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भारत में अखबारों और न्यूज़ चैनलों की विश्वसनीयता तेजी से गिरी

सोशल मीडिया के दौर में क्या न्यूज़ चैनल्स और अख़बारों की विश्वसनीयता कम होती जा रही है? रॉयटर्स जर्नलिज्म इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित ‘इंडिया डिजिटल न्यूज़ 2019’ की सर्वे रिपोर्ट सामने आने के बाद यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है। रिपोर्ट में कई ऐसी बातें हैं, जो दर्शाती हैं कि आम जनता ऑनलाइन न्यूज़ खासकर सोशल मीडिया को ख़बरों का प्राथमिक स्रोत मानती है।

इसके अलावा रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि लोग फर्जी न्यूज़ और पत्रकारिता के घटते स्तर को लेकर चिंतित हैं। साथ ही उनका यह भी मानना है कि मौजूदा परिवेश में राजनीतिक टीका-टिप्पणी उनके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अधिकांश भारतीय ख़बरों तक पहुंचने के लिए टीवी आदि के बजाय मोबाइल इस्तेमाल करते हैं। सर्वे में शामिल 68 प्रतिशत लोगों ने कहा कि न्यूज़ के लिए स्मार्टफ़ोन उनकी प्राथमिक डिवाइस है।

रॉयटर्स ने इस सर्वे को ‘द हिंदू’, ‘इंडियन एक्सप्रेस’,‘द क्विंट’ और ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया’ के सहयोग से पूरा किया है। इसकी रिपोर्ट 25 मार्च को सार्वजनिक की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 35 वर्ष से कम आयुवर्ग के लोग ऑनलाइन खासकर सोशल मीडिया पर मिलने वालीं ख़बरों पर सबसे ज्यादा 56 प्रतिशत, प्रिंट और टीवी की ख़बरों पर क्रमश: 15 एवं 26 प्रतिशित भरोसा करते हैं। इसी तरह 35 वर्ष से ऊपर वालों की नज़र में भी ऑनलाइन प्रिंट और टीवी न्यूज़ के प्राइमरी सोर्स नहीं हैं। वे ऑनलाइन कंटेंट पर 38 प्रतिशत, प्रिंट पर 27 प्रतिशत और टीवी पर 34 फीसदी भरोसा करते हैं।

सर्वे में शामिल अधिकांश लोगों ने माना कि समग्र रूप से उनका समाचारों में विश्वास घटा है। 39 प्रतिशत ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से जो न्यूज़ इस्तेमाल करते हैं, उसमें भी उन्हें ज्यादा विश्वास नहीं होता। रॉयटर्स के मुताबिक घटते विश्वास का यह आंकड़ा कई अन्य देशों के मुकाबले काफी ज्यादा है, जो निश्चित रूप से चिंता का विषय है। हालांकि, 45 प्रतिशत लोगों ने यह ज़रूर कहा कि उन्हें सर्च के माध्यम से प्राप्त होनी वालीं ख़बरों पर अपेक्षाकृत ज्यादा विश्वास होता है, इसी तरह न्यूज़ के मामले में सोशल मीडिया पर 34 प्रतिशत ने भरोसा जताया।

सर्वे में शामिल लोगों से एक ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी भरवाई गई, जिसके आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई। प्रश्नोत्तरी में लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भी कुछ प्रश्न रखे गए, जिसके जवाब में 49 फीसदी ने कहा कि राजनीतिक विचारों को व्यक्त करने से दोस्त, परिवार और जान-पहचान वालों के बीच उनकी छवि प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा वह इस बात को लेकर भी चिंतित दिखे कि ऐसी सूरत में उन्हें प्रशानिक स्तर पर भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यानी सीधे शब्दों में कहें तो लोग अपने विचारों को खुलकर व्यक्त करने में असहज महसूस करते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर ने भी इन आंकड़ों को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर करते हुए चिंता ज़ाहिर की है। उन्होंने लिखा है कि यह बेहद खौफनाक है कि ख़बरों के प्रत्येक स्रोत में लोगों का विश्वास घट रहा है।

पूरी रिपोर्ट आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं-

https://reutersinstitute.politics.ox.ac.uk/sites/default/files/2019-03/Reuters_Institute_press_release_India_Digital_News_Report_embargoed_25.03.19_00.01_IST_0.pdf

साभार- http://www.samachar4media.com से

कार्टून साभार- http://www.amulyam.in/ और बीबीसी से



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