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सच बोलने की कीमतः हकीकत राय से नुपूर शर्मा तक

नूपुर शर्मा को दी जा रही धमकी न पहली है और ना ही अन्तिम है। यह विश्वव्यापी है। शाश्वत है। अंतहीन है। महाशय राजपाल (रंगीला रसूल के प्रकाशक ) सेम्यूअल पेटी (फ्रांस के शिक्षक) या कमलेश तिवारी जी। शार्ली अब्दो पत्रिका हो या पंडित लेखराम या स्वामी श्रद्धानन्द जी।

आम आदमी पार्टी के नेता अमानुल्ला खान ने 3 अप्रैल 2021 को एक ट्वीट किया था । उस के शब्द हैं, “हमारे नबी की शान में गुस्ताखी हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं, इस नफरती कीड़े की जुबान और गर्दन दोनो काट कर इसे सख़्त से सख़्त सजा देनी चाहिए। लेकिन हिन्दुस्तान का कानून हमें इस की इजाजत नहीं देता, हमें देश के संविधान पर भरोसा है और मैं चाहता हूँ कि दिल्ली पुलिस इस का संज्ञान ले।” उन्होंने किसी का नाम नहीं लिखा, पर उनके ट्वीट के साथ किसी कार्यक्रम की तस्वीर थी। जिस से लगता है कि वे कहीं किसी के द्वारा कही बात पर नाराज थे।

नवम्बर 2020 मे 26/11 आतंकवादी हमले की बरसी के मौके पर कर्नाटक के मेंगलुरु की दीवारों पर भयावह बातें लिखी (ग्राफिटी) हुई थीं। एक बार फिर मेंगलुरु में ठीक इसी तरह की घटना हुई है। जिसमें खुले तौर पर चेतावनी देकर हिंसा और कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस बार तैयार की गई ग्राफिटी में चेतावनी दी गई है कि जो व्यक्ति पैगंबर मोहम्मद के बारे में कुछ भी नकारात्मक कहेगा, उसका सिर शरीर से अलग कर दिया जाएगा।

संयोग की बात है कि ठीक इसी तरह के नारे तब भी लगा जा रहे थे जब पाकिस्तान के लोग फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विरोध में उतरे थे। तहरीक-ए-लब्बैक (TLP) के हज़ारों समर्थक फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विरोध में रावलपिंडी की सड़कों पर उतरे थे। उनका विरोध इस मुद्दे पर था कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाने के अधिकार का बचाव किया था।

पंजाब के सियालकोट में सन् 1719 में जन्में वीर हकीकत राय जन्म से ही कुशाग्र बुद्धि के बालक थे। आप बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के बालक थे। बड़े होने पर आपको उस समय कि परम्परा के अनुसार फारसी पढ़ने के लिये मौलवी के पास मस्जिद में भेजा गया। वहाँ के कुछ शरारती मुसलमान बालकों ने हिन्दू बालकों तथा हिन्दू देवी देवताओं को अपशब्द कहते रहते थे। बालक हकीकत उन सब के कुतर्कों का प्रतिवाद करता और उन मुस्लिम छात्रों को वाद-विवाद में पराजित कर देता।

एक दिन मौलवी की अनुपस्थिति में मुस्लिम छात्रों ने हकीकत राय को खूब मारा पीटा। बाद में मौलवी के आने पर उन्होंने हकीकत की शिकायत कर दी कि उन्होंने मौलवी के यह कहकर कान भर दिए कि इसने बीबी फातिमा को गाली दी है। यह सुनकर मौलवी नाराज हो गया और हकीकत राय को शहर के काजी के सामने प्रस्तुत कर दिया। बालक के परिजनों के द्वारा लाख सही बात बताने के बाद भी काजी ने एक न सुनी और शरीया के अनुसार दो निर्णय सुनाये एक था एक था सजा-ए-मौत है या दूसरा था इस्लाम स्वीकार कर मुसलमान बन जाना ।माता पिता व सगे सम्बन्धियों ने हकीकत को प्राण बचाने के लिए मुसलमान बन जाने को कहा मगर धर्मवीर बालक अपने निश्चय पर अडिग रहा और बसंत पंचमी २० जनवरी सन 1734 को जल्लादों ने 15 वर्ष के निरीह बालक का सर कलम कर दिया। वीर हकीकत राय अपने धर्म और अपने स्वाभिमान के लिए बलिदानी हो गया और जाते जाते इस हिन्दू कौम को अपना सन्देश दे गया। वीर हकीकत कि समाधि उनके बलिदान स्थल पर बनाई गई जिस पर हर वर्ष उनकी स्मृति में मेला लगता रहा।

7 जनवरी, 2015 की सुबह शार्ली एब्दो के दफ्तर में आम दिनों की तरह ही काम चल रहा था. किसी को अंदाजा नहीं था कि क्या होने वाला है. सुबह 11:30 बजे के करीब जेहादियों ने इमारत में प्रवेश किया. सैड और चेरिफ कोची नाम के दो भाई अचानक दफ्तर में घुसकर फायरिंग करने लगे (Charlie Hebdo Controversial Cartoon). इन्होंने पत्रिकार के एडिटर स्टीफन चार्बोनियर, चार कार्टूनिस्ट, दो स्तंभकार, एक कॉपी एडिटर, एक केयरटेकर, एडिटर के अंगरक्षक, एक पुलिस अधिकारी और एक मेहमान की हत्या कर दी. इस घटना के कारण फ्रांस में कई दिनों तक लोग आतंक के खौफ में रहे थे.

कमलेश तिवारी जी के साथ जो हुआ वह सब ज्ञात है। अब केन्द्रीय सत्ता की तुष्टीकरण नीति ने यही नूपुर शर्मा को भी सच का परिणाम भोगने के लिए बेसहारा छोड़ दिया है।

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