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निजाम के जमादार को एक ही झटके में ढेर कर दिया वीरांगना सोनूबाई ने

भारातीय महिलायें वीर प्रस्विनी महिलायें होने का विश्व भर में गौरव रखती हैं|इन्होने देश के संकट के समय जहां देश पर प्राण न्योछावर करने वाले वीरों को जन्म दिया वहां स्वयं भी स्वेच्छा से केसरिया बाना सजाये, हाथ में तलवार, भाला अथवा पिस्तौल लेकर रणभूमि में शत्रु के दांत खूब खट्टे किये| ऐसी ही देशभक्त महिलाओं में हमने जिस प्रकार त्रिवेणी बाई के बलिदान की कथा की चर्चा की थी, उस प्रकार ही वीरांगना सोनुबाई की की बलिदान गाथा भी अपने बलिदान के लिए अत्यधिक महत्त्व रखती है| सोनूबाई क त्याग, ताप और बलिदान त्रिवेणी बाई के अधिक अन्हीं तो समकक्ष अवश्य है| आओ हम सब वीर माता सोनुबाई की इस वीर कथा का भी कुछ अवलोकन करें|

सोनूबाई के जीवन में परमपिता परमात्मा ने एक भयंकर दोष दिया था और वह दोष यह कि वह अत्यंत रुपवती थी| अत्यंत रूपवती होने के कारण वह हैदराबा रियासत के गुन्जोटी की पुलिस के मुस्लिम जमादार की आँखों में चढ़ चुकी थी| फिर क्या था कि इस रूपवती आर्य्महिला को अपना बनाने के वह नित्य सपने देखने लगा| इस के लिए वह अनेक विधियों की खोज में रहने लगा| जमादार की इस बुरी द्दृष्टि का सोनुबाई को भीपुरा ज्ञान हो चुका था| इस कारण सोनुबाई सदा ही इस मुस्लिम जमादार के भय से व्याकुल रहती थी| हैदराबाद के मुस्लिम निजाम की इस मुस्लिम पुलिस के इस मुस्लिम जमादार की कुद्द्रिष्टि से स्वयं को बचाते हुए उसने एक कठोर प्रतिज्ञा ले ली| उसकी यह प्रतिज्ञा थी कि वह इस मुलिम पुलिस के मुस्लिम जमादार को अवसर आने पर पाठ अवश्य पढ़ाएगी| अब उसने इस जमादार पर को अपने प्रेमजाल में फंसाने का कार्य आरम्भ किया| यह सब उसने अपनी योजना के अनुसार किया और यह योजना उस समय सफलाता की और बढ़ने लगी जब जमादार यह मान बैठा कि अब उसका शिकार उसके जाल में फंसने ही वाला है| इसके लिए वह जल्दी करने के लिए नित्य तड़प रहा था तो सोनूबाई उसकी जीवन लीला समाप्त करने की अपनी योजना पर अटल थी|

अब सोनूबाई ने अपनी यह सब योजना गाव के युवकों के सामने विस्तार से रख दी| गाव के कुछ युवकों ने भी उसकी इस योजना में यदि आवश्यक हुआ तो सहयोग का वादा किया| जब जमादार को सोनूबाई पर पूरा विशवास हो गया तो एक दिन वह उसके पास आ गया| ज्यों ही निजाम का यह जमादार सोनुबाई के निकट आया, सोनूबाई ने तत्काल बड़ी फुर्ती से कोयत को उठाया और इस कोयते से जमादार पर एसा भीषण वार किया कि उसके मात्र एक ही वार से यह दुर्दांत पुलिस का दुर्दांत जामादार ढेर हो गया| इस प्रकार वीरता की इस देवी ने अपने शौर्य, अपने पराक्रम तथा अपनी वीरतापूर्ण सूझ बुझ के कारण अत्यधि निर्बल होते हुए भी शत्रु को धराशायी कर अपने सतीत्व की रक्षा की|

डा. अशोक आर्य
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२०१०१२ गाजियाबाद उ.प्र.भारात
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