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‘द रिसॉर्ट’ ने की बच्चों को प्रकृति से जोड़ने की अभिनव पहल

मुम्बई । मुम्बई के मढ-मार्वे स्थित दि रिसॉर्ट की ओर से बच्चों में प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और उनका महत्त्व समझाने हेतु एक उपक्रम का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम के माध्यम से इस धरातल पर घटतें पाकृतिक संसाधनों का बचाव किस तरह किया जा सकता है यह सिखाकर बच्चों को पर्यावरण चैम्पियन मॉडल बनाने का प्रयास किया जाएगा. बच्चों को अपनें आसपास के प्राकृतिक आश्चर्यों को देखने का मौका मिलेगा. इस अनोखे उपक्रम के आयोजन को दि रिसॉर्ट बढावा दे रहा है.

लगातार बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर भविष्य की पीढ़ियों पर खतरे के बादल मंडरा रहें है। कई बार प्राकृतिक संसाधनों की किल्लत दिखाई देती है तो दूसरी ओर बच्चे घर के अंदर ही रहना पसंद करते हैं. इसलिए इस पीढ़ी और अगली पीढ़ियों के लिए वसुंधरा की रक्षा करने का महत्त्व जानना जरूरी हो गया है. इस समस्या के मद्देनजर दि रिसॉर्ट ने एक आकर्षक और अगली पीढ़ी को जोड़नें वाले कार्यक्रम की शुरूआत की है, ‍ जिस से श्रम के महत्एव को समझने के लिए विशेष प्रयास किए है. इस उपक्रम के तहत बच्चों को प्रकृति का महत्त्व जाननें हेतु कुछ अनोखे उपक्रम शुरू किए जा रहें है , जिनके तहत बच्चे प्रकृति के साथ संवाद स्थापित कर सकें।

इस उपक्रम की शुरूआत २२ अप्रैल को विश्व वसुंधरा दिवस के उपलक्ष्य में की गई थी. इस वर्ष का वैश्विक विषय ‘ इट्स अवर टर्न टू लीड’ था. इस विषय के अनुसार बच्चों को छ: महिनों में आनेंवाली सब्जियों को किस तरह से उगाया जाता है इस का प्रशिक्षण दिया गया. इस उपक्रम के तहत बच्चों को छोटे जमीन का एक टुकडा दिया गया जहां छ: से पंद्रह साल की उम्र के २५ बच्चों को साथ लाकर उन्हें उनकी चहेती सब्जियों को लगाने का मौका दिया गया. इन में खीरा, भिंडी, टमाटर और कद्दू जैसी सब्जियों का समावेश था. बच्चों को पर्यावरण विशेषज्ञ श्री हेमंत धावडे ने प्रशिक्षण दिया. श्री.धावडे के पास कृषि क्षेत्र का १० से अधिक सालों का अनुभव है.

“बच्चें हमारा कल है और उनका समावेश करनें की हमारी योजना रहीं है.” दि रिसॉर्ट मुम्बई के जनरल मैनेजर श्री सत्यजित कोतवाल नें कहा “ बच्चों को खेती की कुशलता सिखाने का बड़ा लाभ सिखा नें से उन्हें काफी कुछ सिखनें का मौका मिलता है. इन कुशलताओं को प्राप्त करनें से उनके आत्मविश्वास में बढोत्तरी होनें लगती है. इस क्षेत्र का अनुभव प्राप्त किए श्री धावडे नें हमारे साथ मिलकर बच्चों को मार्गदर्शन किया इस की हमें खुशी है.”

छ: महीनों तक चलनेंवाले इस उपक्रम में कई बच्चे इक्ठ्ठा हुए और उन्होंने सब्जियां उगाई. इस विशेष कार्यक्रम के दौरान हमारें मास्टरशेफ ने उन्हें इन सब्जियों को पकाकर अच्छे व्यंजन खिलाए. जिस से बच्चों को घर का व्यवस्थापन करनें की कला भी सीखी। “

खाद्य की कीमते बढ़ रहीं है तथा उनकी उपलब्धता भी कम होती दिख रहीं है. भविष्य के नागरिकों ने अब आगे आकर यह कहना जरूरी हो गया है की हमें थोडी जमीन और पानीं दे जिस से हम सारी वसुंधरा को भोजन दे सकेंगे.

१६ अक्टूबर के दिन विश्व अन्न दिवस का आयोजन किया जाता है. इस के तहत लोगों में विश्व के भुख की समस्या का निराकरण करनें पर जोर दिया जाता है. १९४८ मे युनाईटेड नेशन्स द्वारा फूड एन्ड एग्रीकल्चर ऑर्गनाईजेशन की स्थापना के उपलक्ष्य में इस दिवस का आयोजन किया जाता है.

BHUSHAN MULAYE

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