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मोदीजी के डिजिटल इंडिया का सबसे बड़ा फायदाः घर का फोन मोबाईल की तरह काम करेगा

भले ही कितनी मोबाइल क्रांति हो गई हो लेकिन आज भी स्पष्ट और बिना बाधा के बातचीत के लिए लैंडलाइन फोन की ही याद आती है। लोगों के पास ऑफिसों एवं घरों में लैंडलाइन फोन हैं भी, लेकिन एक जगह पर बैठे रहने और मोबाइल से नंबर छांटकर डायल करने का झंझट रहता है। इसलिए लोग लैंडलाइन के इस्तेमाल से बचते हैं। लेकिन बहुत जल्दी नई तकनीक में मोबाइल फोन को लैंडलाइन के कार्डलैस की तरफ इस्तेमाल करना संभव हो सकेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिजिटल इंडिया सप्ताह के मौके पर जिन सेवाओं का उद्घाटन कर रहे हैं उनमें एक है बीएसएनएल की लैंडलाइन की नेक्सट जनरेशन नेटवर्क (एनजीएन) सेवा। इस सेवा के जरिए बीएसएनए लैंडलाइन की करीब तीस साल पुरानी तकनीक के बदल देगा और इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) आधारित एनजीएन की शुरुआत करेगा।

केंद्रीय संचार सचिव राकेश गर्ग ने हिन्दुस्तान को विशेष बातचीत में बताया कि वैसे तो एनजीएन के कई फायदे हैं। इससे वीडियो कांफ्रेंस हो सकती है, आडियो कांफ्रेंसिंग हो सकती है। इंटरनेट चलाया जा सकता है, टीवी चल सकता है। लेकिन जो सबसे बड़ी बात यह है कि यह नेटवर्क लैंडलाइन एवं मोबाइल फोन सैट में कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इसके लिए लैंड लाइन के सैट में थोड़े बदलाव किए जाते हैं और फिर वाई-फाई के जरिये लैंडलाइन नंबर मोबाइल से कनेक्ट हो जाता है।

गर्ग के अनुसार जैसे ही आपका मोबाइल आपकी लैंडलाइन से संबद्ध हो जाता है तो आप मोबाइल से नंबर डायल कर लैंडलाइन नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकते हैं। बिल भी लैंडलाइन का ही बनेगा। इसी प्रकार जैसे ही लैंडलाइन पर आने वाली कॉल को मोबाइल पर सुन सकते हैं। फायदा यह है कि मोबाइल की तुलना में कहीं ज्यादा स्पष्ट और निर्बाध बातचीत की जा सकेगी। इसमें मोबाइल की काल खर्च नहीं होती है और अपनी सुविधानुसार इसे लैंडलाइन से संबद्ध किया जा सकता है।

बीएसएनएल के सीएमडी अनुपम श्रीवास्तव के अनुसार अगले दो सालों के भीतर सभी 35 हजार बीएसएनएल एक्सचेंजों को इस तकनीक में बदल दिया जाएगा। पहले चरणों में शहरी क्षेत्रों की लाइनों को एनजीएन में बदला जाएगा। इस पर पहले से काम चल रहा है तथा 40 लाख लाइनें इस साल के अंत तक एनजीएन में बदल जाएंगी।
 
बीएसएनएल का इंटरनेशनल एप जल्दी
बीएसएनएल जल्दी ही एक ऐसा एप लांच करेगा जिसके जरिये विदेशों से भारत में स्थानीय दरों पर कॉल कर सकते हैं। मसलन, यदि कोई व्यक्ति दिल्ली में रहता है तथा वह अमेरिका गया है और वहां से अपने मोबाइल से चेन्नई बात करता है तो उसे उतना ही बिल लगेगा जितना दिल्ली से चेन्नई बात करने में लगता है। जहां से फोन किया जा रहा है, वहां पर सिर्फ इंटरनेट की सुविधा होनी चाहिए। संचार सचिव ने कहा कि बीएसएनएल इस पर तेजी से कार्य कर रहा है।

 

साभार- दैनिक हिन्दुस्तान से 

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