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एक ‘बिरला’ ही व्यक्तित्व हैं, लोकसभा अध्यक्ष बिरला

अनादिकाल से सृष्टि का नियम बरकरार है, सूर्य उदय होता है तो अपने उजाले से न केवल पूरी कायनात को रोशन करता है वरन सृष्टि के निर्माण और संचालन में अपने सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान का प्रतिपादन करता हैं। सूर्य के बिना हर और अंधेरा ही अंधेरा है। विश्व पटल पर भारत में एक ऐसे ही सूर्य साबित हुए है कोटा निवासी ओम बिड़ला, जिन्हें दो साल पहले वर्तमान शासन में देश की सर्वोच्च पंचायत लोक सभा का सर्वसम्मति से अध्यक्ष बन कर लोकसभा संचालन का महत्ती दाईत्व सौंपा गया। लोगों को उस समय यकायक विश्वास नहीं हुआ पर मौका मिला तो ऐसे सूर्य का उदय हुआ जिसने दो साल के अल्प समय में लोकसभा के सदन को अपने कर्मयोग प्रकाश से इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया जो आज तक इनसे पहले कोई नहीं कर सका। शांतिपूर्ण एवं न्यूनतम शून्यकाल के साथ लम्बे समय तक सदन चलने जैसी परम्पराओं का का नया इतिहास रच दिया।


बिड़ला ने अपनी शक्ति एवं जोश का समझ और सूझबूझ से पक्षपात के बिना कार्य संपादन कर और सदस्यों को अधिक से अधिक बोलने व अपनी बात रखने का अवसर प्रदान करना एवं अनेक अवसरों पर सदन को देर रात तक चलना और सदस्यों का सक्रियता से भाग लेना कुछ ऐसी वजह बनी जिसने सभी का दिल जीत लिया और लोकप्रियता के शिखर पर बढ़ते चले गए। आज हर तरफ उनके कायों की सराहना की जा रही है। यही नहीं उनकी कार्य शैली की प्रधान मंत्री ने भी मुक्तकंठ से सराहना कर उनके मनोबल को बढ़ाया है। जनता ने भी देखा कि किस प्रकार उन्होंने लोकसभा का कुशलता से संचालन किया, सदन हंगामें की भेंट नहीं चढ कर शांति से चला और अधिक से अधिक विधेयक पास हुए।

नई जोशीली कार्यशैली के साथ साथ वित्तीय प्रबन्धन पर उनका फोकस रहा और कई प्रकार के खर्चों में कमी लाकर अपने अभी तक के छोटे से समय में 400 करोड़ रुपयों की बचत का सेहरा भी इनके सर पर बन्धा एवं कई उपलब्धियां और सफलताएं इनके नाम दर्ज हुई। उन्होंने सबसिडी के भोजन पर ही लगाम लगा कर 9 करोड़ रुपए की बचत कर गरीब देश के सामने बचत का आदर्श उद्धरण पेश किया।


लोकसभा अध्यक्ष के रूप में लोकसभा में तकनीक को बढ़ावा देकर दस्तावेजों का डिजिटलाइजेशन किया जाना, सत्रों के दौरान सरकार की जवाबदेही बढ़ाने के लिए सक्रिय प्रयास , कोविड संकट के बीच स्वास्थ्य प्रोटोकाॅल्स के साथ मानसून व बजट सत्र का आयोजन कर लोकसभा के देश के प्रति संवैधानिक दायित्वों को पूरा करना,पांचों सत्रों में 122.2 प्रतिशत कार्य उत्पादकता, विस्तृत चर्चा के बाद 107 विधेयकों को पारित किया जाना, 17वीं लोेकसभा के पहले पांच सत्रों में शून्यकाल के दौरान प्रतिदिन 29.72 सदस्यों द्वारा अपनी बात रखना, प्रश्नकाल के दौरान प्रतिदिन औसतन 5.37 प्रश्नों के मौखिक जवाब देना,नियम 377 के तहत उठाए गए विषयों में सरकार की तरफ से 89.82 प्रतिशत विषयों के जवाब देना एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने की नई और अनूठी पहल के तहत देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था द्वारा सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायतों के लिए कार्यशालाएं आयोजित करना जैसी अन्य प्रमुख उपलब्धियां इनके खाते में दर्ज हुई।

