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स्मिता प्रकाश ने बताया कैसी होगी 2020 के बाद की पत्रकारिता

‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ समारोह में न्यूज़रुम 2020 को लेकर आयोजित समूह चर्चा में न्यूज एजेंसी ‘एएनआई’ की प्रमुख संपादक स्मिता प्रकाश ने आने वाले समय में यानी 2020 तक न्‍यूजरूम के भविष्‍य को लेकर अपने विचार व्‍यक्‍त किए। उन्‍होंने कहा, ‘मुझे इस पेशे में बीस साल से ज्‍यादा हो गए हैं और मैंने इसे बढ़ते हुए और इसमें काफी बदलाव होते हुए भी देखे हैं।’ स्मिता प्रकाश का कहना था, ‘अब यह माना जा रहा है कि न्‍यूज टेक्‍नोलॉजी से चलती है। पत्रकारिता के बारे में हमने जो शुरुआत में सीखा था, वह स्‍टोरी का पीछा करने के बारे में था। यानी पहले हम स्‍टोरी के पीछे भागते थे और स्‍टोरी जुटाते थे। लेकिन धीरे-धीरे हम सभी का फोकस स्‍टोरी को डिलीवर करने की तरफ परिवर्तित हो गया। इसलिए आपको सबसे पहले स्‍टोरी को बाहर निकालना होगा।’

उन्होंने कहा कि एएनआई मल्‍टीमीडिया काफी समय पहले से इंटीग्रेटिड न्‍यूजरूम पर काम रहा है। मल्‍टीमीडिया चैनलों का उदाहरण देते हुए उन्‍होंने कहा कि जिस प्रकार एक अखबार के पास वेबसाइट और टेलिविजन चैनल भी होता है और उनकी अलग-अलग विंग होती है, लेकिन एएनआई के पास अलग-अलग विंग न होकर एक ही एंटीग्रेटिड न्‍यूजरूम है।

एएनआई में पत्रकार भी आज मल्‍टीटास्किंग हो गए हैं। वे रिपोर्टिंग करने जाते हैं, सेल्‍फी स्टिक की सहायता से घटनाओं अथवा इवेंट्स को शूट भी करते हैं और समय के अभाव में बिना एडिटिंग के ही स्‍टोरी को पब्लिश कर देते हैं। इस तरह दर्शकों को लाइव स्‍टोरी देखने को मिलती है। वर्ष 2018 में इतना बदलाव आ चुका है और वर्ष 2020 में तो मुझे लगता है कि रिपोर्टर मौके पर जाकर सीधे ही वहीं से रिपोर्टिंग करेंगे। यदि हम टेलिविजन की बात करें तो आज के समय में चीजें काफी तेजी से बदल रही हैं और जो समय और टेक्‍नॉलाजी के साथ अपने आप को अपडेट कर रहे हैं, अपनी रिपोर्टिंग में बदलाव कर रहे हैं, वे ही लोग 2020 तक इस प्रोफेशन में बने रहेंगे। जो चैनल पुरानी परिपाटी पर चल रहे हैं, उनके लिए आने वाले समय में काफी दिक्‍कत होगी। क्‍योंकि आजकल लोगों के पास समय का काफी अभाव है और वे यदि न्‍यूज अथवा कोई अन्‍य इंफॉर्मेशन चाहते हैं तो उसके लिए समय का इंतजार नहीं कर सकते हैं। ये सब चीजें आजकल वे अपने मोबाइल आदि के जरिये तुरंत प्राप्‍त कर सकते हैं। आजकल ब्रेकिंग स्‍टोरी भी लोग अपने मोबाइल पर आसानी से हासिल कर रहे हैं। स्मिता प्रकाश ने समय के साथ बदलाव न होने के परिणामों के बारे में भी चेतावनी देते हुए कहा, ‘जो लोग समय के साथ चल रहे हैं और जो लोग स्‍टोरी ब्रेक कर रहे हैं, ऐसे लोग ही वर्ष 2020 तक प्रासंगिक बने रहेंगे।’

