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समाज भी कार्य और व्यवहार का मोल जानता है

“कर्मण्येाधिकारस्ते मां फलेशु कदाचन” भगवत गीता का यह विख्यात सूत्र कहता है कर्म किए जाओ कर्म फल की इच्छा मत करो। इस सूत्र को जब मै अपने जीवन के सन्दर्भ में झांक कर देखता हूं तो कहीं न कहीं सार्थक होता पाता हूं। सदैव ही जीवन में कर्म की प्रधानता को सर्वोपरि माना है। इस सूत्र की गूढता को समझ कर अपनाने का प्रयास किया है। सूत्र ने जैसा कहा कर्म का फल की चिंता मत करो। कभी भी फल के लिए कोई प्रयास या लाबिंग नहीं की। जो भी मिला अनायास ही मिला।

सरकारी सेवा में पदोन्नति का दिन आने पर ही अनायास पता चला। उदयपुर पदस्थापन के दौरान दिसम्बर 2013 में एक ढाबे पर पत्रकार साथियों के साथ भोजन आने की प्रतीक्षा में गप्पों में मशगूल थे कि मोबाइल की धंटी बजी।कॉल जयपुर से थी सो मैं बाहर आया।मन में विचार आया क्या कुछ गलती हो गई लगता है डांट पड़ेगी। जब कॉल रिसीव किया तो उधर से संयुक्त निदेशक की पदोन्नति होने की सूचना पर एका एक यकीन नहीं हुआ। दो – तीन बार पूछ कर भी तसल्ली नहीं हुई तो उप निदेशक प्रशासन बिलुनिया जी से बात कर पुष्टि की। अचानक सहायक निदेशक से डबल पदोन्नति की सुन कर मेरी खुशी का तो परावार नहीं रहा। न जाने क्यों अभी भी यकीन नहीं हो रहा था अतः यह बात दबा कर उस समय मित्रों को नहीं बताई।

ऐसा ही कुछ तब हुआ जब सहायक निदेशक पद पर पदोन्नत किया गया था। मैं कोटा में जिला कलेक्टर के कक्ष में था। पी. ए. साहब लोकवाणी जी ने आ कर कहा श्रीमत पाण्डेय जी जो विभाग के सचिव थे आपसे बात करना चाह रहे हैं। मैंने उनके कक्ष में जा कर बात की तो कहने लगे, आपको बधाई हो, सहायक निदेशक बन गए हो। अभी – अभी डी. पी. सी. हुई है, तुम्हारी पदोन्नति हो गई है। मैंने उनका आभार व्यक्त किया। वो कहने लगे तुम कोटा से बाहर तो जाओगे नहीं तुम्हे कोटा ही लगा देंगे एक बार ज्वॉइन कर लेना। यह तो वही बात हुई सोने पे सुहागा।

पदोन्नति के साथ – साथ कोटा में सहायक जन सम्पर्क अधिकारी, जन सम्पर्क अधिकारी और सहायक निदेशक के रूप की गई सेवाओं को तत्कालीन जिला कलेक्टरों ने उत्कृट मानते हुए जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस एवं स्वाधीनता दिवस समारोह में जिला प्रशासन की और से सम्मानित कर होंसला बढ़ाया। कई जिला कलेक्टर्स ने कई बार किए गए कार्यों का प्रशंसा पत्र दे कर भी हौसला बढ़ाया।

सेवा काल में सरकारी काम के साथ – साथ स्थानीय नागरिकों और स्वयंसेवी संस्थाओं से भी गहरा जुड़ाव रहा और जितना बन पड़ा निस्वार्थ भाव से खूब काम किया। इसका फल ईश्वर ने सेवा निवृति के बाद दिया। सेवा निवृत्ति के बाद महसूस हुआ की समाज के लोग भी व्यवहार और काम का मोल आंकते हैं। समाज के लोगों ने हमेशा मेरे लेखन में जरूरत होने पर दिल खोल कर सहायता की और मान – सम्मान भी दिया।

राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, कोटा द्वारा हिन्दी दिवस -2018 पर ” प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान कर ” हिंदी साहित्य सेवा” सम्मान ,वरिष्ठ नागरिक जन दिवस – 2018 पर प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान कर ” वरिष्ठजन पर्यटक लेखक” सम्मान एवं अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस – 2019 पर ” व्योश्री सम्मान – 2019″ से सम्मानित किया गया।

राष्ट्रीय हिन्दी समाचार पोर्टल प्रभा साक्षी, नई दिल्ली की 18 वीं वर्षगांठ पर दिल्ली में आयोजित समारोह में 8 नवंबर 2019 को पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में शोल ओढ़ा कर प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर “हिंदी सेवा सम्मान” से सम्मानित किया गया। इस मौके पर देश की कई बड़ी हस्तियां मौजूद थीं, यह पल मेरे लिए किसी गौरव से कम नहीं था।

पर्यटन के क्षेत्र में कई पुस्तकें लिखने और हाड़ौती क्षेत्र का राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार – प्रसार में उत्कृष्ट कार्य करने पर कोटा की संस्था न्यू इंटरनेशनल द्वारा 6 जनवरी 2021 को “हाड़ौती गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया। वर्किंग जर्नलिस्ट फेडरेशन ऑफ इंडिया की कोटा इकाई द्वारा 5 दिसम्बर 2021 को “पत्रकार सम्मान” से सम्मानित किया गया।

राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय कोटा द्वारा राजस्थान दिवस पर आयोजित ” हमारा रंग बिरंगा राजस्थान” ऑन लाइन राष्ट्रीय सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में संयोजक की सफल भूमिका के लिए 23 अप्रैल 2022 को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। श्री राजाराम कर्मयोगी सेवा संस्थान कोटा द्वारा साहित्यकार और लेखक के रूप में राजा राम मोहन राय जयंती पर 22 मई 2022 को कोटा में आयोजित साहित्यकार सम्मान समारोह में “शान – ए – राजस्थान श्री राजा राम कर्मयोगी साहित्य गौरव सम्मान -2022” से मोतियों का कंठहार पहना कर, शाल ओढाकर एवं सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

समय – समय पर अचानक मिली पदोन्नतियां, सरकार और समाज द्वारा दिया गया मान – सम्मान सभी काम को ही पूजा मान कर किए गए कर्मो का फल और ईश्वरीय वरदान मानता हूं। वर्तमान में मै अपने लेखन के काम में लीन रहता हूं और समाज और मित्रों का सतत रूप से प्राप्त होता स्नेह मेरा होंसला अफजाई करता है।

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