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जब एक घायल नील गाय ने खोली सरकारी तंत्र की पोल….

1 अक्टूबर को मैं अमिताभ पार्क के मैदान (सेक्टर 15 ए, नोएडा) में खेलने गया तो देखा कि एक नील गाय वहाँ घायल पड़ी है। उसकी टाँगे टूटी हुई थी और पता चला कि वो दो दिन से वहाँ ऐसे ही पड़ी थी। मैं और मेरे साथी तत्काल हरकत में आए और हम संबंधित अधिकारियों और विभागों से संपर्क करने की कोशिश करने लगे। सबसे पहले हमने पुलिस को फोन लगाया और कई पशुओं के संरक्षण के लिए काम करने वाले एनजीओ से लेकर गौरक्षा विभाग, एससीपीए और तमाम विभागों से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन किसी ने हमारी बात ही नहीं सुनी।

इसके बाद हमने जैसे तैसे एसडीओ, एसडीएम,वाईल्ड लाईफ एसओएस और वाईल्ड लाईफ ट्रस्ट सं संपर्क किया। हम दोपहर तीन बजे से ये कवायद करते रहे और हमे इन लोगों से संपर्क करते करते 9 बज गए। हैरानी की बात है कि वाईल्ड लाईफ एसओएस ने यह कहकर हमें टरका दिया कि उनके पास जाल की व्यवस्था नहीं है, लेकिन जब हम लोगों ने दबाव बनाते हुए कहा कि हम मीडिया को बुला लेंगे तो वे अपनी टीम भेजने को राजी हुए। ये सब होते होते रात के पौने 11 बज गए। इसी बीच नोएडा के वन विभाग और बर्ड सेंक्चुरी की टीम रात 9 बजे वहाँ पहुँच गई मगर उनके पास घायल नील गाय को ले जाने के लिए कोई वाहन ही नहीं था। इसी बीच हमने वाईल्ड लाईफ ट्रस्ट इंडिया सं संपर्क किया। रात 10 बजे उनकी टीम डॉक्टर के साथ वहाँ आई। नील गाय बुरी तरह घायल थी उसकी एक टाँग में हल्का और दूसरी में गंभीर फ्रैक्चर था। वाईल्ड लाईफ की टीम ने उसके इलाज का काम शुरु किया। टीम ने घायल नील गाय को बेहोश किया ताकि उसका सही तरीके से इलाज कर सके। इसके बाद इस टीम ने नेट में डालकर नील गाय को एक कार में लाद दिया और जिस कार में उसे लादा था उसकी साईज़ नील गाय से बहुत छोटी थी। इस तरह हम सब लोगों को रात के साढ़े 12 बज गए।

इसके बाद मैने और मेरे मित्र अमित भारद्वाज, रोशन आरके, विकास झा, मोहित, कुलदीप शर्मा पार्क से चले गए, अगले दिन सुबह हमें क्रिकेट मैंच खेलना था। लेकिन हमने ये सोचकर राहत महसूस की कि हमने एक बेजुबान जानवर की जान बचाई। वाईल्ड लाईफ की टीम ने हमसे इस मामले में पूरा फीडबैक भी लिया।

दूसरे दिन 2 अक्टूबर की शाम को मुझे वाईल्ड लाईफ एसओएससे एक फोन आया और बताया गया कि वह नील गाय अब जीवित नहीं बची है। हमें ये जानकर गहरा धक्का लगा कि जिस जानवर को बचाने के लिए हमने इतनी कोशिश की उसका कोई नतीजा नहीं निकला।

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फिर भी हमें लगता है कि हमारी कोशिशों में कहीं चूक हो गई, लेकिन हमने ये तो कल्पना ही नहीं की थी कि वह नील गाय नहीं बचेगी,अगर हम 5-7 घंटे पहले उसकी मदद कर पाते तो उसकी जान बच सकती थी। वाईल्ड लाईफ की टीम द्वारा नील गाय को उठाकर ले जाने के बाद हमने मेनका गाँधी को भी ट्वीट कर इस मामले की जानकारी दी मगर उनकी ओर से भी कोई जवाब नहीं आया।

इस घटना से हमने यही सबक सिखा है कि आम आदमी को अपने स्तर पर अपना काम पूरी ईमानदारी से करना चाहिए और किसी भी समस्या या लापरवाही के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करना चाहिए। हमें किसी की मदद करने में कभी कोई कोताई नहीं बरतना चाहिए। हमारी इस कोशिश में कई लोग हमारे साथ जुड़े और हमारी मदद के लिए आगे आए, जिनमें एससीपीए की अनुराधा की महत्वपूर्ण भूमिका रही जो मेरे फेसबुक पेज पर इस घटना की जानकारी व फोटो पोस्ट करने के बाद मुझे संबंधित विभागों व संस्थाओं के लोगों के नंबर देती रही।

अगर जिम्मेदार अधिकारी और विभाग लापरवाही दिखाएँ तो हम आम लोगों को अपनी जिम्मेदारी से नहीं भागना चाहिए। इस घटना से हमें यही सबक मिला है कि हमें अपने कर्तव्य को समझते पर्यावरण,पशुओं और हर जरुरतमंद की मदद के लिए आगे आना चाहिए।

आप सभी से निवेदन है कि ये संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाईये……

सधन्यवाद

अभिषेक श्रीवास्तव

नोएडा (उ.प्र)



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