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हमारे भीतर कई शिलालेख हैं और इन शिलालेखों पर बहुत कुछ खुदा हुआ है-सूर्यबाला

“जीवन इतना अनिश्चित कभी नहीं हुआ था लेकिन इसमें भी हम जीवन जीने के नए रास्ते तलाश रहे हैं। हजारों साल में ऐसी कोई आपदा नहीं आयी। यह भी सच है कि प्रकृति हमसे बदला ले रही है। आज बहुत सारे प्रश्न हमारे सामने हैं। क्या हम अपनी गलतियों से सबक सीख पाएंगे? क्या हम पहले जैसे हो पाएंगे?” यह विचार कथाकार सूर्यबाला ने राजकमल प्रकाशन समूह के फ़ेसबुक पेज से जुड़कर लोगों से साझा किए।

सूर्यबाला ने यादों के पिटारे से बहुत सारी स्मृतियां भी लोगों से साझा कीं। उन्होंने महात्मा गांधी से न मिल पाने की निराशा तो आज़ादी की नई सुबह छोटे-छोटे झंडे बनाकर झूमना और विभाजन की त्रासदी से जुड़ी यादें भी साझा कीं। उन्होंने कहा, “आज की पीढ़ी के लिए जरूरी है कि पहले वे गांधी को पढ़ें, उन्हें उनके लिखे से जानें, तब गांधी पर किसी और की बात को सुने।“

सुप्रसिद्ध साहित्यकार सूर्यबाला के उपन्यास अपने समय में बहुत ज्यादा चर्चित थे, जिन्हें आज भी पाठक पसंद करते हैं। फ़िलहाल वे अपनी आत्मसंस्मरणात्मक किताब पर काम कर रही हैं। लाइव बातचीत में उन्होंने अपने अप्रकाशित संस्मरणों से कुछ अंश पढ़कर सुनाए।

राजकमल प्रकाशन समूह के पेज से ही कई बातें साझा करते हुए पत्रकार एवं लेखक रामशरण जोशी ने कहा, “जीवन में कुछ लोग मिलते हैं, खो जाते हैं। मैं रामायण में सीता बना, न्यूज़पेपर हॉकर रहा, संसदीय पत्रकारिता की, बांग्लादेश को बनते हुए देखा, आदिवासी अंचलों की कहानियाँ लोगों के सामने लेकर आया, श्रमिकों के जीवन को नजदीक से देखा और मीडिया शिक्षक भी रहा। लेकिन, इन तमाम भूमिकाओं में मैं और मेरा जीवन आज भी एक-दूसरे से सवाल पूछते रहते हैं। सवाल मन में घूमता है कि मैं बोनसाई तो नहीं बन गया हूँ। “

पत्रकारिता के अपने अनुभवों को साझा करते हुए रामशरण जोशी ने बताया कि, “परिवर्तन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। पत्रकारिता मूलत: राज्य की आर्थिक परिस्थितियों से सीधा जुड़ती है। ऐसे में पत्रकारिता ने भी कई रूप बदले हैं। आज की पत्रकारिता खुद चर्चा का विषय बन गई है। इसके मिशन से प्रोफेशनल होने और फिर कमर्शियल होने की यात्रा लंबी है।“

लाइव बातचीत में रामशरण जोशी ने अपनी आत्मकथा ‘मैं बोनसाई अपने समय का’ से अंशपाठ करते हुए कई रोचक किस्से भी साझा किए।


मैं अपने सुकून का दुश्मन

“मेरे पास कमाने को शोहरत है / गंवाने को एक अकेला जीवन / जेब में सीले हुए नोट जैसी एक उम्मीद है उसे भी जानबूझ कर खो देता हूँ / इस आग को बुझाने के लिए मुझे उजाले का दुश्मन करार दिया गया था / अब मैं उसी रोशनी में देश को जलते हुए देखते हुए हंसना चाहता हूँ / और रो देता हूँ…”

राजकमल प्रकाशन समूह के फ़ेसबुक लाइव से जुड़कर गीतकार पुनीत शर्मा ने अपनी सशक्त कविताओं का पाठ कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि, “मैं फिल्म इंडस्ट्री में काम करता हूँ और लगातार जो लिखता हूँ वो ताकतवर लोगों के खिलाफ़ होता है। दोस्त कहते हैं कि मैं अपना करियर क्यों नहीं बनाता, इसमें क्यों फंस रहा हूँ..लेकिन यह सवाल मेरे जिंदा रहने के सवाल हैं…”

पुनीत ने लाइव के जरिए अपने पंसदीदा लेखकों मुक्तिबोध, सर्वेश्वरदयाल सक्सेना एवं कई अन्य कवियों की कविताओं का पाठ भी किया।

