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एकजुट होकर विरोध करें हिंदी की दुर्गति करने वालों का

इंदौर। हिंदी साहित्य समिति में अमूमन होने वाले उबाऊ आयोजनों के मुकाबले शुक्रवार शाम हुआ कार्यक्रम रोचक रहा। दो दिनी समिति शताब्दी सम्मान समारोह के पहले दिन ‘पत्रकारिता : भाषा के आयाम” विषय पर वक्ताओं ने जहां पूरी गंभीरता से खरी-खरी कहने का साहस दिखाया, तो श्रोताओं ने भी उनके संदेश को सहजता से आत्मसात किया। दोनों पक्षों की मिली-जुली राय रही कि हिंदी की दुर्गति करने वालों का एकजुट होकर विरोध करने का समय आ गया है।

समिति के प्रधानमंत्री प्रो. सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी, सूर्यकांत नागर, सुशील दोषी, संजय पटेल और जयदीप कर्णिक जैसे वक्ताओं ने माना कि हिंदी ज्ञान का स्तर दिनों-दिन निम्न हो रहा है। हमारे युवा न तो शुद्ध हिंदी लिख पाते हैं न ही बोल पाते हैं। उन्हें न तो हिंदी व्याकरण का ज्ञान है और न ही वे नए शब्दों को जानना-समझना चाहते हैं। इसके लिए दोषी वे लोग हैं जो हिंदी के साथ अंग्रेजी का अनावश्यक घालमेल करते हैं।

हिंदी के ‘उद्यमी” जैसे सरल शब्दों की बजाय अंग्रेजी के भारी भरकम शब्दों को लिखकर खुद को आधुनिक कहलाने का प्रयास कर रहे व्यक्तियों और संस्थाओं का सामूहिक बहिष्कार अनिवार्य हो गया है। अन्यथा हम प्रलाप करते रह जाएंगे और लोग हिंदी की चिंदी-चिंदी बिखेरते जाएंगे। आज समाज पर अंग्रेजी इस कदर हावी हो गई है कि हमारे युवा अंग्रेजी में ही सोचने लगे हैं। जब तक वे हिंदी में सोचना नहीं शुरू करेंगे स्थिति में सुधार कठिन है।

याद किया ‘नईदुनिया’ का योगदान

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने हिंदी के संवर्धन में ‘नईदुनिया” के योगदान को बार-बार याद किया। इस मौके पर वरिष्ठ लेखक, आलोचक विजय बहादुर सिंह, चंद्रसेन विराट, राजकुमार कुंभज, प्रदीप नवीन, सदाशिव कौतुक, डॉ. जवाहर चौधरी, अरविंद जवलेकर, अरविंद ओझा समेत अनेक साहित्यकार और गणमान्यजन उपस्थित थे। संचालन राकेश शर्मा ने किया। आभार हरेराम बाजपेई ने माना। इस मौके पर सुशील दोषी, अजय सोडानी और विनय खेलावत को हिंदी सेवा सम्मान प्रदान किया गया।

साभार- http://naidunia.jagran.com/

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