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शंकर, अहसान, लॉय और फरहान ने जीता लोगों का दिल

२५ अगस्त पैसाडेना कन्वेंशन सेण्टर ,पैसाडेना, अमेरिका में शंकरा आई फाउण्डेशन के तत्वाधान में शंकर, एहसान, लॉय और फ़रहान अख्तर का एक दिलजीत शो हुआ। शो में क्या क्या हुआ कैसे हुआ यह बताने से पहले आईये आपको शंकरा आई फाउण्डेशन के बारे में बताती चलूँ। इस संस्था की स्थापना श्री मुरली कृष्णमूर्ती, श्री के श्रीधरन और अहमद खुशनूद काज़ी जो कि लाहौर पाकिस्तान से थे,के द्वारा सन १९९८ में ,उनके पहले दानी श्री हरीहर मूर्थी की सहायता से सैन होज़े में की गयी थी। यह संस्था अभी तक करीब १,७७०,८१८ गरीब लोगों के मुफ्त में आँखों के ऑपरेशन,कर चुकी है। अमेरिका की संस्था चैरिटी नेविगेशन ने शंकरा आई फाउण्डेशन को लगातार ६ बार सबसे अच्छी संस्था का ख़िताब दिया है।

आइये अब चलती हूँ इस शानदार कार्यक्रम की तरफ, कर्यक्रम का प्रारम्भ शैनन डोनाल्ड के सुन्दर गीत और श्रीनिधि घटाटे की मधुर आवाज से हुआ। इन दोनों गायिकाओं ने लोगों की खूब तालियां बटोरीं। इसके बाद मच पर शंकरा आई फाउंडेशन के संस्थापक और एक्ज़ीक्यूटिव डॉटरेक्टर श्री मुरली कृष्णमूर्ति जी मंच पर आये। आते ही उन्होंने कहा कि फरहान ने कहा है की ४ मिनट से ज्यादा नहीं लेना। उन्होंने आगे कि इस समय भारत में १२ अस्पताल चल रहे हैं। आप सभी के सहयोग से यह काम हो सका है। मुम्बई में झुनझुनवाला जी ने ज़मीन दी है और कहा है कि जब तक अस्पताल खुद को फण्ड करने लायक नहीं हो जाता वोह इसकी सहायता करेंगे। आप आँखें बंद कर के दान करिये हम आँखें खोल देंगे। मुरली जी ने बहुत सुन्दर गीत ‘ज्योति से ज्योति जलाते चलो प्रेम की गंगा बहते चलो’ गा कर अपनी बात समाप्त की।

मुरली जी के बाद खुसरो पटेल मंच पर आये। उन्होंने कहा कि एरीज़ोना सेनेटर जॉन मक्कैन का देहान्त हो गया है। उनकी आत्मा की शांति के लिए २ मिनट का मौन रखेंगे। इसके बाद उन्होंने हरदिल अज़ीज़ फरहान अख्तर को आमंत्रित किया। फरहान जी के मंच पर आने से पहले उनकी फिल्मों के कुछ अंश बड़े परदे पर दिखाए गए साथ ही ‘दिलो में तुम बेताबियाँ ले कर चल रहे हो तो तुम ज़िंदा हो’ कविता फरहान की आवाज में सुनाई दी ,उसके बाद फरहान ‘सुन लो’ गाते हुए मंच पर आये। गीत के बाद उन्होंने इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए शंकरा आई फाउंडेशन को धन्यवाद दिया।

दर्शकों से बात करते हुए उन्होंने बताया कि मम्मी-पापा पूछते थे कि तुम क्या करोगे,तुम कुछ करोगे भी या नहीं। तो इसके बाद मैने लक्ष्य फिल्म बनाई। फरहान ने इसी फिल्म का गाना गाया ‘मै ऐसा क्यों हूँ ‘l लोग उत्साहित हो कर मंच के पास आ गये। फरहान ने एक रोमांटिक गाना ‘सोचा है, ‘जब दर्द का बादल’ गाया। इसके बाद उन्होंने जावेद अख्तर द्वारा लिखी कविता। ‘दिल आखिर क्यों रोता है ‘अपने मोहक अंदाज में सुनाई। श्रोताओं को शामिल कर के उन्होंने ‘मेरी लॉन्ड्री का एक बिल ‘गाया लोगों ने फरहान का भरपूर साथ दिया। इसके बाद ‘अब जो भी हो सो हो ,”एक कबूतर दो कबूतर ‘,’हर दिल की अपनी ‘,सेनोरिटा इत्यादि गाने गाये। हर गाने पर दर्शकों का उत्साह देखते ही बनता था। इसके बाद लोगों के अनुरोध पर ‘ज़िंदा है तो ‘और हवन करेंगे गाया। लोग अपने अपने स्थान पर ही खड़े हो कर नृत्य करने लगे। क्योंकि आगे मंच के पास आने पर पाबन्दी लगा दी गयी थी। सभी दर्शक अपने पसंदीदा कलाकार को पास से देखना चाहते थे। फरहान ने मंच को मानो ऊर्जा से सराबोर कर दिया। गाने के साथ स्वयं भी नृत्य कर रहे थे। उनकी प्रस्तुति ने लोगों का दिल जीत लिया।

