Sunday, June 16, 2024
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द कन्वर्शनः लव जिहाद पर रोंगटे खड़े कर देने वाली फिल्म

लव जिहाद का मुद्दा सड़कों से लेकर न्यायालय और मीडिया तक सुर्खियों में रहा. लेकिन लव जिहाद कैसे किया जाता है और इसका कितना घातक परिणाम लव जिहाद के चंगुल में फँसी हिंदूी लड़कियों को भुगतना होता है इसका ही रोंगटे खड़े कर देने वाला एहसास होता है लव जिहाद पर बनी फिल्म द कन्वर्शन में।

फिल्म मध्यांतर के पहले तो बहुत ही हल्के फुल्के अंदाज में आगे बढ़ती है। लेकिन फिल्म की नायिका लव जिहाद का शिकार होती है इसके बाद फिल्म का एक एक दृश्य आपको झकझोर देता है।

कैसे एक सनातनी ब्राह्मण लड़की जिसके घर में प्याज लहसुन तक नहीं खाया जाता उसे मांस और अंडे से खाना बनाने से लेकर इस खाने को खाने तक के लिए मजबूर किया जाता है। किस तरह ुसे झूठे वादे कर उससे निकाह कर लिया जाता है और शादी के दूसरे दिन ही उसे नाम बदलने को नजबूर किया जाता है। कैसेु उसकी सास इस्लाम के नाम पर उस पर हर दिन नई पाबंदियाँ थोपने लगती है। उसका जेठ जिसकी खुद की बीबी उसे छोड़क भाग गई है उसके साथ रिश्ते बनाने के लिए उस पर शिकंजा कसने की कोशिश करता है और विरोध करने पर उसे ही झूठा करार दिया जाता है। चारों ओर से इस्लामी रीति-रिवाजों से घिरी ये लड़की जब अपने ऊपर हो रहे अत्याचार का विरोध करती है तो उसे तलाक दे दिया जाता है। तलाक के बाद उसे हलाला के नाम पर अपने ससुर के बिस्तर पर पहुँचा दिया जाता है। ये बात ुसके जेठ को हजम नहीं होती और वो भी उसके साथ हलाला करने पर उतारु हो जाता है। ऐसा लगता है कि ये किसी का घर नहीं बल्कि कोई वैश्यालय है जहाँ ुसकी सास से लेकर पति, जेठ , ससुर सबह ुसकी बोली लगा रहे होते हैं।

लव जिहाद के जरिए धर्मांतरण करने का मामला लगातार सामने आता रहा है इसे देखते हुए सरकार ने कानून भी बनाया है और अब इस पूरे प्रकरण को फिल्म निर्माता ने पर्दे पर उतारा है इसकी पूरी शूटिंग वाराणसी मै की गई है इस फिल्म के जरिए दर्शाया गया है कि किस तरीके से लव जिहाद की आड़ में धर्मांतरण का काम होता रहा है फिल्म का नाम द कन्वर्जन (The Conversion) रखा गया है 6 मई को ये फिल्म बड़े पर्दे पर आएगी देश भर 750 सिनेमाघरों में प्रदर्शित की गई।

इस फिल्म को बनाने का मकसद निर्देशक बताते हैं कि युवा भटकाव ए में ना आए और धर्मांतरण जैसी चीजों से बचें

फिल्म की सबसे बड़ी खूबसूरती वाराणसी के घाट और गंगा नदी पर किया गया फिल्मांकन है। कहानी लिखी है वंदना तिवारी ने। फिल्म ने इस बात सशक्त ढंग से उठाया है कि कैसे लव जिहाद के नाम पर हिंदू लड़कियों को बहला-फुसला कर उन्हें नर्क में धकेल दिया जाता है।

अभिनेत्री विंध्य तिवारी ने जिस मासूमियत के साथ अपनी भूमिका को निभाया है उससे दर्शकों से उसका भावनात्मक रिश्ता सा बन जाता है।
जब फिल्म में साक्षी बनी अभिनेत्री निकाह के समय अपना नाम बदलने को मज़बूर होती है इस दृश्य को अपनी आँखों से बहुत ही सशक्त व भावनात्मकता से जीवंत बना दिया है। बबलू शेख की भूमिका में प्रतीक शुक्ला ने भी जोरदार अभिनय किया है।

ये फिल्म सच्चाई की हद तक लव जिहाद की सच्चाई सामने लाने की वजह से महीनों तक सेंसर में अटकी रही।

ये फिल्म उन हिंदू लड़कियों की आँखें जरुर खोलेगी जो लव जिहाद में फँस जाती है और बाद में किसी सूटकेस में या किसी नदी, नाले या समुद्र में लाश बनकर अपने घर वालों के लिए एक नासूर बन जाती है।

कुल मिलाकर एक नाज़ुक विषय पर बनी एक सशक्त फिल्म है- द कन्वर्जन। मुद्दा विवादास्पद होने के साथ-साथ समीचीन भी है। फिल्म पर राजनीति होना भी अवश्यम्भावी है।

इस फिल्म को हिंदू परिवारों तक पहुँचाने में हिंदू इको सिस्टम के कपिल मिश्रा ने अलग अलग शहरों में जाकर इस फिल्म के विशेष शो आयोजित करवाकर जो माहौल बनाया है उससे ये फिल्म चर्चा में आ गई है।

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