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वरिष्ठ पत्रकार नंदकिशोर त्रिखा का निधन

नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्‍ट्स (इंडिया) के पूर्व राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और नवभारत टाइम्‍स के पूर्व स्थानीय संपादक डॉ. नंदकिशोर त्रिखा का सोमवार को नई दिल्‍ली स्‍थित एम्‍स में निधन हो गया। वे 80 की उम्र पार कर चुके थे। उनका अंतिम संस्कार आज देर शाम लोधी रोड स्थित निगम बोध घाट पर किया जाएगा।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में भी उन्होंने लंबे समय तक अध्यापन किया और पत्रकारों की एक पूरी पीढ़ी तैयार की। डॉक्टर त्रिखा नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्‍ट्स (NUJI) के दो बार प्रेसिडेंट और इसके महासचिव रह चुके हैं। वे प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व सदस्य थे। इसके अतिरिक्त वे पत्रकार व गैर पत्रकार समाचारपत्र कर्मियों के लिए बने वेतन आयोग के भी सदस्य रह चुके थे।

उनके निधन से पत्रकार आंदोलन को अपूरणीय क्षति हुई है। डॉ. नंदकिशोर त्रिखा ने बी.एस.सी., एम.ए., जे.डी. (यू.के.) और पी.एच.डी. की उपाधि हासिल की है। बत्तीस वर्षों से अधिक समय तक पत्रकारिता में सक्रिय रहने के बाद वे माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से जुड़ गए थे और इसके पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष और वरिष्ठ प्राध्यापक रह चुके थे।

उन्होंने 1963 से देश के अग्रणी राष्ट्रीय दैनिक ‘नवभारत टाइम्स’ में विशेष संवाददाता, वरिष्ठ सहायक-संपादक, राजनयिक प्रतिनिधि और स्थानीय संपादक समेत कई वरिष्ठ पदों पर काम किया। वे नवभारतटाइम्स समाचार पत्र के लखनऊ संस्करण के संपादक भी रह चुके थे। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सम्मान अर्जित किए थे। देश के प्रख्यात पत्रकारों में उनका नाम शुमार था।

इससे पहले वे संवाद समिति हिन्दुस्थान समाचार के काठमांडू (नेपाल), उड़ीसा और दिल्ली में ब्यूरो प्रमुख और संपादक रहे। अपने इस लंबे पत्रकारिता जीवन में उन्होंने देश-विदेश की ज्वलंत समस्याओं पर हजारों लेख, टिप्पणिया, सम्पादकीय, स्तम्भ और रिपोर्ताज लिखे। पत्रकारिता की कोई विधा नहीं जो उनकी कलम से अछूती रही हो।

देश के अनेक विश्वविद्यालयों के पत्रकारिता विभागों में अतिथि अध्यापक के रूप में शिक्षण देने का खासा अनुभव रखने वाले डॉ. त्रिखा ने लंदन टीएमस के थामसन फाउंडेशन की फेलोशिप पर उच्च पत्रकारिता में डिप्लोमा प्राप्त किया। संविधान एवं संसदीय प्रक्रियाओं के विषय में उनका विशेष अध्ययन था। डॉ. त्रिखा ने पत्रकारीय कार्य के सिलसिले में सम्पूर्ण भारत और अन्य कई देशों का व्यापक भ्रमण कर चुके थे। देश के विभिन्न साहित्यिक व पत्रकारिता पुरस्कारों से भी वे सम्मानित किए जा चुके थे।



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