लोकसभा अध्यक्ष के साथ – साथ अपने संसदीय क्षेत्र के विकास और जन कल्याण के लिए भी अपने पूरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। मुकंदरा टाईगर पार्क का विकास और जनता के लिए खोलना, चंबल में क्रूज चलाने, कोटा में हवाई सेवा शुरू कराने, रेलवे सुविधाओं का विकास के लिए प्रयास इनके प्रमुख फोकस बिंदु हैं। कोविड़ के विकट समय में संसदीय क्षेत्र की कमान संभाले रखी और निरन्तर मॉनिटरिंग कर एवं संवाद बनाए रख कर हर मुमकिन सुविधाएं उपलब्ध कराई और सेवा के लिए लोगों को आगे आने के लिए प्रेरित किया। विपदा में कोचिंग स्टूडेंट्स को विशेष प्रबन्ध करा कर सुरक्षित और एतियात के साथ उनके घर भेजने की पहल की। कोविड हेल्प लाइन शुरू कर लोगों कि परेशानी दूर करने में मददगार बने। जिन के घरों में इस जानलेवा बीमारी से चिराग बुझ गए उनके घर पहुंच कर संवेदना व्यक्त कर उनके आंसू पोंछे और संबल प्रदान कर अहसास दिया कि दुख की इस घड़ी में सरकार उनके साथ है।

लोकसभा अध्यक्ष रूपी सूर्य बन कर अपना उजाला फैलाने वाले ओम बिड़ला का जन्म 23 नवम्बर 1962 को कोटा में श्रीकृष्ण बिड़ला के घर में हुआ। उस समय किसे कल्पना थी कि यही हाड़ौती पुत्र बड़ा होकर कभी देश कि सर्वोच्च पंचायत का मुखिया बन जाएगा और कोटा का नाम रोशन करेगा। ओम बिड़ला का सार्वजनिक जीवन सेवा का पर्याय है। ये राजनीति को सेवा मान कर जन सेवा में हमेशा अग्रणीय रहते हैं। इन्होंने अब तक उल्लेखनीय कार्यों के तहत बारां जिले में सहरिया जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में कुपोषण और अर्ध-बेरोजगारी को हटाने के लिए मिशन का नेतृत्व किया। नेहरू युवा केंद्र के माध्यम से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की एक प्रमुख योजना तैयार करके ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली युवाओं को बढ़ावा देने के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया। राजस्थान सरकार में संसदीय सचिव के रूप कोटा के विकास के अनेक प्रयासों के साथ -साथ बढ़ते प्रदूषण से बचाने और हराभरा कोटा बनाने के लिए लगभग एक लाख पेड़ लगाने के लिए उन्होंने एक प्रमुख “ग्रीन कोटा वन अभियान” लॉन्च किया। विभिन्न माध्यमों के द्वारा सामाजिक सेवा, राष्ट्र सेवा, गरीब, वृ्द्ध, विकलांग और असहाय महिलाओं की सहायता करने जैसे महत्वपूर्ण प्रकल्प चलाए। विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से विकलांग, कैंसर रोगियों और थैलेसेमिया रोगियों की मदद के लिए हाथ बढ़ाए। स्वास्थ्य सेवाओं को आम नागरिक , निर्धन एवम असहाय वर्ग तक पहुंचाया। स्वाधीनता दिवस के अवसर पर उनकी पहल पर आयोजित ‘ आजादी के सवर ‘ कार्यक्रम उनकी देश भक्ति के ज़्ज़बे का प्रमाण है,जो कोटा के लिए एक ऐतिहासिक घटना बन गई।

छात्र जीवन से राजनीति में आने वाले बिड़ला ने जनसंघ अब भारतीय जनता पार्टी को ज्वॉइन किया। वे विभिन्न पदों पर नियुक्त किए गए । इन्होंने पहला विधान सभा चुनाव 2003 में जीत कर राजस्थान सरकार में संसदीय सचिव के पद पर अपनी सेवाएं प्रदान की। इसके बाद दो विधान सभा चुनावों में लगातार विजयी होकर 16 वीं एवं 17 वीं लोकसभा के लिए चुने गए। ओम बिड़ला को मोदी सरकार ने 17वीं लोकसभा में अध्यक्ष पद के लिए एनडीए की ओर से उम्मीदवार बनाया, जिसमें वे निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए।

 

 

 

 

 

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं व राजस्थान जनसंपर्क विभाग के सेवा निवृत्त अधिकारी हैं)

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