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जेल में बंद सुब्रत रॉय ने लिख डाली ‘दार्शनिक’ किताब

जेल में बंद इंसान का बोर हो जाना स्वाभाविक है। तिहाड़ जेल में बंद सुब्रत रॉय का बोर हो जाना भी समझा जा सकता है, लेकिन अब रॉय जेल में अपने समय का इस्तेमाल दार्शनिक लेखक बनने में कर रहे हैं। उनकी लिखी तीन किताबों की श्रृंखला में से पहली किताब, ‘लाइफ मंत्रा’ जल्द ही लोग पढ़ सकेंगे। बड़े स्तर पर चीजें आयोजित करने का सहाराश्री का शौक शायद जेल में भी कम नहीं हुआ है। उनकी यह किताब 5,000 से भी ज्यादा शहरों में आज रिलीज होने जा रही है। संयोग से सहारा समूह की नींव भी 1 फरवरी को ही रखी गई थी।

इस किताब को दिल्ली स्थित शीर्ष पब्लिशिंग हाउस रूपा द्वारा छापा गया है। इसके बारे में सहारा समूह के एक व्यक्ति का कहना है कि यह सहाराश्री के ‘जीवन की सीख’ है। इस किताब को लेकर बेहद सतर्कता बरती गई और यह ख्याल रखा गया कि इसके बारे में कोई भी जानकारी बाहर लीक ना हो। हालांकि हमारे सूत्रों का कहना है कि इसमें रॉय ने अपनी कैद और इससे जुड़े अनुभवों के बारे में लिखा है। सूत्रों का कहना है कि रॉय इस श्रृंखला की अगली दोनों किताबों पर भी जोर-शोर से काम कर रहे हैं, लेकिन इसके बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

यह दूसरा मौका है जब सहारा समूह ने अपने खिलाफ चल रहे मामले व विवादों में अपना पक्ष रखने की कोशिश की है। इससे पहले नवंबर 2014 में समूह ने एक पत्रिका छपवाई थी। दावा किया गया था कि इसमें सहारा समूह के खिलाफ लगे आरोपों का सच और तथ्य दिया गया है। इस पत्रिका को समूह में काम करने वाले लोगों के बीच बांटा गया था। उससे भी पहले, सहाराश्री ने जेल के अंदर से ही अपने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए 14 पन्नों की एक चिट्ठी लिखी थी। उसमें रॉय ने कर्मचारियों से वेतन ना मिलने के कारण परेशान नहीं होने और सिर उठाकर रहने की अपील की थी। मालूम हो कि अदालत ने सहारा समूह के बैंक खातों को सील करने का आदेश दिया था, जिसके बाद कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं मिल पा रही थी।

रॉय की लिखी इस पहली किताब को समूह अपने यहां काम कर रहे लोगों के बीच बंटवाने की योजना बना रहा है। देशभर के सहारा दफ्तरों में सीलबंद बक्सों के अंदर बंद यह किताब पहुंच भी चुकी है। इससे पहले सहाराश्री के सभी आयोजन काफी बड़े और आलीशान स्तर पर आयोजित होते थे, लेकिन किताब विमोचन का यह मौका शांत होने की उम्मीद है। हालांकि इस मौके पर अलग-अलग दलों के कई नेताओं-सांसदों के साथ-साथ, केंद्र सरकार के एक मंत्री के मौजूद होने की उम्मीद जरूर है। विमोचन के इस मौके पर कुछ रिटायर्ड सेना प्रमुखों के भी मौजूद होने की संभावना बताई जा रही है।

इस किताब के विमोचन के ठीक एक दिन बाद ही सुब्रत रॉय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई होनी है। सेबी ने इसके लिए 2 फरवरी की तारीख मांगी थी। मालूम हो कि सेबी ने सहारा प्रमुख पर धोखाधड़ी व गंभीर वित्तीय अनियमितताओं सहित कई आरोप लगाए थे। इसके बाद ही रॉय को 4 मार्च 2014 को जेल जाना पड़ा था।

मंगलवार को होने वाली यह सुनवाई काफी अहम मानी जा रही है। सेही की ओर से मामले की पैरवी कर रहे वकीलों ने उनसे वह तय तारीख बताने को कहा है, जब सहारा समूह अपने ऊपर बकाया राशि को चुकाएगा। हालांकि सेबी को भी अदालत से फटकार मिल सकती है। सहारा की ओर से बकाया राशि का एक हिस्सा मिल जाने के बाद भी अभी तक सेबी उस रकम को निवेशकों के बीच नहीं बांट सकी है। सेबी का दावा है कि सहारा समूह ने अपने निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की।

सहारा ने कई बार अदालत से गुजारिश की है कि सेबी की ओर से तय बकाया राशि चुकाने के लिए उसे अपनी संपत्ति बेचने की इजाजत दी जाए। इसके लिए अदालत ने सहारा को 45 दिन का अतिरिक्त समय दिया था। वह समयसीमा नवंबर 2015 में ही खत्म हो चुकी है। समूह ने दावा किया था कि उसे अपनी संपत्तियों को खरीदने के इच्छुक लोगों की ओर से ‘मजबूत पेशकश’ दी गई है, लेकिन इस बारे में समूह ने कोई ब्योरा नहीं दिया था। विदेश में संपत्ति के अलावा, सहारा समूह के अधिकारी इस रकम के इंतजाम के लिए देशभर में समूह की जमीनों और संपत्तियों को बेचने के साथ-साथ गिरवी भी रख रहे हैं।

लगता है कि निवेशकों के बारे में जानकारी मांगे जाने पर जिस तरह सहारा समूह ने सेबी के पास ट्रकों में भरकर कागज भेजा था, वैसे ही उन्हें ट्रकों में भरकर रुपये भी भेजने होंगे। सेबी की ओर से बताई गई यह बकाया राशि ब्याज के बाद बढ़कर 40,000 करोड़ तक पहुंच गई है।

साभार- इकॉनामिक टाईम्स से

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