पैनल डिस्‍कशन के बाद सवाल- प्रसार भारती के राकेश शुक्‍ला द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में स्‍मिता प्रकाश ने कहा, ‘आजकल इंटरनेट पर तमाम बकवास सामग्री भी भरी पड़ी है और वो आप लोगों तक बिना तथ्‍यों की जांच के पहुंच रही है। लोग उससे प्रभावित भी हो रहे हैं। हम लोगों के पास उसे चेक करने का टाइम नहीं है कि हम उसके तथ्‍यों की जांच करें। बिना तथ्‍यों की जांच वाली कई स्‍टोरी हमें हटानी पड़ती हैं। इसके बावजूद ऐसी सूचनाएं फैल जाती हैं और लोगों तक पहुंच जाती हैं। कई बार हम निर्णय लेते हैं कि यह न्‍यूज लोगों के काम की नहीं है, इसके बावजूद फेसबुक अथवा अन्‍य माध्‍यमों के द्वारा वह हजारों लोगों तक पहुंच जाती है।

पिछले दिनों एयरफोर्स के कुछ लोग हनीट्रैप में पकड़े गए थे, दरअसल वे बिना संपादित अथवा बिना तथ्‍यों की जांच वाले कंटेंट का इस्‍तेमाल कर रहे थे। इन लोगों ने फेसबुक के माध्‍यम से पड़ोसी देश के लोगों को अपना दोस्‍त बना रखा था और अपने देश की गोपनीय सूचनाओं को उन्‍हें उपलब्‍ध करा रहे थे। इसलिए यह कहना गलत है कि आप सब कुछ टेलिविजन पर देख रहे हैं। हो सकता है कि एक टेलिविजन चैनल किसी खास राजनीतिक दल की बात कर रहा हो और दूसरा टीवी चैनल किसी अन्‍य राजनीतिक दल की लेकिन आपको तय करना है कि आपको उन दोनों में से किसका चुनाव करना है। लेकिन इंटरनेट पर तो आप बिल्‍कुल ऐसी इंफॉर्मेशन हासिल कर रहे हैं जो सत्‍यापित नहीं है और इनमें से कई तथ्‍यों की कसौटी पर भी खरी नहीं उतरती हैं। हो सकता है कि यहां आपको कुछ जाहिल-गंवार मिल जाएं लेकिन सबसे पहले मैं ये बता दूं कि ये जाहिल-गंवार भी हमारे सबस्‍क्राइबर हैं। इसलिए यह सोचना गलत है कि ये लोग जाहिल-गंवार हैं। कई बार ऐसे लोग हमें कोई ऐसी इंफॉर्मेशन भी दे देते हैं जो हमारे पास नहीं होती है और हमारे बहुत काम की होती है। इसलिए मैं इस बात से असहमत हूं कि गंवार व्‍यक्ति को इस तरह नीची दृष्टि से देखना चाहिए।

परिचर्चा के आखिर में स्मिता प्रकाश का कहना था, ‘आजकल विकल्‍प बहुत ज्‍यादा हो गए हैं। इसमें लोगों को तय करना है कि वे किसे पसंद करते हैं। रही बात फेक न्‍यूज की तो मुझे नहीं लगता कि वर्ष 2020 में भी इससे निजात मिल पाएगी, क्‍योंकि हम लोगों के पास फेक न्‍यूज को लेकर कोई सॉल्‍यूशन नहीं है। हमें आने वाले समय में फेक न्‍यूज को रोकने के लिए प्रयास करने चाहिए और हमें उम्‍मीद है कि इसका कुछ न कुछ उपाय तो जरूर निकलेगा। यदि हम राजनीतिक झुकवा अथवा निष्‍पक्षता की बात करते हैं तो मुझे नहीं लगता कि कोई भी न्‍यूज चैनल अथवा अखबार किसी के पक्ष में अथवा पूर्वाग्रही नहीं है। ऐसे में आपको यह तय करना पड़ेगा कि कौन सा पक्ष आपको सूट करता है और कौन सा नहीं।’

साभार- http://samachar4media.com से



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