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सन्तरा उत्पादन का रकबा तीन गुना से अधिक हुआ

झालावाड़ के किसानों की जागरूकता एवं मेहनत के कारण वर्ष 2007 में संतरा फसल का रकबा मात्र 13 हजार हैक्टेयर से बढ़कर 46 हजार हैक्टेयर हो गया है। संभागीय आयुक्त के.सी.मीना ने100 कृषकों के साथ गर्दनखेड़ी में कृषक कैलाश दांगी द्वारा स्थापित एवं संचालित संतरा ग्रेडिंग एवं वैक्सिंग यूनिट तथा गेहूं ग्रेडिंग एवं आटा चक्की का निरीक्षण किया।

ग्राम सरोनिया के किसान द्वारका लाल पाटीदार ने वर्ष 2007 में उद्यान विभाग के अधिकारियों के सम्पर्क में आने पर बंजर पहाड़ी क्षेत्र की भूमि को पांच-छः टुकड़ों में काटकर समतल कर संतरे का बगीचा लगाया जिसमें वर्तमान में 17 हैक्टेयर में 5 हजार से अधिक संतरे के फलदार पौधो से गत वर्ष लगभग 85 लाख रूपए तक की सालाना आय ले रहे हैं। उन्हें जागरूकता के कारण वर्ष 2003 में इजरायल में नवीनतम कृषि तकनीकों एवं उनके अनुभवों की जानकारी देने के लिए भेजा गया था। द्वारकालाल उद्यानिकी एवं कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षणों में व्याख्यान देकर कृषकों को जागरूक कर रहे हैं। वे अपने सरोनिया ग्राम में ही करीब 60 किसानों को संतरा का बगीचा लगाने के लिए प्रेरित कर उनकी आमदनी बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुए हैं।

 

पिड़ावा के ग्राम गर्दनखेड़ी के कृषक कैलाश दांगी ने लगभग 8 हैक्टर क्षेत्रफल में संतरा के बगीचे स्थापित कर उद्यानिकी के माध्यम से विकास की डोर पकड़ी है। बगीचा एवं उद्यानिकी फसलों में सिचाई पानी की कमी की समस्या के समाधान के लिए 3 कृषकों के समूह ने मिलकर एनएचएम अन्तर्गत वर्ष 2017-18 में सामुदायिक जल स्त्रोत डब्ल्यू एच एस का निर्माण करवाया, जिससे वर्षा जल को एकत्रित कर रबी फसलों में सिचाई करने लगे तथा संग्रहित पानी से ड्रिप सिंचाई पद्वति को अपनाया।

बगीचों में अफलन की समस्या से विचलित न होकर राष्ट्रीय बागवानी मिशन में विभाग के अधिकारियों की प्रेरणा से वर्ष 2017 में संतरा ग्रेडिग एवं वैक्सिंग यूनिट की स्थापना की गई। जिसके लिए उद्यान विभाग द्वारा नियमानुसार प्रोजक्ट लागत का 35 प्रतिशत अनुदान दिया गया। संतरा ग्रेडिंग एवं वैक्सिंग के कारण कृषकों को अच्छे भाव मिलने लगे और संतरा राजधानी सहित अन्य राज्यों एवं बांग्लादेश तक निर्यात होने लगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं व विभिन्न विषयों पर निरंतर लिखते हैं)

 

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