ताजा सामाचार

आप यहाँ है :

शरीफ परिवार की जायदाद है 4 हजार करोड़ की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के आवास पहुंचने पर कहा, ‘अब तो यहां आना-जाना लगा रहेगा।’ शरीफ ने जवाब दिया, ‘आपका घर है।’ लिहाजा हम भारतीयों के लिए यह जानना लाजिमी हो जाता है कि जिनके घर आना-जाना लगा रहेगा, वह कैसा परिवार है और उसके हित कहां-कहां जुड़े हैं? बिज़नेस स्टैंडर्ड ने शरीफ परिवार और उसके कारोबारी हितों से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य जुटाए। इसका काफी श्रेय पाकिस्तानी वेबसाइट http://fiverupees.com/ को जाता है।

वर्ष 1998 में नवाज शरीफ और उनके पूरे कुटुंब के कारोबारी हितों पर आधारित एक किताब आई। ‘हू ओन्स पाकिस्तान’ नाम की इस किताब को वरिष्ठï पाकिस्तानी पत्रकार शाहिद-उर-रहमान ने लिखा था। रहमान ने तकरीबन तीन दशकों तक पाकिस्तान के वित्तीय और आर्थिक मोर्चे पर पैनी नजर बनाए रखी। नवाज शरीफ पहले 1990 के दशक में प्रधानमंत्री बने और यही वह दौर था, जब पाकिस्तान में निजीकरण की बयार बह रही थी और आर्थिक उदारीकरण की राह में तमाम नीतियां बदली जा रही थीं? रहमान का दावा है कि अधिकांश कदम विभिन्न औद्योगिक घरानों को मजबूत करने के लिए ही उठाए गए थे, जिनमें शरीफ घराना भी शामिल था। पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) सरकार ने 115 इकाइयों को निजीकरण के लिए चिह्नित किया, जिनमें से 67 का वर्ष 1997 तक निजीकरण हुआ।

रहमान कहते हैं कि नवाज शरीफ परिवार से संबंधित इत्तिफाक समूह को इन कदमों का सबसे ज्यादा फायदा हुआ। ढलवा लोहे के कारोबार से जुड़ी अपेक्षाकृत छोटी फर्म के रूप में मियां मोहम्मद शरीफ ने अपने छह भाइयों के साथ मिलकर 1939 में इत्तिफाक फाउंड्री की बुनियाद रखी थी। कश्मीरी विस्थापितों का यह परिवार 19वीं शताब्दी के अंत में पंजाब आकर बस गया था। विभाजन के समय अमृतसर से आकर परिवार लाहौर में बस गया, जहां शरीफ ने लोहे का कारोबार शुरू किया, वक्त के साथ कारोबार लगातार रफ्तार पकड़ता रहा।

वर्ष 1972 में जुल्फिकार अली भुट्टïो की सरकार ने शरीफ परिवार सहित तमाम निजी क्षेत्र के कारोबारों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। तब उन्होंने अपना कारोबार पश्चिम एशिया में केंद्रित कर लिया लेकिन जहां इत्तिफाक समूह कुछ डांवाडोल हो गया (रहमान के अनुसार 1998 में इत्तिफाक समूह के 119 वंशज उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारे को लेकर अदालती लड़ाई में भिड़े रहे। मियां मोहम्मद शरीफ का वर्ष 2000 में इंतकाल हो गया) वहीं नवाज शरीफ और उनके भाई शाहबाज शरीफ बड़ी खामोशी से अपना कारोबारी साम्राज्य खड़ा करते रहे। इस्पात कारोबार बरकरार रहा लेकिन परिवार ने विदेशों में (ब्रिटेन, सऊदी अरब, दुबई और स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान) और कृषि संबंधी पोल्ट्री फीड और अन्य परिसंपत्तियों को बढ़ाया।

http://fiverupees.com/ ने किताब के दावों को विभिन्न स्रोतों से परखने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि इत्तिफाक समूह की सारी परिसंपत्ति शरीफ परिवार के पास जाने की बात सही नहीं है। उन्होंने नवाज शरीफ और शाहबाज शरीफ के परिवार की आमदनी और संपत्तियों को भली भांति परखा, जिसका ब्योरा शरीफ परिवार ने 2013 में पाकिस्तान के एक कानून के बाद दिया था, जिसमें चुनाव लडऩे के लिए ऐसा ब्योरा देना अनिवार्य बना दिया गया था।

