आप यहाँ है :

टेपा सम्मेलन:एक परम्परा के 50 साल

उज्जैन में वर्ष १९७० में नगरनिगम के सभागार में प्रयोग के बतौर शुरू हुए टेपा सम्मेलन में पद्मभूषण प.सूर्यनारायण व्यास, पद्मश्री डॉ़ भगवतशरण उपाध्याय एवं पद्मश्री डॉ शिवमंगलसिंह सुमन को टोपे पहना कर प्रथम टेपा सम्मेलन का श्रीगणेश किया गया था। पहले ही टेपा में इन तीन महान विभूतियों को धिक्कारा जाना ही कार्यक्रम के सुदीर्घ भविष्य बता रहा था। बाद में तो सभी ने देखा कि एक छोटे सभागार से शुरू हुआ टेपाा सम्मेलन कालिदास मॉन्टेसरी स्कूल बम्बाखाना, माधव कॉलेज के बड़े मैदान और एक बार तो बढ़ती भीड़ के कारण क्षीरसागर स्टेडियम तक में आयोजित करना पड़ा। पिछले कई वर्षों से तो कालिदास अकादमी के मुक्ताकाशी मंच पर यह आयोजन सफलतापूर्वक हो ही रहा है।

सुपरिचित व्यंग्यकार स्व. डॉ. शिव शर्मा का मिशन था टेपा सम्मेलन जिसे उन्होंने अ.भा. स्वरूप दिया। साथ मिल गए प्रसिद्ध मालवी कवि श्री हरीश निगमजी और डॉ़ प्रभातकुमार भट्टाचार्यजी। शुरुआत में तो आमंत्रितों की महज प्रशस्तियां ही पढ़ी जाती थी और समापन पर थोड़ी बहुत कविताएं हो जाती थी। डॉ़ शिव शर्मा जी और हरीश निगम जी देश भर से आने वाले संपादकों, पत्रकारों, नामवर साहित्यकारों (सूची बहुत लंबी है) फिल्मी कलाकारों की दिलचस्प प्रशस्तियां पढ़ते और उपस्थित दर्शक/श्रोता इन्हें सुनकर आड़े आड़े पड़ जाते।

१९८०-८१ के आसपास व्यंग्यकार डॉ. पिलकेन्द्र अरोरा भी जुड़े अपनी अभिनव शैली से उन्होंने टेपा को एक नई दिशा दी। चिलमी मुकदमे शुरू हुए। अतिथियों से रोचक सवाल जवाब किये जाते। जब कार्यक्रम अपने शिखर पर रहा और जिस साल टेपा सम्मेलन की 50 वीं वर्षगांठ मनाई जानी थी उसी वर्ष दुर्भाग्य से टेपा संस्थापक डॉ शिव शर्मा जी अस्वस्थ होकर हमसे दूर चले गए टेपा का स्वर्ण जयंती कार्यक्रम मनाने का स्वप्न मन में ही लिए।

वरिष्ठ कवि हरीश निगम जी 10 वर्ष पहले ही चले गए थे। एक और महत्वपूर्ण सूत्रधार प्रो. रमेश गुप्ता ‘चातक’ भी जल्दी ही टेपा का साथ छोड़ गए थे। लेकिन टेपा की मूर्ख दिवस की यह मनोरंजक यात्रा कभी रुकी नहीं। कुछ बरस पहले जब शिव जी की बायपास सर्जरी हुई थी और वे दिल्ली में भर्ती थे तब भी टेपा उसी उत्साह उल्लास से हुआ था। डॉ पिलकेन्द्र अरोरा,कवि अशोक भाटी जी और डॉ. हरीशकुमार सिंह ने उस वर्ष टेपा को सुपरहिट बनाया हालांकि आयोजन के पीछे की तमाम व्यवस्थाएं टेपापुत्र भाई मनीष शर्मा जी और मण्डली ने तब से आज तक समुचित रूप से संभाले रखी हैं।

प्रथम टेपा सम्मेलन से लगाकर 50 वर्ष तक टेपा को पैसे कौड़ी का ठेका उस जमाने के बड़े समाजसेवी लाला अमरनाथ जी और बाद में उनके सुयोग्य पुत्र श्री ओम अमरनाथ जी तथा उनके परिजनों ने लगाया है आज भी टेपा सम्मेलन के पीछे अमरनाथ परिवार पूरे दमखम से खड़ा हुआ है। दुःख की बात यह है कि 50 वें टेपा सम्मेलन की आड़ में कोरोना बुरी तरह आकर खड़ा हो गया है। उम्मीद थी कि वर्ष २०२१ की पहली अप्रैल को टेपा की अर्धशती धूमधाम से मनाई जाएगी, लेकिन यही खोड़ला कोरोना फिर बाधा बन गया है।

जब भी हो हास्य व्यंग्य की इस परम्परा के 50 वें वर्ष पर स्व. डॉ शिव शर्मा जी को विनम्र श्रद्धांजलि के साथ भाई मनीष शर्मा जी, डॉ पिलकेन्द्र अरोरा जी, डॉ हरीश कुमार सिंह जी और दिनेश दिग्गज जी को हार्दिक शुभकामनाएं।

 

image_pdfimage_print


Leave a Reply
 

Your email address will not be published. Required fields are marked (*)

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

सम्बंधित लेख
 

Back to Top