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ये नोटबंदी तो भारी पड़ी गाँव के गरीबों पर

चित्रकूट / नोटबन्दी के फैसले को एक महीने से ऊपर का समय हो गया है लेकिन अभी भी बैंको की स्थिति जस की तस है । चित्रकूट जिला मुख्यालय भी इससे अछूता नही है । सबसे ज्यादा बुरी दशा इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंको की है जहाँ कई दिनो से लगातार कैश की समस्या आ रही है । बैंक कर्मचारियों के अनुसार पिछले हफ्ते के गुरूवार से बैंक में कैश नही आ रहा है । आपको बता दें कि दो दिनों की छुट्टी के बाद कल तमाम बैंक खुले थे लेकिन जैसे ही लोग यूपी ग्रामीण बैंक पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि कैश ही नही है ।

फिलहाल 500 और 1000 की बड़ी नोटों के बंद होने के कारण किसानों और मजदूरों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है । ऐसे ही चित्रकूट के एक किसान बालम 40 किमी दूर से बैंक इस आस में आये थे कि आज तो पैसा निकल ही जायेगा लेकिन उन्हें निराश ही होना पड़ा । उन्होंने बताया कि हम एक हफ्ते से लगातार बैंक आ रहे हैं लेकिन रोजाना बैंक वाले कहते हैं कि कैश नही है । उन्होंने बताया कि ये समय रबी की फसल का समय है और अगर जल्दी ही पैसा नही निकला तो फसल सूख जायेगी क्योंकि बिना पैसे के हम कुछ खरीद भी नही पा रहे हैं । इसी प्रकार किसान रामकिशन तो मानते हैं कि सरकार का नोटबन्दी का फैसला तो सही है लेकिन तैयारी में कुछ कमी रह गई । उन्होंने बताया कि जो पैसा बचा था उसे भी इस डर से जल्दी जमा कर दिया कि कहीं ख़राब न हो जाये । लेकिन अब रोजाना घर से बैंक आने जाने के लिए भी पैसे नही बचे हैं ।

वैसे ये स्थिति सिर्फ बालम या रामकिशन की ही नही है बल्कि इस समय उन तमाम किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है जिनकी छोटी पूंजी बैंक में है और किसानी का कार्य प्रभावित हो रहा है । ग्रामीण बैंको का आलम तो ये है कि लोगो को रोज रोज बैंको के चक्कर काटने पड़ते हैं । अधिकांश किसान सरकार के फैसले से तो खुश है लेकिन उनका भी मानना है कि सरकार को और तैयारी के साथ ये नियम लागू करना चाहिये था ।

एक तरफ सरकार दावा कर रही है कि बैंको में कैश बड़ी मात्रा में पहुँचाया जा रहा लेकिन बैंको में कैश नही पहुँच पा रहा है और दूसरी तरफ देश के अधिकांश स्थानों से नई करेंसी भी बरामद हो रही है । ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि आखिर कैश जा कहाँ रहा है !

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