शरीफ परिवार की वेबसाइट के अनुसार उनके पास 30 करोड़ डॉलर की संपत्ति और 10 करोड़ डॉलर की जमीन-जायदाद है। मियां मोहम्मद शरीफ की पत्नी शमीम अख्तर (नवाज शरीफ की अम्मी, हमारे प्रधानमंत्री ने जिनके चरण स्पर्श किए) उस जटी उमरा एस्टेट की मालिक हैं, जहां मोदी गए थे। नवाज के दो बेटे हसन और हुसैन एवं दो बेटियां मरियम और अस्मा हैं। शाहबाज की दो पत्नियां और दो बेटे (हमजा और सलमान) हैं। हमजा की भी दो पत्नियां हैं। शाहबाज की बेटी हैं राबिया इमरान। अब्बास शरीफ के भी दो बेटे और दो बेटियां हैं। परिवार में तीसरी-चौथी पीढ़ी मिलाकर कुल जमा 40 शरीक (अंशभागी) हैं।

शरीफ परिवार की सऊदी अरब में भी संपत्तियां हैं, जो नवाज शरीफ के निर्वासन के दौरान विकसित हुईं। इनमें एक इस्पात मिल भी शामिल है, जिसकी 700 करोड़ पाकिस्तानी रुपये की हैसियत है। संयुक्त अरब अमीरात में मिलें और ऐसी संपत्तियां बेच दी गई हैं। रमजान एनर्जी कराची स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्घ है। गुलशन कार्पेट्स कथित तौर पर नवाज शरीफ की बेटी मरियम की कंपनी थी लेकिन जांच करने पर मालूम पड़ा कि यह किसी और के नाम पर (जो कमोबेश ऐसा ही है) सूचीबद्घ है। वित्त वर्ष 2013 के दौरान हुसैन नवाज से 19.7 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का नकदी हस्तांतरण और बैंक धनप्रेषण भी हुआ।

हमजा शरीफ की 2011 की परिसंपत्ति घोषणा के अनुसार उनके पिता और पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ के नाम पर 5.18 लाख पाकिस्तानी रुपयों का असुरक्षित कर्ज है। पंजाब के पोल्ट्री किंग के नाम से मशहूर हमजा के पास 21.10 करोड़ पाकिस्तानी रुपयों की संपत्ति है। परिवार शरीफ ट्रस्ट नाम से एक धर्मादा संस्था भी चलाता है, जो इंजीनियरिंग, मेडिकल और डेंटल कॉलेज के साथ ही शरीफ स्कूल ऑफ एप्लाइड हेल्थ साइंसेज भी संचालित करता है। कुल मिलाकर संपत्तियों की सूची काफी बड़ी है। हालांकि बिज़नेस स्टैंडर्ड स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं कर सका।
http://fiverupees.com/ के अनुसार शरीफ परिवार 4,000 करोड़ पाकिस्तानी रुपयों के कारोबारी साम्राज्य का मालिक है। खुद नवाज शरीफ के पास 500 से 1000 करोड़ पाकिस्तानी रुपयों की मिल्कियत है। इसमें से अधिकांश अचल संपत्ति है। उनके और उनकी पत्नी के पाकिस्तानी बैंकों में 14 करोड़ पाकिस्तानी रुपये जमा हैं। इसलिए जरा संभल कर कदम बढ़ाइए! यह ऐसा घर है, जिसके साथ आप आगे बढ़ रहे हैं!

साभार-http://hindi.business-standard.com/ से

image_pdfimage_print


Get in Touch

Back to Top