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सोशल मीडिया हब बनाने पर सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सोशल मीडिया हब खोलने के फैसले पर कहा है कि यह एक तरह से लोगों की निगरानी करने जैसा होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के फैसले के खिलाफ तृणमूल विधायक की याचिका पर केंद्र से दो हफ्ते में जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने एजी केके वेणुगोपाल को कहा कि इस मामले में वह अदालत की सहायता करें।

कोर्ट ने कहा है कि सरकार नागरिकों के व्हाट्सएप मेसेज टैप करना चाहती है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच में जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ ने केंद्र को नोटिस भेजा है। इस मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की विधायक महुआ मोइत्रा ने याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल को भी मामले में सहायता करने को कहा है।

वरिष्ठ वकील एएम सिंघवी का कहना है कि सरकार सोशल मीडिया हब की सहायता से सोशल मीडिया कंटेंट की निगरानी करना चाहती है। बता दें इस मामले में कांग्रेस ने सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से निकाले गए टेंडर के हवाले से आरोप लगाया था कि सरकार निजता पर वार कर लोगों के जीवन में ताक-झांक और नियंत्रण रखना चाहती है।

एएम सिंघवी ने दस्तावेज सार्वजनिक कर बताया था कि सरकार ने सोशल मीडिया कम्युनिटी हब के लिए कांट्रेक्टर को 42 करोड़ रुपए में एक साफ्टवेयर बनाकर देने का टेंडर निकाला है। जिसके माध्यम से फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, गूगल, प्ले स्टोर, फ्लिकर, ब्लॉग आदि 12 सोशल मीडिया प्लेटफार्म के डाटा पर निगरानी रखी जा सकेगी।

गौरतलब है कि हाल ही में केंद्रीय मंत्रालय के तहत काम करने वाले पीएसयू ब्रॉडकास्ट कंसल्टेंट इंडिया लि. (बीईसीआइएल) ने एक टेंडर जारी किया है। इसमें एक सॉफ्टवेयर की आपूर्ति के लिए निविदाएं मांगी गई हैं। सरकार इसके तहत सोशल मीडिया के माध्यम से सूचनाओं को एकत्र करेगी। अनुबंध के आधार पर जिला स्तर पर काम करने वाले मीडिया कर्मियों के जरिए सरकार सोशल मीडिया की सूचनाओं को एकत्र करके देखेगी कि सरकारी योजनाओं पर लोगों का क्या रुख है।



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