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उज्जैन में आँधी तूफान के साथ ममता का सैलाब भी आया

आसमानी बारिश शाम को थमी और उज्जैनवासियों ने इंसानियत, संवेदना और भाईचारे की बूंदें बरसा दीं। जाति- धर्म से परे उठकर इंसानी रिश्तों की डोर मदद कर मजबूत कर दी।

गुरुवार को आई आंधी और बारिश से मेला क्षेत्र में मुसीबत में फंसे श्रद्धालुओं की मदद के लिए सैकड़ों हाथ उठे। मानो पूरा उज्जैन ही मेला क्षेत्र में डेरा डाले संतों और श्रद्धालुओं की मदद को दौड़ पड़ा। कोई दवा का इंतजाम कर रहा था तो कोई भोजन का। किसी ने परेशान लोगों को आसरा दिया तो किसी ने अपने प्रियजनों से बिछुड़े लोगों को सही जगह पहुंचने में मदद की ।

नाका क्षेत्र में रफीक खान ने राम सिंह के परिवार को अपने यहां पनाह दी तो ठेले पर भजिए कचोरी बेचने वाली सुमित्रा ने नफे-नुकसान के गणित में उलझे बगैर मुफ्त में ठेला लुटा दिया।

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मुस्लिम परिवार ने दी पनाह

आगर नाका क्षेत्र में रहने वाले मोहम्मद रफीक गैरेज चलाते हैं। बारिश के बाद पंडाल पानी से भर गए और लोग सड़क पर भीगते नजर आए तो रफीक भाई ने इंसानियत का रिश्ता निभाया। बागोरी गांव के राम सिंह और उनके परिवार को अपने घर में पनाह दी।

उन्हें भर पेट भोजन कराया। छोटे बच्चों के लिए बिस्किट और दूध की व्यवस्था की। कमरे में सीलिंग फेन नहीं था तो दो टेबल फेन ले आए, ताकि घर रुका मेहमान इत्मिनान से रात गुजार सके।

सड़क पर ही करवाया भंडारा

खाक चौक चौराहा के पास रामकृष्ण नगर के संतों ने मुसीबत की परवाह नहीं की। पंडाल तहस-नहस हो गया तो सड़क पर ही श्रद्धालुओं को भोजन करवाया। पास ही में संत डॉ. कृष्णानंद के कैम्प में 1000 लोगों के आवास और भोजन का बंदोबस्त किया गया।

घर से ले गए भोजन, दवाई

उज्जैनवासी अपने शहर में बाहर से आए मेहमानों की मदद के लिए दौड़ पड़े। कोई घर से अपनी क्षमता अनुसार सब्जी-पराठे बनाकर मेला क्षेत्र पहुंचा तो कोई जितनी बन सकी, उतनी दवाई लेकर। महिलाओं के समूह संगिनी गु्रप की ममता सांगते लालपुल क्षेत्र में ठहरे संतों और श्रद्धालुओं के लिए दवाई और भोजन लेकर अपने गु्रप सदस्यों के साथ पहुंची।

उन्होंने कई चोटिल श्रद्धालुओं की मरहम-पट्टी की और ठहराने के इंतजाम किए। वहीं बहादुरगंज निवासी कार्तिकेय तिवारी भी अपने 20 साथियों की टीम के साथ मेला क्षेत्र में पहुंचे। ये देर रात तक साधु-संतों और श्रद्धालुओं की हरसंभव मदद में लगे रहे। कुछ युवा घरों से पूड़ी के टोपले भरकर दोपहिया पर ले गए और मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं के बीच वितरण की।

रात के 12 बजे थे। मंगलनाथ क्षेत्र में ठेले से सुमित्रा यादव लोगों को पूरी भाजी बांट रही थी। पूछने पर बताया कि दोपहर तक कचोरी भजिए बेच रही थी। बारिश के बाद लोगों को भूखे भटकते देखा तो मन नहीं माना। पैसा लेकर क्या कमाती इन लोगों से। भजिए छोड़कर पूरी बनाने लगी और सबकों पेट भर खिलाया।

… और आटे के डिब्बे कर दिए खाली

इंदिरानगर मंगलनाथ क्षेत्र के करीब है। रहवासी संघ ने बारिश में भीगे श्रद्धालुओं की मदद का फैसला लिया। रहवासी इकट्ठा हुए। घरों से आटे के डिब्बे और तेल आने लगा। पूरी भाजी तैयार कराई और सबको भर पेट भोजन कराया। इतना ही नहीं, लोगों ने ड्राइंग रूम को गेस्ट रूम में तब्दील कर दिया।

15 से ज्यादा कमरों में बाहर से आए लोगों को रुकवाने का इंतजाम किया। छतों पर भी व्यवस्था की। शर्मा परिवार ने उड़ीसा से आए विष्णु नारायण के परिवार को तीसरी मंजिल के हॉल में रुकवाया। विष्णु ने कहा हम रामगोपाल धाम में रुके थे, वहां पानी भर गया। इस परिवार के हम जिंदगी भर शुक्रगुजार रहेंगे।

पेट्रोल पंप बना रैन बसेरा

आगर रोड पर गोपाल माहेश्वरी का पेट्रोल पंप है। यहां 30 से ज्यादा लोगों के उन्होंने रुकने की व्यवस्था कराई। 50 से ज्यादा खाने की पैकेट तैयार कराए और बिछात का इंतजाम भी। गोपाल ने कहा कि उज्जैन महाकाल की नगरी है। यहां कोई भूखा कैसे सो सकता है।

अफरा-तफरी के बीच सफाईकर्मियों ने संभाली कमान

आंधी और बारिश से मची अफरा-तफरी के बीच भी सफाईकर्मियों ने जनसेवा की कमान संभाली। जिससे जो मदद हुई, उसने वैसा काम किया। कोई लोगों को खुले इलाके से शेड तक पहुंचाने में जुट गया तो कोई शेड में सहमे बैठे लोगों को ढांढस बंधाने में। सफाई ठेकेदार कंपनी ग्लोबल के शालू पाठक अस्पताल में लोगों की मदद करते दिखाई दिए।

सारे कैम्प गिरे, बस एक रहा सुरक्षित

मंगलनाथ क्षेत्र के लगभग सारे कैम्प उखड़कर गिर गए, मगर श्री दाऊजी धाम खालसा का कैम्प सुरक्षित रहा। आपदा के बाद कई लोगों ने इसे सुरक्षित मान यहां शरण ली।

साभार- http://naidunia.jagran.com/

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