आप यहाँ है :

इस महिला आरपीएफ अधिकारी ने आखिर उस बच्चे के घरवालों को खोज निकाला

मुंबई। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स की महिला अधिकारी विनीता शुक्ला को दादर के फुट ओवर ब्रिज की सीढ़ियों पर 17 साल का एक लड़का मिला। वह अकेले सीढ़ियों पर उदास बैठा था। विनीता उससे सिर्फ यह पता कर सकी कि वह बिहार का रहने वाला है। इसके अलावा उस लड़के के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। आमतौर पर जो बच्चे अपने माता-पिता के बारे में जानकारी नहीं दे पाते हैं, उन्हें चिल्ड्रेन शेल्टर होम भेज दिया जाता है।

विनीता ने भी यही किया, लेकिन उस बच्चे के चेहरे पर दहशत के भाव थे। यह देखकर उन्होंने बच्चे को उसके माता-पिता से मिलवाने का फैसला किया। उन्होंने बिहार के एक स्थानीय पुलिस स्टेशन का नंबर पता किया और इसके एक महीने बाद वह बच्चा अपने परिजनों से मिल सका। वह 15 अगस्त को घर से निकला था। इसी तरह के एक अन्य मामले में भी विनीता ने पश्चिम बंगाल की रहने वाली नाबालिग लड़कियों को उनके परिजनों से मिलवा चुकी हैं।

विनीता ने बताया कि बिहार के रहने वाले उस 17 साल के लड़के को लर्निंग डिसएबिलिटी की शिकायत है। वह चचेरे भाई से लड़ाई होने के बाद घर से चला गया था। वह 27 अगस्त को दादर स्टेशन में मिला था। उस वक्त वह कांप रहा था और उसने आठ दिनों से खाना भी नहीं खाया था। हेड कॉन्सटेबल ने उसे अपने टिफिन से भोजन करवाया। जब आरपीएफ उसके परिजनों का पता नहीं कर सकी, तो बच्चे को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने पेश कर दिया गया और वहां से उसे शेल्टर होम भेज दिया गया।

विनीता ने कहा कि यह बात मुझे खाए जा रही थी कि मैं उसके परिजनों की तलाश नहीं कर पा रही हूं। फिर मुझे याद आया कि बातचीत में उसने मुझसे आरा की बात की थी, जो बिहार का एक शहर है। इसके बाद उन्होंने आरा के किसी भी पुलिस थाने का नंबर तलाश करने के लिए इंटरनेट की मदद ली। इस दौरान उन्हें एक आईपीएस अधिकारी का नंबर मिला और विनीता ने बच्चे की पूरी कहानी उन्हें बताई।

इसके बाद अधिकारी ने कहा कि वह एक इंस्पेक्टर को उनसे संपर्क करने के लिए कहेंगे। इसके बाद बिहार के एक इंस्पेक्टर ने विनीता को फोन किया और विनीता ने व्हाट्सएप पर उस लड़के की फोटो भेज दी। इस पर इंस्पेक्टर ने तस्दीक कर दी कि यह लड़का आरा के पास जगदीशपुर से लापता है और उसके परिजन उसकी तलाश कर रहे हैं।

हालांकि, समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। बच्चे के माता-पिता का पता चलने के बाद नई परेशानी थी कि वे बेहद गरीब थे और मुंबई तक आने का किराया भी उनके पास नहीं था। तब विनीता ने सरपंच से कहा कि वह गांव के लोगों से पैसे जमा कराएं। इसके बाद बच्चे के परिजन 14 सितंबर को मुंबई पहुंचे, लेकिन उस दिन शुक्रवार होने की वजह से शेल्टर होम बंद था और परिजनों के पास ठहरने की कोई जगह नहीं थी। तब आरपीएफ ने उन लोगों के ठहरने की व्यवस्था कराई और उन्हें खाना व पैसे भी दिए। 17 सितंबर को जब बच्चे के परिजनों ने उसे देखा, तो वे भावुक हो गए। विनीता की इस काम से भावुक परिजन रोते हुए उनके पैरों पर गिर गए। बाद में उन्हें घर वापस भेजने के लिए भी विनीता ने मदद की।



Leave a Reply
 

Your email address will not be published. Required fields are marked (*)

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

सम्बंधित लेख
 

Back to Top