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कोटा में बजे खुशियों के ढोल, एक बार फिर ऑफलाइन कोचिंग शुरु होने से व्यापार को मिलेगी गति

कोटा। राज्य सरकार ने प्रदेश में शिक्षण संस्थाओं को खोलने के लिए स्टैंडर्ड प्रोटोकोल ऑफ प्रोसीजर बनाने के लिए कैबिनेट में डिसीजन लिया था। जिसके बाद से ही अब शिक्षण संस्थाओं को खोलने का रास्ता साफ हो गया है। जल्द ही शिक्षण संस्थाओं को खोल दिया जाएगा। जिनमें कोटा के कोचिंग संस्थान भी शामिल है। ऐसे में आज कोटा में हॉस्टल संचालक और अन्य कोचिंग से जुड़े व्यापारियों ने जश्न मनाया। जमकर आतिशबाजी की गई और ढोल नगाड़े बजाकर एक दूसरे को मिठाई भी खिलाई। इस दौरान सभी हॉस्टल संचालकों ने कहा है कि जल्द ही कोटा पहले की तरह आबाद होगा और व्यापार भी उसी गति में बढ़ जाएगा। कोटा हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल ने यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आभार जताया है। नवीन मित्तल ने कहा कि मंत्री धारीवाल नहीं कोटा की जनता के दर्द को समझा और उसे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने उठाया, जिसके बदौलत ही कोटा में कोचिंग संस्थानों को खोलने का निर्णय लिया गया है। हम सब कोटा के हॉस्टल संचालक और व्यापारी बच्चों के स्वागत के लिए तैयार हैं। बच्चे एक बार फिर कोटा आएंगे, जिसके बाद ही डॉक्टर और आईआईटियन बनने का सपना सच करेंगे। इस दौरान पंकज जैन, सुनील कटारिया, जुनैद फारूकी, परविंदर सिंह, रुद्रेश तिवारी, जितेंद्र कश्यप, दिवाकर जैन, हितेश सहित बड़ी संख्या में लोग एकत्रित थे।

जैसे ही ऑफलाइन कोचिंग शुरु होगी। यहां बच्चे बड़ी संख्या में आएंगे और कोचिंग एरिया के व्यापार को राहत मिलेगी। जिसमें फास्ट फूड से लेकर फुटकर व्यापारी भी शामिल है। यहां स्टूडेंट्स व पेरेंट्स लगातार क्वेरीज कर रहे हैं। कोटा तैयार है जो आईआईटीयन या डॉक्टर बनने का सपना लेकर यहां आते हैं, उनके सपने को ऊंचाई देने के लिए तैयार है। कोटा में हर वो सुविधा है जो एक स्टूडेंट को चाहिए। इसकी वजह से अभिभावक भी निश्चिंत होकर यहां छोड़ जाते हैं। क्योंकि सुख-सुविधायुक्त हॉस्टल्स, पीजी, शॉपिंग मॉल, मैस, विभिन्न तरह के रेस्टोरेंट्स, हॉटल की सुविधाएं उपलब्ध है। यहां आने वाले कई स्टूडेंट्स के साथ उनकी माताएं भी रहती है। ऐसे में उनके लिए यहां अपार्टमेंट भी हैं।

कोटा में करीब 3200 से ज्यादा हॉस्टल है, जिनमें लाखों बच्चे रह सकते हैं। यहां पर कोरोना के प्रोटोकॉल की भी पूरी पालना हो सकती है। पहली लहर के बाद में जब संस्थानों को खोला गया था, तब भी इन सभी संचालकों ने अपने हॉस्टलों में आइसोलेशन रूम बनाए हुए थे, इसके अलावा कोचिंग संस्थानों ने खुद की भी गाइडलाइन बना ली थी। जिसके तहत ही बच्चों को पढ़ाया जाने लगा था। हॉस्टल में भी सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर बच्चों को कोरोना वायरस का पूरा प्लान था।
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