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रामपुर की कोठी में दफन करोड़ों अरबों के खजाने का राजं अब खुलेगा

रामपुर। यूपी का जिला रामपुर एक बार फिर चर्चा में है। इस बार समाजवादी पार्टी (एसपी) सांसद आजम खान की वजह से नहीं बल्कि यहां के नवाब को लेकर। हाल ही में नवाबों की रामपुर रियासत के आखिरी शासक रजा अली खां की अरबों रुपये की संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया शुरू हुई है जिसकी चर्चा देश-दुनिया में है। तिजोली, मालखाने और शस्त्रागार खोले जा रहे हैं और पिछले महीने से खजाने का सर्वे शुरू हुआ है। यह सब कुछ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कैमरे की नजर में हो रहा है। हालांकि बंटवारे से पहले ही विवाद सामने आया है। इस संपत्ति में बंटवारे और हक के लिए बहस छिड़ी हुई है और आए दिन नए दावेदार सामने आ रहे हैं।

कौन थे रामपुर के नवाब रजा अली खां?
सबसे पहले बात नवाब रजा अली खां की, वह रामपुर की रियासत के आखिरी नवाब थे। उनकी पहचान एक सहिष्णु और प्रगतिशील शासक के रूप में थी। उन्होंने अपनी सरकार में कई हिंदुओं को शामिल किया था जिनमें उनके प्रधानमंत्री लेफ्टिनेंट कर्नल होरीलाल वर्मा भी शामिल थे। 1947 में बंटवारे के बाद रामपुर भारत का हिस्सा रहा और 1950 में उत्तर प्रदेश के गठन के बाद इसमें शामिल हो गया। रजा अली खां की मौत 1966 में 57 साल की उम्र में हुई उन्हें अपने पिता की तरह इराक के कर्बला में दफनाया गया था। उसके बाद उनकी संपत्ति के हकदार उनके बड़े बेटे मुर्तजा अली खान बने।

अरबों की संपत्ति में क्या-क्या?
नवाब के पास हथियारों, हीरे-जवाहरात के अलावा इंपोर्टेड कारों का काफिला भी था। नवाब के पास कई बेशकीमती कारें थीं, लेकिन कोर्ट को मिली सूची के अनुसार इनकी संख्या 16 बताई गई। बताया जाता है कि जब नवाब इन कारों से चलते थे तो शहर में पानी से छिड़काव किया जाता था। वहीं सर्वे के दौरान बेशकीमती हथियार सामने आए हैं जिनकी संख्या एक हजार बताई जा रही है। इसके अलावा कोठी के स्ट्रॉन्गरूम में एक जमाने में स्‍ट्रांगरूम में 60 किलो सोना, हीरे के ताज, सोने-चांदी के बर्तन, सोने के अलम और कई बेशकीमती धरोहरें होने का दावा है जिनका अभी सर्वे होना बाकी है।

राजपरंपरा नहीं शरीयत के हिसाब से संपत्ति का बंटवारा
बता दें कि नवाब रजा अली खां की संपत्ति को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 16 हिस्सों में बांटा जाना है। नवाब की अरबों रुपये की संपत्ति को लेकर लंबे समय से मुकदमेबाजी चल रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने 6 महीने से पहले शरीयत के हिसाब से बंटवारे के आदेश दिए। बंटवारे की जिम्मेदारी जिला जज को सौंपी गई है। इसके लिए ऐडवोकेट कमिश्नर नियुक्त हुए हैं।

क्या है पूरा विवाद?
रामपुर के नवाब खानदान की अरबों रुपये की जायदाद के बंटवारे को लेकर 1972 से मुकदमेबाजी चल रही है। सबसे पहले केस जिला कोर्ट में दाखिल हुआ, इसके बाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला काफी अहम माना गया जो देशभर के राजपरिवारों के लिए नजीर साबित हुआ।

