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परदेस में बढ़ा देश का मान, ‘प्रसार भारती’ के एप के जरिये हिंदी सीख रहे विदेशी

क्या आप जानते हैं कि विदेश में भी लोगों में हिंदी के प्रति तेजी से प्रेम बढ़ा है? जी हां, दुनिया में हिंदी भाषा बीते कुछ समय से तेजी से फल-फूल रही है। यही नहीं हिंदी भाषा को सीखने के लिए भारत से बाहर के देशों में लोग प्रसार भारती के ‘न्यूज ऑन एयर एप’ की मदद ले रहे हैं। वे इस एप को डाउनलोड कर आकाशवाणी की विभिन्न 24×7 हिंदी सेवाओँ को सुन रहे हैं।

प्रसार भारती, प्रसार भारती अधिनियम के तहत स्थापित एक वैधानिक स्वायत्त निकाय है, जो कि 23 नवंबर, 1997 को अस्तित्व में आया है। यह देश का लोक सेवा प्रसारक है। यह सार्वजनिक सेवा प्रसारण के उद्देश्यों को ‘आकाशवाणी’ और ‘दूरदर्शन’ के माध्यम से पूरा करता है।
आकाशवाणी की इन सेवाओं को सबसे ज्यादा सुनते हैं विदेशी

गौरतलब हो, आकाशवाणी के मुंबई, दिल्ली, कोडैकनाल और विविध भारती सर्विसेज को दूसरे देशों में सबसे ज्यादा सुना जाता है। इसकी जानकारी प्रसार भारती ने स्वयं अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट के जरिए साझा की है।

केवल इतना ही नहीं प्रसार भारती ने यह भी बताया है कि किन देशों में आकाशवाणी के श्रोताओं की संख्या में इजाफा हुआ है। बता दें, यूं तो विश्व के तमाम देशों में इन दिनों आकाशवाणी के श्रोताओं की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है लेकिन कुछ देशों में श्रोताओं की संख्या में खासा वृद्धि दर्ज की गई है।

फिलहाल, भारत के बाहर आकाशवाणी के श्रोताओं की गिनती के हिसाब से शीर्ष पांच देशों की यदि बात करें तो इन सर्विसेज के सबसे ज्यादा श्रोता यूएस (अमेरिका), यूएई (संयुक्त अरब अमीरात), यूके (यूनाइटेड किंगडम), पाकिस्तान और सिंगापुर में मौजूद हैं।

प्रसार भारती ने इस बाबत ‘न्यूज ऑन एयर एप’ के कुछ दिलचस्प आंकड़े भी ट्वीट के जरिए साझा किए हैं, जो इस प्रकार हैं…

एप डाउनलोड्स/यूजर्स – 2 मिलियन से ज्यादा

एप पर लाइव रेडियो सर्विसेज – 243

न्यूज ऑन एयर एप की पहुंच- 90 देशों से भी ज्यादा

एप पर किसी भी समय एक साथ 5000 से ज्यादा श्रोता इन लाइव रेडियो सर्विसेज को सुन रहे होते हैं।

2011 में जारी भाषा जनगणना के परिणाम के मुताबिक, देश में कुल 52,83,47,193 लोग हिंदी भाषी हैं।जनगणना के दौरान कुल जनसंख्या का लगभग 43.63% लोगों ने कहा कि उनकी मातृभाषा ‘हिंदी’ है।

2011 की जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि अधिकांश भारतीय राज्य जिनमें उत्तरी और मध्य भारत के मुट्ठी भर राज्यों के अलावा मुख्य रूप से हिंदी नहीं बोलते, लेकिन उन्होंने हिंदी भाषा को अपनी द्वितीयक भाषा के रूप में अपनाया है। वहीं अधिकांश दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों ने ‘अंग्रेजी’ को अपनी माध्यमिक भाषा के रूप में अपनाया है।

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