी परमार वंश से है। इनके पुर्वज मायापुर/हरिद्दार से आकर गढवाल के परसई गांव मे बसने के कारण परसारा रावत कहलाये । रावत एक मिल्ट्री टाईटल है जो विभिन्न राजपूत शासको को दिए गये थे ।[8] इनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह जी रावत, जो सेना से लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए। रावत ने ग्यारहवीं गोरखा राइफल की पांचवी बटालियन से 1978 में अपने करियर की शुरुआत की थी।[9] रावत ने देहरादून में कैंबरीन हॉल स्कूल, शिमला में सेंट एडवर्ड स्कूल और भारतीय सैन्य अकादमी , देहरादून से शिक्षा ली , जहां उन्हें ‘सोर्ड ऑफ़ ऑनर ‘ दिया गया। वह फोर्ट लीवनवर्थ , यूएसए में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज , वेलिंगटन और हायर कमांड कोर्स के स्नातक भी हैं। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से डिफेंस स्टडीज में एमफिल , प्रबंधन में डिप्लोमा और कम्प्यूटर स्टडीज में भी डिप्लोमा किया है। 2011 में, उन्हें सैन्य-मीडिया सामरिक अध्ययनों पर अनुसंधान के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय , मेरठ द्वारा डॉक्टरेट ऑफ़ फिलॉसफी से सम्मानित किया गया।

शैक्षणिक योग्यता
आई एम ए देहरादून में इन्हें ‘सोर्ड ऑफ़ ऑनर’ से सम्मानित किया गया था।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से रक्षा एवं प्रबन्ध अध्ययन में एम फिल की डिग्री।
मद्रास विश्वविद्यालय से स्ट्रैटेजिक और डिफेंस स्टडीज में भी एम फिल।
2011 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से सैन्य मीडिया अध्ययन में पीएचडी।

सेना का सफर
जनवरी 1979 में सेना में मिजोरम में प्रथम नियुक्ति पाई।
नेफा इलाके में तैनाती के दौरान उन्होंने बटालियन की अगुवाई की।
कांगो में संयुक्त राष्ट्र की पीसकीपिंग फोर्स की भी अगुवाई की।
01 सितंबर 2016 को सेना के उप-प्रमुख का पद संभाला।
31 दिसंबर 2016 को सेना प्रमुख का पद।

image_pdfimage_print


1 टिप्पणी
 

  • Savita Aggarwal

    दिसंबर 9, 2021 - 6:24 pm

    जनरल रावत को भावभीनी श्रद्धांजली।

Comments are closed.

सम्बंधित लेख
 

Back to Top