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जल को देवता मानने वाले देश में 36 हजार करोड़ के पानी का कारोबार शर्म की बात : जल पुरुष राजेंद्र सिंह

नई दिल्ली।
अविरल गंगाजल साक्षरता यात्रा दिल्ली के गांधी पीस फाऊंडेशन में पहुंची। प्रारम्भ के सत्र में जल पुरुष जी की बैठक वहां उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ हुई। जिस यात्रा के भविष्य योजना पर विस्तार से चर्चा हुई।

यात्रा दूसरे सत्र में गंगा मिशन के मुख्यालय मेजर ध्यान चंद स्टेडियम के सभागार में पहुंची। सभागार में गंगा मिशन से जुड़े सभी वर्तमान एवं पूर्व छोटे व बड़े स्तर के अधिकारी उपस्थित थे। इस सभा में राष्ट्रीय जल नीति पर विचार व्यक्त करते हुए जल पुरुष श्री राजेन्द्र सिंह जी ने कहा कि हमारी राष्ट्रीय जल नीति ऐसी होनी चहिए, जो लोगो में विश्वास पैदा कर सके।जनमानस को यह विश्वास हो की जल जो जीवन है उस पर उन का अधिकार है। जिसका ये लाभ होगा कि लोग जल का उपयोग, संरक्षण एवं संवर्धन करेंगे। अब हो क्या रहा है जो जल प्रकृति ने हमे दिया है उसका व्यवसायीकरण हो रहा है। जिस जल को भारत में देवता मानकर पूजते थे वो अब लक्ष्मी बनाने का स्रोत होता जा रहा है। जिस देश में जल देवता हो और उस देश में 36 हजार करोड़ का पानी व्यवसाय। ये ही कारण है जनमानस इस पर अपना अधिकार नहीं समझता। यह बात हमे, सरकारों को समझनी पड़ेगी। इस देश में पानी पर सरकारों के माध्यम से कुछ व्यवसायिक संस्थानों का कब्जा होता जा रहा है।* जल पुरुष जी ने 63 देशों में जा चुकी जल साक्षरता यात्रा का अनुभव बतलाते हुए कहा कि *अगर हमे आने वाले संकट को महसूस करना हो तो हमे अफ्रीका, मध्य एशिया से बे पानी होकर उजड़ते लोगो से सबक सीखना पड़ेगा। परंतु हमारी सरकारें पानी का संकट मानकर कार्य कर रही है, जबकि जिस प्रकार पूरा देश में भूजल गिरता जा रहा है उससे अपातकाल जैसे हालात बनते जा रहे है।* जल पुरुष जी ने आगे कहा कि *सरकारों को जल नीति एसी बननी होगी, जो जल व्यवसाय न बन कर लोगो में विश्वास और जीवन पैदा कर सके। जनमानस को यह लगे की जिस जल का वह संरक्षण एवं संवर्धन कर रहे है, उस पर उन का अधिकार है। उस का परिणाम यह होगा की जनमानस कम पानी से अपनी फसल, जीवन बेहतर तरीके से चला सकेंगे। जिस देश में जल का इतना बड़ा संकट मुंह बाए खड़ा हो, और देश में वर्षा का जल नदियों के माध्यम से समुद्र में मिल जाता हो। यह गम्भीर चिंता का विषय है। इस पर सरकारों को गंभीरता से चिंतन करना होगा।* और इस संवाद के बाद जल पुरुष जी गंगा मिशन के डायरेक्टर जनरल श्री राजीव रंजन मिश्र के ऑफिस में गए वहां पर उन्होंने निवेदन किया कि *अविरल गंगा की कामना में युवा संन्यासी पद्मावती आमरण अनशन पर है। यहां सरकार का दायित्व बनता है की उनकी मांगों को सुने और उन पर संज्ञान लेकर अनशन को तुड़वाए।* इसके बाद जल पुरुष जी ने आगामी 5,6 जनवरी को होने जा रहे गंगा सम्मेलन जोकि हरिद्वार में हो रहा है। के लिए केंद्रीय मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, मंत्रालय के सचिव श्री यू. पी. सिंह व गंगा मिशन के निदेशक श्री राजीव रंजन मिश्र को सम्मेलन के लिए आमन्त्रित किया। यहां के बाद यात्रा श्री दीपक प्रवतियार के साथ *इंडियन फेडरेशन ऑफ युनाइटेड नेशन एसोसियशन* एवं *पुपिल्स एंड युनाईटेड* के मुख्यालय पहुंची। वहां पर विश्व जल नीति एवं जलवायु परिवर्तन पर विस्तार से चर्चा हुई। और इस पर चर्चा के बाद यह निष्कर्ष निकला की अगर समस्त विश्व को संकट से उबरना है, तो जल साक्षरता की तरफ जाना होगा। यहां के बाद यात्रा वापस गांधी पीस फाऊंडेशन पहुंची। जहा पर कुछ पत्रकार एवं इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायधीश श्री शंभूनाथ श्रीवास्तव (पूर्व लोकायुक्त) के साथ लंबी वार्ता हुई। जिसके बाद यात्रा राजस्थान के लिए प्रस्थान किया।

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