राजपरंपरा के अनुसार, नवाब का बड़ा बेटा ही संपत्ति का हकदार होता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रामपुर के नवाब खानदान की संपत्ति का बंटवारा शरीयत से हिसाब से करने के आदेश दिए। रामपुर में आखिरी नवाब रजा अली खां का राज 1949 तक रहा। 1966 में उनकी मौत के बाद सारी संपत्ति उनके बड़े बेटे नवाब मुर्तजा अली को मिल गई। इसके विरोध में परिवार के दूसरे सदस्यों ने मुकदमा दायर कर दिया। तभी से मामला कोर्ट में है।

तब तक मुर्तजा अली खां के बेटे मुराद मियां और बेटी निकहत आब्दी ही सारी संपत्ति पर काबिज रहीं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के 16 हिस्सों में जायदाद बांटने के फैसले के बाद उनके हाथ से सबकुछ निकलता जा रहा है।

बेटियों को भी मिलेगा संपत्ति में हक
नवाब रजा अली खां के तीन बेटे और पांच बेटियां थीं। तीनों बेटों की मौत हो चुकी हैं। संपत्ति के हकदार नवाब के सबसे बड़े बेटे नवाब मुर्तजा अली के बेटे मुराद मियां और बेटी निकहत आबदी भी हिस्सेदार हैं। दूसरे बेटे जुल्फिकार अली खां की पत्नी और पूर्व सांसद बेगम नूरबानो, बेटे पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां, बेटी समन और सबा शामिल हैं। तीसरे बेटे आबिद अली खान की पत्नी गिसेला लेस्चबोर और उनके दो बेटे भी इसके हिस्सेदार हैं। नवाब की पांच बेटियां भी इस संपत्ति में हिस्सेदार हैं जिनमें एक की मौत के बारामपुर के नवाब, खजाने की कहानी और क्या है विवाद, संपत्ति का सर्वे चल रहा है पिछले महीने सेद उनके दो बेटों को संपत्ति की हिस्सेदारी मिलेगी। नवाब खानदान के पास 1073 एकड़ जमीन भी है।

कोठी खासबाग की आर्मरी से निकला हथियारों का जखीरा
नवाब खानदान की आर्मरी खुली तो हथियारों का जखीरा सामने आया। कई को जंग लग चुकी है लेकिन अहमियत काफी है। इन हथियारों का भी बंटवारा होना है लेकिन सरकारी नियमों के अनुसार, कोई भी दो से अधिक हथियार नहीं रख सकेगा। ऐसे में बाकी हथियारों की बिक्री तय मानी जा रही है।

नवाब खानदान की कोठी खासबाग में एक स्ट्रॉन्ग रूम है जिसे काफी मशक्कत के बाद भी काटा नहीं जा सका है। इसके बाद काम रोक कर पता लगाया जा रहा है कि स्ट्रॉन्ग रूम का निर्माण किस धातु से हुआ है। इसके बाद आगे का काम होगा। बताया जा रहा है कि इस स्ट्रॉन्ग रूम को चब कंपनी ने बनाया था यह कंपनी 200 साल पुरानी है।

देश की सबसे बड़ी चोरी का राज कोठी में दफन
बंटवारे की प्रक्रिया शुरू होते ही इस कोठी में हुई देश की सबसे बड़ी चोरी की घटना एक बार फिर ताजी हो गई है। खरबों रुपये के सोने, चांदी और हीरे की इस चोरी के पीछे के कई राज आज भी दफ्न हैं। 1980 में कोठी में हुई चोरी का मामला सीबीआई तक पहुंचा था। स्ट्रॉन्ग रूम खोला गया तो उससे बेशकीमती हीरे-जवाहरात गायब मिले थे। जांच में खानदान के ही किसी के हाथ होने का शक था लेकिन इस खुलासे के काफी समय बाद तक बहुत से दावे होते रहे, लेकिन चोरी की इस घटना का पूरी तरह से खुलासा आज तक नहीं हो सका।

साभार https://navbharattimes.indiatimes.com/ से

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