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शाओमी की बेईमानी पर उपभोक्ता न्यायालय ने नकेल कसी

बेंगलुरु। वॉरंटी पीरियड के अंदर रहते हुए फोन रिपयेरिंग के लिए चार्ज करने पर फोन निर्माता कंपनी शाओमी को यहां कि सिटी कंज्यूमर कोर्ट ने एक ग्राहक को मुआवजा देने के लिए कहा है। कोर्ट ने कंपनी और सर्विस सेंटर को फोन की कीमत और मुकदमे में आया खर्च देने का आदेश दिया है।

एचएसआर लेआउट में रहनेवाले मधुसूदन ने 24 मार्च 2015 को ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट पर 6,999 रुपये की कीमत का शाओमी रेडमी 2 हैंडसेट लिया था। 8 अक्टूबर को उनके फोन का डिस्प्ले खराब हो गया। उनके फोन पर कॉल्स रिसीव हो रही थीं और फोन वाइब्रेट भी कर रहा था।

वह फोन कोरमंगला के टीवीएस इलेक्ट्रॉनिक्स ले गए जो कि एक अधिकृत सर्विस सेंटर था। वहां उन्हें कहा गया कि 2,550 रुपये का खर्च आएगा। उन्होंने स्क्रीन बदलने के लिए कहा दिया। दो दिन बाद उन्हें सर्विस सेंटर से फोन आया कि मदर बोर्ड भी खराब है और उन्हें नया फोन लेना चाहिए जो रिपेयरिंग की कीमत का ही मिल जाएगा। मधुसूदन ने वॉरंटी के हिसाब से फोन ठीक करने या पूरी कीमत वापस करने के लिए कहा। जब उन्हें कंपनी का ओर से कोई जवाब नहीं मिला तो उन्हें डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल फोरम में शिकायत की।

दो साल तक चले केस में कंपनी ने बराबर कहा कि फोन में आई खराबी वॉरंटी के तहत नहीं आती। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि फोन एक साल के वॉरंटी पीरियड में जो रिपेयरिंग चार्ज कंपनी ने लिया वह गलत था। जज ने कहा कि वॉरंटी के हिसाब से फ्री रिपेयर या रिप्लेसमेंट दिया जाना चाहिए। ऐसे में नया फोन लेने के लिए कहना कंपनी पर सवाल उठाता है। आखिरकार कोर्ट ने शाओमी टेक्नॉलजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और टीवीएस इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड से मधुसूदन को 10,999 रुपये देने के लिए कहा है।

साभार- टाईम्स ऑफ इंडिया से



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