फरहान ने कहा यह तीन बहुत बड़े कलाकार, संगीतकार और मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं कृपया जोरदार तालियों से स्वागत कीजिये शंकर ,अहसान ,और लॉय का। इसके बाद बाद वक्रतुण्ड महाकाय गाते हुए शंकर महादेवन,अहसान नूरानी और लॉय मेंडोन्सा मंच पर आये शंकर जी की आवाज बहुत ही जादुई थी, ऐसा लग रहा था की मानो उनकी आवाज आत्मा में उतर गयी हो। कल हो न हो गाने की मधुर धुन बजते ही लोग ख़ुशी से झूम उठे। इसके बाद शंकर जी ने बताया कि हम तीनो को यानी शंकर अहसान लॉय को एक साथ गानो का संगीत देते हुए २२ साल हो गए हैं। यह गाना वह उन सभी को समर्पित करना चाहते हैं जिन्होंने हमारी संगीत की इस यात्रा को सफल बनाया है।

उन्होंने आगे कहा कि ब्रेथलस का निर्देशन फरहान और ज़ोया अख्तर ने ही किया था। इसके बाद शंकर जी ने फिल्म ‘माई नेम इस खान ‘का तेरे नैना’, फिल्म ‘२ इस्टेट ‘का ‘मस्त मगन ‘ तथा फिल्म ‘कार्तिक कालिंग कार्तिक ‘का ‘उफ़ तेरी अदा’ गाया। शंकर जी ने अपने साथ आये सभी वाद्य कलाकारों का परिचय कराया, उसके बाद शंकर जी का साथ देने श्रीनिधि पुनः मंच पर आयीं। फिर इन दोनों ने मिल कर ‘२ इस्टेट का ‘लोचाय उल्फत हो गया ‘गाया और साथ में सभी को इस गाने का मुख्य स्टेप कर के दिखाया तथा सभी से उसको करने का आग्रह भी किया इसके बाद फिल्म ‘दिल चाहता है’ का ‘वो लड़की है कहाँ ‘गाया जिसको सभी ने बहुत पसंद किया। शंकर जी ने बताया कि लोचाय उल्फत शब्द इन तीनो यानी शंकर स्वयं ,अहसान और लॉय ने मिल कर बनाया था। झूम बराबर झूम ,इट्स दा टाइम टू डिस्को , कल हो न हो गाया। लोगों के अनुरोध पर शंकर जी ने अपना प्रसिद्ध गीत ब्रेथलेस गाया।

शंकर जी ने फरहान को पुनः मंच पर आमंत्रित किया। साथ में उन्होंने ‘रॉक ऑन ‘गाया। इस शो के नेशनल प्रमोटर श्री बालाजी एंटरटेनमेंट से श्री दर्शन मेहता का धन्यावद करते हुए उनको मंच पर आमंत्रित किया। शंकर दर्शकों से पूछा कि आप क्या सुनना चाहेंगे ‘दिल चाहता है या फिर गल्लां गोदियाँ। लोगों ने गल्लां गोदियाँ पर ज्यादा शोर मचाया तो बस शंकर जी ने उसी को अपना ग्रैंड फिनाले गीत बना दिया। यह बहुत ही धमाके दार गीत रहा इस समय मंच पर सभी कलाकार उपस्थित थे। सभी साथ में नृत्य कर रहे थे। बहुत ही मोहक समां था। दर्शक अपने आपको रोक नहीं पाए और मच के पास चले आये इस बार तुमको रोका भी नहीं गया।

शो के बाद लोगों ने हिन्दी मीडिया से बात करते हुए कहा कि शो बहुत से उत्साह से भरा था और उन्हें बहुत पसन्द आया। लोगों ने ऐसा शानदार शो करवाने के लिए शंकरा आई फाउंडेशन की टीम को धन्यवाद कहा।
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फोटो सौजन्य : अविनाश श्रीवास्तव

रचना श्रीवास्तव अमरीका में रहती हैं और वहाँ भारतीयों से जुड़े कार्यक्रमों, आयोजनों व समारोहों के बारे में नियमित रूप से लिखती हैं।

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