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कालेधन पर मोदी सरकार से जनता को जवाब चाहिए

धन्नासेठों की सफाई आ गई है। रियल एस्टेट के भारत के बादशाह डीएलएफ कंपनी के केपी सिंह और इंडियाबुल्स के समीर गहलौत की तरफ से कहा गया है कि विदेश में काले धन को छुपाने को ले कर मीडिया में जो छपा वह सही नहीं है। इन्होंने बाहर पैसा भेजा तो वह नियमानुसार है। डीएलएफ की तरफ से कहा गया कि मीडिया रिपोर्ट सार्वजनिक धारणा को बिगाड़ने की साजिश है। प्रमोटर केपी सिंह और उनके रिश्तेदारों ने भारत सरकार, रिजर्व बैंक, फेमा, आयकर आदि को ब्योरा देते हुए बाहर पैसा भेजा, निवेश किया। ऐसे ही इंडियाबुल्स के समीर गहलौत की तरफ से कहा गया कि उन्हें हर साल 350 से 450 करोड़ रु का मुनाफा होता है और इसे वे परिवार की ट्रस्ट कंपनियों में आगे निवेशित करते हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है। उधर ऐश्वर्या राय के मीडिया सलाहकार ने बताया है कि जो दस्तावेज हैं वे झूठे और फर्जी हैं। अपोलो ग्रुप के ओंकार कंवर, सोली सोराबजी के बेटे डा. सोराबजी ने भी कहा है कि इसमें कोई धांधली नहीं है।

लगभग ऐसी ही प्रतिक्रिया दुनिया के दूसरे देशों में भी पनामा दस्तावेजों के भंडाफोड़ पर आई है। राष्ट्रपति पुतिन से ले कर पाकिस्तान के नवाज शरीफ आदि सभी तरफ से प्रतिवाद है कि यह बदनाम करने की साजिश है। मतलब काले धन के गोरखधंधे का खुलासा फर्जी है। झूठा है और टैक्स हैवन देशों में कंपनी बना कर सेठों का काम करना कानूनसम्मत है!

यदि ऐसा है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली, बाबा रामदेव, गुरुमूर्ति, भाजपा आदि से ले कर इंडियन एक्सप्रेस सहित उन तमाम लोगों को क्या केपी सिंह, समीर गहलौत, अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या बच्चन आदि से माफी नहीं मांगनी चाहिए जिन्होंने पिछले चार सालों में घोट-घोट कर भारत की जनता को बताया था कि दुनिया में ऐसे टैक्स हेवन देश हैं जहां काला धन छुपाते हैं। बहामास, पनामा, वर्जिन आइलैंड, स्विट्जरलैंड आदि के गोपनीय खजानों में भारत का पैसा दबा हुआ है। याद करें संघ-भाजपा की गुरुमूर्ति की बनवाई काले धन की रपट को, कितनी सनसनी तब बनी थी। याद करें बाबा रामदेव के आंदोलन को, पूरा देश कैसे गुस्से में थर्राया था? कैसे लोग रामलीला मैदान में आंदोलन करने पहुंच गए थे? याद करें नरेंद्र मोदी की चुनावी सभाओं के उन भाषणों को जिनमें विदेश में जमा काले धन को लिवा लाने का वे संकल्प बताते थे और लोग तालियां बजाते थे।

अब पनामा दस्तावेजों का पीटारा खुला पड़ा है। टैक्स हैवन देशों में बनी काली कंपनियों, काले धनपतियों का रिकार्ड सामने है पर सफाई आई है कि यह सब तो भारत के कानून अनुसार है। पता नहीं रिजर्व बैंक ने टैक्स हैवन देश में कंपनियां बना कर कारोबार करने की अदानी, केपी सिंह, समीर गहलौत, अमिताभ बच्चन आदि को कब-कैसे अनुमति दी? यदि दी है तो जनता को बताया जाए कि गौतम अदानी के भाई और उनकी कंपनियों के डायरेक्टर को टैक्स हैवन में कंपनी बनाने, पैसा ले जाने की क्या जरूरत थी? यह बताना चाहिए। इसलिए कि यदि नहीं बताया और इसे विभागीय जांच याकि विभिन्न विभागों के एक मल्टी एजेंसी ग्रुप से दस्तावेजों को जंचवाने का काम हुआ तो जनता में धारणा यही बनेगी कि सरकार पर्दा डालने की मुहिम में जुट गई है। इन अरबपतियों के मंत्रियों से रिश्ते प्रभाव दिखाते लगेंगे। लोग और खास कर भारत का आम व्यापारी इस बात को तब जहन में लेगा कि मोदी सरकार एक तरफ देश में काले धन को ले कर आयकर, प्रवर्तन निदेशालय, नए–नए कानूनों से लोगों को कस रही है। देश के सुनारों तक को एक्साइज बिलिंग के फंदे में डाल कर काले धन के खिलाफ कार्रवाई में जकड़ा जा रहा है वही अदानी, केपी सिंह, समीर गहलौत, ओंकार कंवर जैसे अरबपति बहामास-पनामा के काले धन के वैश्विक गोरखधंधे के बावजूद शेर की तरह यदि घूम रहे हैं तो यह मोदी की दाल में काला है। जनता के जहन में अब यही सवाल लगातार उठा रहेगा कि मोदी सरकार विदेशों में जमा काले धन के इतने बड़े वैश्विक खुलासे के बाद क्या करती है।

इस मामले की गंभीरता को भारत के छोटे-मोटे व्यापारियों के आज के हालात में समझना चाहिए। भारत में इस समय प्रोपर्टी, रियल एस्टेट और सर्राफे का व्यापारी सर्वाधिक परेशान है। मोदी सरकार ने काले धन के खिलाफ कार्रवाई में अपने जो नए नियम, कायदे बनाए हैं उससे इन दो धंधों का व्यापारी अपने पर तलवार लटका महसूस कर रहा है। प्रोपर्टी और रियल एस्टेट का धंधा काले धन के पाइप के सूखने से ठप्प है। जाहिर है मोदी सरकार ने काले धन की आर्थिकी को खत्म कराने के चौतरफा फैसले किए हैं। वित्त मंत्रालय ने अपनी अफसरशाही को चौतरफा व्यापारियों की और मोड़ा है या मोड़ने का इंफ्रास्ट्रक्चर बना दिया है। तभी भारत के दायरे में काम करने वाला व्यापारी, उद्यमी त्राहीमाम किए हुए है।
जब ऐसा है तो अब विदेश में कालेधन को छुपा कर खेल खेलने वाले महाबली अरबपतियों जैसे अदानी, केपी सिंह, समीर गहलौत, ओंकार कंवर का जो राज खुला है क्या वह इस सफाई के साथ खत्म किया जा सकता है कि इन्होंने जो किया है वह नियमानुसार है? वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सब समान हैं कोई पवित्र गाय नहीं है। पर क्या सचमुच अदानी, केपी सिंह, समीर गहलौत, अमिताभ बच्चन, डा. सोराबजी और टैक्स हैवन से आगे और आने वाले नामों की भारत में संपतियों को जप्त करने के लिए क्या ईडी को दौड़ाया जाएगा?

वक्त जवाब देगा और जनता गौर से देखेगी!

साभार- http://www.nayaindia.com/से

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