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मुंबई अंडरवर्ल्ड का सबसे बड़ा सवाल

क्या दाऊद की गिरफ्तारी संभव है?

पिछले दिनों एक बड़ी जोरदार बहस… या कहें कि ऑनलाईन, न्यूज चैनलों तथा अखबारों के जरिए दाऊद को गिरफ्तार कर देश वापस लाने का अभियान शुरू हो गया था। इस बारे में सवाल दर सवाल खड़े होते रहे। दाऊद की भारत वापसी के बारे में यह साफ है कि ऐसा “फिलहाल तो असंभव है।”

दाऊद के भारत वापसी संबंधी मुद्दे पर लोगों की विभिन्न राय हो सकती हैं लेकिन किताब मुं’भाई के लेखक व खोजी पत्रकार विवेक अग्रवाल का साफ कहना है कि यह न आज संभव है, न कभी भविष्य में होगी, और इसके पीछे कई कारण हैं।

पाकिस्तान का डर
पहला तो यही कि पाकिस्तानी हुक्मरान नहीं चाहेंगे कि वे विश्व बिरादरी में नकटे दिखें। यदि दाऊद या उसके परिवार का कोई सदस्य पाकिस्तान से भारत जीवित भेजा जाता है तो हिंदुस्तान का पक्ष मजबूत होगा। पिछले कुछ समय से इस देश ने पाक को आतंकी देश घोषित करने के लिए जो मुहिम चला रखी है, वह रंग लाएगी। पाकिस्तान के तमाम राज फाश हो जाएंगे। उसकी वे तमाम जानकारियां बाहर आने लगेंगी, जिन्हे अब तक उसने बड़े जतन से छुपा कर रखा था।

आईएसआई के राज होंगे फाश
दूसरा कारण यह है कि पाक खुफिया एजंसी आईएसआई के अधिकारी दाऊद की गिरफ्तारी और भारत आने का सपना कभी पूरा नहीं होने देंगे। ऐसा हुआ तो आईएसआई अधिकारियों के तमाम राज तथा खतरनाक मंसूबों की जानकारी खुल कर सबके सामने आ जाएंगीं। इसके पहले कि ऐसा कुछ हो, वे कोई भी बड़ा और घातक कदम उठा सकते हैं।
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पाक सेना का छाया युद्ध
तीसरा कारण यह है कि पाक सेना की खुफिया इकाई के लिए भी दाऊद की गिरफ्तारी बड़ा सदमा साबित होगी। पाक सेना द्वारा भारत के खिलाफ चलाए जा रहे छाया युद्ध के तमाम राज खुल कर सामने आने के डर से वे भी ऐसा कदम उठाएंगे, जो कोई सोच भी नहीं सकता है। दाऊद तक किसी के पहुंचने के पहले ही आईएसआई और पीएमआई ही कुनबे व सिपहसालारों-प्यादों समेत उसका खात्मा कर सकते हैं।

भारत से टूटा भरोसा
चौथा और बड़ा कारण यह है कि अब दाऊद, उसका परिवार या गिरोह का कोई भी सदस्य भारत के किसी भी आश्वासन पर कतई भरोसा नहीं करेगा। याकूब मेमन को भारत आने और ‘मौत की सजा से छूट देने के वादे’ का टूटना डी-कंपनी के लिए ‘सब कुछ खत्म होने’ जैसा है। कराची से नेपाल होकर जब याकूब और उसका परिवार भारत पहुंचा था तो भारतीय खुफिया एजंसियों ने यह वादा किया था। यही कारण है कि याकूब अपन साथ काफी सबूत भी पाकिस्तान और दाऊद गिरोह के 93 बमकांड में शामिल होने संबंधी लाया था। याकूब को फांसी देना भारत की बड़ी कूटनीतिक और राजनीतिक भूल साबित हुई है।

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दाऊद की सुरक्षा
वाणी प्रकाशन से छप कर आई इस पुस्तक मुं’भाई में खोजी पत्रकार विवेक अग्रवाल ने लिखा है कि दाऊद को भारतीय एजंसियों या उसके दुश्मनों से बचाने के लिए कराची में उसके बंगले के बदले में एक बड़ी इमारत के कई फ्लैटों में से किसी एक में रहने की व्यवस्था की जाती है। पाक खुफिया एजंसियों के अधिकारियों को डर है कि ओसामा बिन लादेन सरीखा घातक हमला दाऊद पर करने की कोशिश भारतीय खुफिया एजंसियां कर सकती हैं या विरोधी गिरोहों के जरिए ऐसा दुस्साहस भरा कोई अभियान किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में उसके एक विशाल अज्ञात इमारत के किसी फ्लैट में रहने पर स्थानीय सामान्य नागरिकों की हत्याएं होने का डर बना रहेगा, जिसके चलते भारत या अमरीका भी ऐसा अभियान चलाने से बचेगा।

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