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मतदाता जागरूकता अभियान के तहत दिग्विजय कालेज में भाषण और वाद विवाद प्रतियोगिता

राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय मतदाता जागरूकता अभियान के अंतर्गत प्राचार्य डॉ. बी.एन.मेश्राम के मार्गदर्शन में भाषण और वादविवाद प्रतियोगिता का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। दोनों रचनात्मक विधाओं का संयोजन प्राध्यापक डॉ. चन्द्रकुमार जैन ने किया। कालेज के कांफ्रेंस हाल में लगभग दो दर्जन प्रतिभागियों ने स्वीप प्लान के सन्देश को ध्यान में रखते हुए प्रभावी विचार व्यक्त किए। स्वीप प्लान के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र सिंह ने इस अवसर पर कहा कि पढ़ाई के साथ ऐसी रचनात्मक गतिविधियों से ज्ञान बढ़ता है। इससे व्यक्तित्व का विकास भी होता है। डॉ. जैन ने कहा कि युवाओं के लिए ऐसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में भागीदारी के साथ नए साल का आगाज़ करना अपने आप में गौरव की बात है। डॉ. अंजना ठाकुर, डॉ. दिव्या देशपांडे, डॉ. संजय सप्तर्षि, डॉ. नीलम तिवारी, डॉ. स्वाति दुबे ने उपस्थित रहकर आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

वादविवाद का विषय था – इस सदन की राय में चुनावी ज्ञान से ही सशक्त लोकतंत्र संभव है। विषय के पक्ष और विपक्ष में बोलते हुए युवा प्रतिभागियों ने पक्ष में जहाँ एक तरफ निर्वाचन प्रक्रिया के ज्ञान को ही सर्वोपरि बताया वहीं विपक्ष के वक्ताओं ने लोकतंत्र के सशक्तीकरण के लिए चुनाव के अतिरिक्त एक जिम्मेदार नागरिक के व्यापक कर्तव्यों पर प्रकाश डाला। इसी थीम पर केंद्रित भाषण प्रतियोगिता में भी प्रतिभागियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। भाषण प्रतियोगिता में ईश्वरी साहू ने प्रथम स्थान का गौरव हासिल किया। वादविवाद में पूजा साहू पक्ष में और ईश्वरी शर्मा विपक्ष में प्रथम रहीं। विजेता छात्राएं अब जिला स्तर की स्वीप प्लान स्पर्धा में सहभागिता करेंगी।

गरिमामय कार्यक्रम को रोचक मोड़ देते हुए संयोजक डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने जहाँ एक तरफ राष्ट्रीय मतदात जागरूकता अभियान के स्वरूप और प्रभाव की चर्चा की वहीं दूसरी ओर प्रतिभागियों को प्रभावी सम्भाषण और प्रस्तुति के अचूक टिप्स भी दिए। खास तौर पर नेशनल डिबेटर रहे डॉ. जैन ने डिबेटिंग कौशल को बारीकी से समझाया कि पक्ष का वक्ता सदन की राय का गंभीरता के साथ प्रतिपादन करता है। विपक्ष में कुछ ज्यादा तेज तेवर और आक्रामक किन्तु अनुशासित ढंग से अपनी बात कहने की कला का अलग महत्त्व है। उन्होंने कहा कि मंच से बोलना एक शक्ति और कला भी है। इसमें सफलता के लिए लगन और साधना दोनों जरूरी है। प्रतिभागियों ने इन सुझावों का करतल ध्वनि से लगातार स्वागत किया।

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