आप यहाँ है :

वरिष्ठ संपादक श्री गिरीश उपाध्याय को देवर्षि नारद सम्मान-२०१८ से सम्मानित

भोपाल। पत्रकारिता के लक्ष्य को स्पष्ट करते हुए महात्मा गाँधीजी ने अपने समाचार पत्र में लिखा था कि पत्रकारिता का लक्ष्य सेवा होना चाहिए। पत्रकारिता समाज को दिशा देने वाली और सृजन करने वाली शक्ति है। महात्मा गाँधी, महर्षि अरविन्द और डॉ. भीमराव आम्बेडकर ने पत्रकारिता के जिन मूल्यों को स्थापित किया है, आज की पत्रकारिता को उन मूल्यों को लेकर आगे चलना चाहिए। यह विचार प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक एवं केसरी समाचार पत्र के पूर्व संपादक श्री जे. नन्दकुमार ने देवर्षि नारद जयंती प्रसंग पर विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित पत्रकार सम्मान समारोह में व्यक्त किये। इस अवसर पर पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ संपादक श्री गिरीश उपाध्याय को ‘देवर्षि नारद सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही पत्रकार चंद्रेश मालवीय, अतुल तिवारी और राहुल दुबे के सरोकारी समाचारों को ‘देवर्षि नारद पुरस्कार’ दिया गया।

‘सामाजिक एवं राष्ट्रीय सरोकार और मीडिया’विषय पर श्री जे. नन्दकुमार ने कहा कि आज मीडिया में बहुत कड़ी प्रतिस्पर्द्धा है। समाचार सबसे पहले दिखने का दबाव है। इस कारण कई बार भ्रामक या झूठे समाचार जारी हो जाते हैं। यह झूठे समाचार समाज को बहुत हानि पहुंचाते हैं। आवश्यकता है कि हम समाचारों को अच्छे से जांच कर ही जारी करें। समाचार बनाते समय अच्छे से शोध की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज प्रो-एक्टिव जर्नलिज्म की आवश्यकता है। प्रत्येक पत्रकार को कुछ भी लिखने से पहले यह सोचना चाहिए कि उसके लिखे गए शब्दों का भविष्य में समाज पर क्या असर पड़ेगा? यदि इतना भी विचार कर हम अपनी कलम चलायेंगे तो वह समाजहित में होगा। देवर्षि नारद के चरित्र को समझाते हुए श्री नन्दकुमार ने कहा कि नारद जी के विचारों को पुन:प्रतिष्ठित करने की आवश्यकता है। देवर्षि नारद पत्रकारों के लिए अनुकरणीय हैं। वह परमात्मा के विषय में लोगों को ज्ञान देते थे। लोग उन्हें आदि पत्रकार माने न माने परन्तु उन्होंने अपने आचार-विचार से पत्रकारिता के आदर्श मूल्यों की स्थापना की है। हम गहराई से देखेंगे तो पाएंगे कि उनका प्रत्येक संवाद लोकहित में रहता है।

उन्होंने महाभारत काल का उल्लेख करते हुए कहा कि वेद व्यास जी ने नारदजी के संदर्भ में कहा है कि वह एक शब्द के अनेक अर्थ जानते थे। साथ ही अनेक शब्दों के लिए एक शब्द के प्रयोग करने में भी नारद जी निपुण थे। वह सामाजिक सरोकार और समाज को संस्कारवान बनाने के लिए सूचना को सही और सार्थक शब्दों में व्यक्त करते थे। उनकी इस कार्य से आज के पत्रकारों को प्रेरणा लेनी चाहिए।

श्री नंदकुमार ने कहा कि हमारी प्राचीन संस्कृति पर किसी को शक नहीं था पर आज स्थिति बदल गयी है। आज लोग शक की दृष्टि से देखने लगे हैं। आज सूचना और समाचार के नाम पर भ्रांतिया फैला रहे हैं। टीआरपी और सबसे आगे रहने की होड़ में लोग खबरों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने लगे हैं। आज की पत्रकारिता में जानबूझ कर जाति और धर्म विशेष शब्द का प्रयोग किया जा रहा है। हमें इस तरह की पत्रकारिता से बचने की आवश्यकता है।

श्री नन्दकुमार ने कहा कि हम कालीदास को इंडियन शेक्सपीयर कहकर उनका अपमान कर रहे हैं। कालीदास और शेक्सपीयर में कोई तुलना नहीं की जा सकती है। कालीदास शेक्सपीयर से सालों वर्ष पूर्व हुए। भारत और भारतीय संस्कृति को संवारने में उनका अनुकरणीय योगदान रहा है। इसी तरह लोग चंद्रगुप्त को भारतीय नेपोलियन कह कर उसका महत्व कम करते हैं।

इस मौके पर मुख्य अतिथि और वरिष्ठ पत्रकार श्री महेश श्रीवास्तव ने कहा कि देवर्षि नारद पत्रकारिता के कुल देवता हैं। उन्होंने कोई आडंबर नहीं किया बल्कि सत्य की रक्षा के लिए सूचना प्रेषित करने का कार्य किया। वह सत्य की विजय के उदेश्य को लेकर कार्य करते थे। उन्होंने समग्र जगत को दृष्टि प्रदान किया। हमें भी राष्ट्रहित में एकात्म भाव से पत्रकारिता करने की आवश्यकता है।

गिरीश उपाध्याय को मिला नारद पत्रकारिता सम्मान :

‘देवर्षि नारद सम्मान’ से सम्मानित श्री गिरीश उपाध्याय ने कहा कि पत्रकारिता का धर्म होता है कि वह समाज के संबंध में लिखे, समाज के लिए लिखे। आज मीडिया कहीं न कहीं समाज में अपना सम्मान खोता जा रहा है। कई लोग विचारों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। पत्रकारिता में सहमति के साथ समान रूप से असहमति का भी स्थान होना चाहिए। उन्होंने नारद जी के विषय में अपनी बात रखते हुए कहा कि वह असुर और देवता दोनों ही पक्ष में समान रूप से स्वीकार्य थे। समारोह की अध्यक्षता कर रहे विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष लक्ष्मेन्द्र माहेश्वरी ने आभार प्रदर्शन किया और संचालन सचिव श्री दिनेश जैन ने किया। प्रारंभ में विश्व संवाद के केंद्र के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अजय नारंग ने विश्व संवाद केंद्र की प्रस्तावना रखी। दिव्यांग बच्ची फाल्गुनी पुरोहित ने ‘जिस दिन सारा राष्ट्र जगेगा’ गीत प्रस्तुत कर सबका दिल जीत लिया। फाल्गुनी को बाल आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा ने सम्मानित किया।

दिनेश जैन

सचिव, विश्व संवाद केंद्र, भोपाल

डी- 100 /45, शिवाजी नगर, भोपाल दूरभाष /फैक्स :
0755-2763768*
संपर्क :-सुरेन्द्र ठाकरे- 9827555014



Leave a Reply
 

Your email address will not be published. Required fields are marked (*)

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

सम्बंधित लेख
 

Back to Top