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कैशलेस यानी अधिक सुरक्षित और आसान सुविधा

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में ‘कैशलेस ट्रांजेक्शन’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन
भोपाल। कैशलेस लेन-देन भविष्य की आवश्यकता है। देश में ऐसे अनेक माध्यम उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से इंटरनेट के बिना भी बड़ी आसानी के साथ भुगतान किया जा सकता है। नकद लेन-देन की अपेक्षा यह अधिक पारदर्शी और सुरक्षित है। हम कह सकते हैं कि कैशलेस लेन-देन यानी अधिक सुरक्षित और आसान सुविधा। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (एनपीसीआई) के सहायक प्रबंधक धीरेन्द्र सिंह चौहान ने दी। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से ‘कैशलेस ट्रांजेक्शन’ विषय पर आयोजित जागरूकता कार्यशाला में श्री चौहान मुख्य वक्ता थे। इस अवसर पर उन्होंने पीपीटी के माध्यम से कैशलेस लेन-देन के सभी प्रकारों की जानकारी दी और अभ्यास भी कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने की।

कार्यशाला में श्री चौहान ने बताया कि वर्तमान में कैशलेस लेन-देन के लिए इंटरनेट बैंकिंग, ई-वॉलेट, प्लास्टिक मनी (डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, पीपीआईएस), एनईएफटी, आरटीजीएस, आईएमपीएस और मोबाइल बैंकिंग (एसएमएस, यूएसएसडी, मोबाइल एप) जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में आधार कार्ड के जरिए ही सबसे अधिक कैशलेस लेन-देन किया जाएगा। आज भी गाँव का साधारण व्यक्ति थोड़ी-सी जानकारी के बाद अपने आधार कार्ड का उपयोग करके पैसे निकाल और भेज सकता है। उन्होंने बताया कि आरबीआई ने देशभर में 24 नॉन बैंकिंग फर्म जैसे पेटीएम, फ्रीचार्ज और ई-बडी को लाइसेंस दिया है। श्री चौहान ने ई-वॉलेट के अनेक फायदे भी बताए। इसके अलावा उन्होंने बताया कि आधार इनबेल पे सिस्टम (एईपीएस) और इमीडीअट पेमेंट सर्विस (आईएमपीएस) के जरिए तत्काल पैसा भेजा जा सकता है। यह सेवा अवकाश के समय में भी काम करती है।

श्री चौहान ने नेशनल यूनीफाइड यूएसएसडी प्लेटफार्म (एनयूयूपी) की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि इस सुविधा के जरिए इंटरनेट और स्मार्टफोन के बिना भी सिर्फ मोबाइल के जरिए कैशलेस लेन-देन कर सकता है। वहीं, उन्होंने बताया कि यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) भविष्य में सबसे अधिक उपयोग होने वाला माध्यम बनेगा। इसकी मदद से पैसा दिया जा सकता है और प्राप्त भी किया जा सकता है। सुरक्षित कैशलेस लेन-देन के लिए उन्होंने कुछ सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि कभी भी अपना पासवर्ड किसी को नहीं बताएं। सुरक्षित नेटवर्क और अपने कम्प्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल पर ही इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग करें। मोबाइल नंबर जब भी बदलें, तत्काल बैंक को सूचित करें।

कैशलेस लेन-देन के प्रचार-प्रसार का संकल्प लें : अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि अपने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए हमें अधिक से अधिक कैशलेस ट्रांजेक्शन करना चाहिए। अपने देश के विकास में सहयोग देने के लिए हमें कैशलेस व्यवस्था का प्रचार-प्रसार करने का संकल्प भी लेना चाहिए। साथ ही यह तय करना चाहिए कि अधिक से अधिक व्यक्तियों को कैशलेस लेन-देन सिखाएंगे। इस अवसर पर कार्यक्रम की संयोजक वित्त अधिकारी श्रीमती रिंकी जैन ने बताया कि विश्वविद्यालय का 90 प्रतिशत लेन-देन कैशलेस है। इस अवसर पर आरबीआई की प्रबंधक श्रीमती गौरी विश्वनाथन भी उपस्थित थीं। धन्यवाद ज्ञापन कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने व्यक्त किया।



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