कविता पाठ के क्रम में शायर नोमान शौक़ ने जुड़कर अपनी रचनाओं का पाठ किया। उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा समय जिसमें हम सब अपनी-अपनी ज़िन्दगियां, अपने रिश्ते-नाते, अपने शब्द, अपने हौसले सब कुछ संभालने और जमा करने में लगे हुए हैं। बहुत जल्द हम इस पीड़ा से उबर आएंगे और ज़िन्दगी फ़िर अपनी रफ़्तार से चलेगी क्योंकि ज़िन्दगी की रफ़्तार बहुत दिनों तक रूकी नहीं रह सकती। ज़िन्दगी को चलते रहना है इसलिए ज़िन्दगी और इसके साथ जो लोग जुड़े हैं, वो भी चलते रहते हैं।“

कल, 14 मई राजकमल प्रकाशन समूह के लाइव कार्यक्रम के जरिए कवि राजेश जोशी, लेखक अनु सिंह चौधरी एवं राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी किताबों की बाते करेंगे।

लॉकडाउन के तीसरे फ़ेज में भी लगातार जारी फ़ेसबुक लाइव कार्यक्रम में अब तक 176 लाइव सत्र हो चुके हैं जिसमें 130 लेखकों और साहित्यप्रमियों ने भाग लिया है।

अब तक शामिल हुए लेखक हैं – विनोद कुमार शुक्ल, मंगलेश डबराल, अशोक वाजपेयी, सुधीर चन्द्र, उषा किरण खान, रामगोपाल बजाज, पुरुषोत्तम अग्रवाल, अबदुल बिस्मिल्लाह, हृषीकेश सुलभ, शिवमूर्ति, चन्द्रकान्ता, गीतांजलि श्री, कुमार अम्बुज, वंदना राग, सविता सिंह, ममता कालिया, मृदुला गर्ग, मृणाल पाण्डे, ज्ञान चतुर्वेदी, मैत्रेयी पुष्पा, उषा उथुप, ज़ावेद अख्तर, अनामिका, नमिता गोखले, अश्विनी कुमार पंकज, रामशरण जोशी, सूर्यबाला, अशोक कुमार पांडेय, पुष्पेश पंत, प्रभात रंजन, राकेश तिवारी, कृष्ण कल्पित, सुजाता, प्रियदर्शन, यतीन्द्र मिश्र, अल्पना मिश्र, गिरीन्द्रनाथ झा, विनीत कुमार, हिमांशु बाजपेयी, अनुराधा बेनीवाल, सुधांशु फिरदौस, व्योमेश शुक्ल, अरुण देव, प्रत्यक्षा, त्रिलोकनाथ पांडेय, कमलाकांत त्रिपाठी, आकांक्षा पारे, आलोक श्रीवास्तव, विनय कुमार, दिलीप पांडे, अदनान कफ़ील दरवेश, गौरव सोलंकी, कैलाश वानखेड़े, अनघ शर्मा, नवीन चौधरी, सोपान जोशी, अभिषेक शुक्ला, रामकुमार सिंह, अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी, तरूण भटनागर, उमेश पंत, निशान्त जैन, स्वानंद किरकिरे, सौरभ शुक्ला, प्रकृति करगेती, मनीषा कुलश्रेष्ठ, पुष्पेश पंत, मालचंद तिवाड़ी, बद्रीनारायण, मृत्युंजय, शिरीष मौर्य, अवधेश प्रीत, समर्थ वशिष्ठ, उमा शंकर चौधरी, अबरार मुल्तानी, अमित श्रीवास्तव, गिरिराज किराडू, चरण सिंह पथिक, शशिभूषण द्विवेदी, सारा राय, महुआ माजी, पुष्यमित्र, अमितेश कुमार, विक्रम नायक, अभिषेक श्रीवास्तव, प्रज्ञा रोहिणी, रेखा सेठी, अजय ब्रह्मात्मज, वीरेन्द्र सारंग, संजीव कुमार, आशुतोष कुमार, विभूति नारायण राय, चित्रा देसाई, पंकज मित्र, जितेन्द्र श्रीवास्तव, आशा प्रभात, दुष्यन्त, अनिता राकेश, आशीष त्रिपाठी, पंकज चतुर्वेदी, विपुल के रावल एवं नोमान शौक

राजकमल फेसबुक पेज से लाइव हुए कुछ ख़ास हिंदी साहित्य-प्रेमी : चिन्मयी त्रिपाठी (गायक), हरप्रीत सिंह (गायक), राजेंद्र धोड़पकर (कार्टूनिस्ट एवं पत्रकार), राजेश जोशी (पत्रकार), दारैन शाहिदी (दास्तानगो), अविनाश दास (फ़िल्म निर्देशक), रविकांत (इतिहासकार, सीएसडीएस), हिमांशु पंड्या (आलोचक/क्रिटिक), आनन्द प्रधान (मीडिया विशेषज्ञ), शिराज़ हुसैन (चित्रकार, पोस्टर आर्टिस्ट), हैदर रिज़वी, अंकिता आनंद, प्रेम मोदी, सुरेंद्र राजन, रघुवीर यादव, वाणी त्रिपाठी टिक्कू, राजशेखर. श्रेया अग्रवाल, जितेन्द्र कुमार, नेहा राय अतुल चौरसिया, मिहिर पंड्या, धर्मेन्द्र सुशांत, जश्न-ए-कल़म एवं पुनीत

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