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स्वर आलाप का मधुर संगीत महोत्सव

 

मुंबई। संगीत, कमेडी, बहुत से पुराने और भावनात्मक फिल्मी गानों के द्वारा अनेकों की पुरानी यादों को ताजा किया…ऐसी थी स्वर आलाप द्वारा आयोजित कंसर्ट में “बहुमुखी प्रतिभा वाले –जावेद अलीकी प्रस्तुति। स्वर आलाप एक ऐसा संगठन है जो पिछले 14 सालों से भारतीय संगीत उद्योग के महान संगीतकारों को पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

इस बार अपने 14वें वर्ष में स्वर आलाप ने फिल्म उद्योग की जावेद अली, जॉनी लीवर एवं कॉर्पोरेट घरानों की बड़ी हस्तियों की मौजूदगी में महान गोरख शर्मा जी मोहम्मद राशिद खान साहब तथा स्वर्गीय  शशिकांत कुडालकर जी को सम्मानित किया। इस अवसर पर, महान संगीतकारों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए जिन्होंने अपने कार्य और कला से अनेकों को प्रेरित किया तथा लाखों लोगों को अच्छी लगने वाली अनगिनत धुनों का सृजन किया। संस्थापक दिनेश घाटे ने उपस्थित जन समुदाय को प्रफुल्लित होते हुए कहा, “ हम प्रति वर्ष अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रयास करके देश में अधिक से अधिक संगीतकारों तक पहुंचने की कोशिश करते हैं तथा उन्हें वित्तीय, चिकित्सीय और भावनात्मक समर्थन प्रदान करते हैं।” यह इवेंट गोदरेज प्रॉपर्टीज , बैंक ऑफ़ इंडिया और बिग एफ एम ९२.७ द्वारा समर्थित किया गया जिनकेपब्लिसिटी पार्टनर बबल कम्युनिकेशन थे.

 

संगीत उद्योग की आत्मा को सजीव रखने की स्वर आलाप ने पहल की है तथा इसके लिए उद्योग के अनेकों दिग्गज जिनमें प्यारेलाल शर्मा, हरिहरन, शिवमणि, अनु मलिक, सोनू निगम, शान, विशाल शेखर जैसी हस्तियां शामिल हैं का समर्थन मिला है। ऐसे बहुत से अन्य कार्य हैं जिनके संबंध में संगठन कार्य कर रहा है। जरूरतमंद कलाकारों की मदद के लिए संगीत कार्यक्रम इसके अलावा है तथा इन मौजूद दिग्गजों के कार्यों को डिजिटल डेटा के रूप में तथा कॉफी टेबल बुक द अनसंग हीरोज के रूप में सुरक्षित रखना है।

 

गोरख शर्मा एक भारतीय गिटारवादक हैं जो भारतीय फिल्म उद्योग में अपने कार्य के लिए विख्यात हैं। वे संगीत के लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी के प्यारेलाल शर्मा के युवा भाई हैं। 1960 से 2002 तक विस्तृत अपने संपूर्ण संगीत के कैरियर में उन्होंने 1000 से अधिक गानोंमें तथा ऋषि कपूर अभिनीत कर्ज, राहुल राय की फिल्म आशिकी सहित500 से अधिक फिल्मों अनेकों वाद्य यंत्रों को बजाया है।

 

मोहम्मद राशिद खान ‘बुलबुल –तरंग’ तथा ‘बैंजो’ के उस्ताद हैं। राशिद खान इस वाद्ययंत्र को 1962 से बजा रहे हैं। उनका सबसे पहला असाइनमेंट शंकर शंभू मूवी (1976) के लिए कल्याणजी आनंदजी के तहत था । मुश्किल से ही शायद ही कोई ऐसी प्रसिद्ध कब्बाली होगी जिसमें मोहम्मद राशिद खान ने अपने बजाने के कौशल को न दिखाया हो- उदाहरण के लिए बर्निंग ट्रेन, मुकद्दर का सिकंदर, जमाने को दिखाना है, कुर्बानी, कर्मा, नाम, सरफरोश, रोडी राठौरस इश्कजादे, बजरंगी भाईजान।

 

स्वर्गीय शशिकांत कुडालकर प्रसिद्ध संगीतकार, लक्ष्मीकांत कुडालकर (लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल) के बड़े भाई तबला बजाने में बहुत ही कुशल थे। वे ‘लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ब्रांड’ के महल के एक मजबूत स्तंभ थे। उन्होंने पारसमणि से लेकर 1990 की शुरूआत तक लगभग सभी गानों में लय-खंड को व्यवस्थित किया था। उन्होंने एस डी बर्मन के लिए गाइड मूवी में तबला बजाया था। उन्होंने आर डी बर्मन, कल्याणजी आनंदजी, नौशाद, सरदार मलिक, ओ पी नैयर, खय्याम, एसएन त्रिपाठी तथा और भी बहुतों के लिए; 1960, 70 एवं 80 के बहुत से यादगार गानोंके लिए तबला बजाने के रूप में कार्य किया। उन्होंने ब्लॉक बस्टर फिल्म ‘सरगम’ में ऑन-स्क्रीन ऋषि कपूर के लिए  ‘डफली’  के प्रसिद्ध भाग को बजाया था।

 

गोरख शर्मा जी ने वह मौजूद दर्शको की मांग पूरी करते हुए फिल्म ‘क़र्ज़’ का गीत  ‘एक हसीना थी’ की बहु प्रसिद्द धुन गिटार पे फिर से दोहराई और उस लम्हे को सभी के लिएयादगार बना दिया

 

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