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हिन्दी में वैश्विक भाषा बनने की क्षमता – डाक निदेशक केके यादव

जोधपुर। सृजन एवं अभिव्यक्ति की दृष्टि से हिंदी दुनिया की अग्रणी भाषाओं में से एक है। हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं बल्कि हम सबकी पहचान है, यह हर हिंदुस्तानी का हृदय है। हिन्दी को राष्ट्रभाषा किसी सत्ता ने नहीं बनाया, बल्कि भारतीय भाषाओं और बोलियों के बीच संपर्क भाषा के रूप में जनता ने इसे चुना। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं एवं साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव ने पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय में 14 सितंबर को आयोजित हिन्दी दिवस और पखवाड़ा का शुभारंभ करते हुये कहीं।

निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता है। जैसे-जैसे विश्व में भारत के प्रति दिलचस्पी बढ़ रही है, वैसे-वैसे हिन्दी के प्रति भी रुझान बढ़ रहा है। आज परिवर्तन और विकास की भाषा के रूप में हिन्दी के महत्व को नये सिरे से रेखांकित किया जा रहा है। हिन्दी आज सिर्फ साहित्य और बोलचाल की ही भाषा नहीं, बल्कि विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर संचार-क्रांति और सूचना-प्रौद्योगिकी से लेकर व्यापार की भाषा भी बनने की ओर अग्रसर है। श्री यादव ने कहा कि एक लंबे समय तक हिन्दी के अखबारों, पत्रिकाओं, रेडियो, टीवी और सिनेमा ने हिन्दी के प्रसार में अहम भूमिका निभाई, वहीं इण्टरनेट के विस्तार और वर्ष 2007 में यूनिकोड फॉण्ट आने के बाद हिन्दी और भी समृद्ध हुई । डिजिटल क्रान्ति के इस युग में वेबसाइट्स, ब्लॉग और फेसबुक व टविटर जैसे सोशल मीडिया ने तो हिन्दी का दायरा और भी बढ़ा दिया है।

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में हिन्दी की गणना हो रही है। दुनिया में चीन की मंदारिन भाषा के बाद हिन्दी बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक है। विश्व भर में हिन्दी बोलने वाले 50 करोड़ तो इसे समझने वालों की संख्या 80 करोड़ है। विश्व के लगभग 150 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है, जो कि हिन्दी की बढ़ती लोकप्रियता का परिचायक है। वैश्वीकरण के इस दौर में आर्थिक उदारीकरण ने हिन्दी को और बढ़ावा दिया क्योंकि बाजार को लोगों तक पहुँच स्थापित करने के लिए उनकी भाषा में ही संवाद करना होता है।

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सहायक निदेशक (राजभाषा) इशरा राम ने इस अवसर पर हिंदी पखवाड़ा के दौरान डाक विभाग द्वारा मनाये जाने वाले कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से बताते हुए ज्यादा से ज्यादा लोगों से भागीदारी की अपील की। सहायक निदेशक कान सिंह राजपुरोहित ने कहा कि 14 सितंबर, 1949 को ही संवैधानिक रूप से हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया था। संविधान के अनुच्छेद 343 में यह प्रावधान किया गया है कि देवनागरी लिपि के साथ हिन्दी भारत की राजभाषा होगी। वरिष्ठ लेखा अधिकारी एम्. जे. व्यास ने कहा कि हिंदी पूरे देश को जोड़ने वाली भाषा है और सरकारी कामकाज में भी इसे बहुतायत में अपनाया जाना चाहिये।

कार्यक्रम में सहायक अधीक्षक बी. आर. राठौड़, पुखराज राठौड़, अनिल कौशिक, जमुना देवी, रमेश गुर्जर, ओपी चांदोरा सहित तमाम विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डाक निरीक्षक सुदर्शन सामरिया और आभार ज्ञापन सहायक डाक अधीक्षक राजेंद्र सिंह भाटी द्वारा किया गया।

(इशरा राम)
सहायक निदेशक (राजभाषा)
कार्यालय-पोस्टमास्टर जनरल
राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर -342001



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