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ये हैं मुंबई की महिला जेम्स बॉंड

मुबई। अभी तक आपने पुरुषों को ही जासूस के रूप में देखा होगा। लेकिन देश में एक ऐसी महिला है जिसे पहली महिला जासूस होने का गौरव प्राप्त है। महाराष्ट्र की रहने वाली रजनी पंडित को महिला जेम्स बॉन्ड कहा जाता है। उन्होंने अभी तक 75 हजार से ज्यादा मामलों को सुलझाया है।

उनके पिता शांताराम पंडित मुंबई पुलिस में सीआईडी इंस्पेक्टर थे और उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या के मामले पर भी काम किया था।

वे कहती हैं, ‘जब मैं कॉलेज में थी तो मैं देखती थी कि एक लड़की गलत लड़कों के साथ बाहर घूमने जाती है और स्मोकिंग, ड्रिंकिंग भी करती है। मैंने फैसला किया कि इसे इनके पैरेंट्स के सामने खड़ा करूंगी। मुझे उनका घर का पता ढूंढना था इसलिए मैं कॉलेज क्लर्क के पास गई और उससे कहा कि वह मेरी दोस्त है और मुझे उसे एक गिफ्ट भेजना है तो उसका एड्रेस चाहिए। मैं उसके घर गई और उसके पैरेंट्स को बात बता दी। मैं उसके पिता को अपनी ही पॉकेट मनी से टैक्सी में ले गई और दिखाया कि उनकी बेटी क्या करती है। उन्होंने मुझसे पूछा- तुम जासूस हो क्या। बस इसके बाद मेरे दिमाग ने सोचना शुरू कर दिया।’

लेकिन रजनी ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की और उसके बाद थोड़े समय के लिए नौकरी की। नौकरी करते समय, उसने अपनी एक सहकर्मी की मदद भी की। इसके बाद उसने प्राइवेट डिटेक्टिव के काम को फुल टाइम करने का फैसला लिया।

19 साल की उम्र में ही साल 1991 में उन्होंने रजनी पंडित डिटेक्टिव सर्विसेस नाम की एजेंसी बना ली थी जिसमें आज 20 लोग काम करते हैं। एजेंसी ने अब तक 75 हजार से अधिक केस हल कर लिए हैं। उनके पास विदेशी कस्टमर से भी है।

47 साल की हो चुकीं रजनी अविवाहित हैं, लेकिन उन्हें इसका बिलकुल भी अफसोस नहीं है।

अपने करियर में हजारों केस सुलझाएं हैं वह भी कभी घरों में नौकरानी बनकर तो कभी भिखारी बनकर। एक बार एक केस सुलझाते वक्त उन्होंने भिखारी का रूप धारण किया था और इसके लिए वे कुछ दिन भिखारियों के दल में भी रही थीं। एक घर में तो वे 6 महीने तक नौकरानी बनकर रही थीं। इस केस में एक औरत ने अपने साथी के साथ मिलकर अपने पति और बेटे की हत्या करके सारी जायदाद अपने नाम कराने का प्रयास किया था। उस औरत के ससुराल के लोगों ने उन्हें यह केस सौंपा था। इस केस में उस औरत ने कोई भी सुबूत पीछे नहीं छोड़ा था। इसके लिए नौकरानी के रूप में 6 महीने रहकर उन्होंने उस औरत का विश्वास जीत लिया था। उन्हें पता चला कि झगड़ा जायदाद व पैसों के लिए चल रहा था और उस महिला ने ही अपने साथी से मिलकर पति और बेटे का खून किया था।

वह कहती हैं, ‘मैं रोजाना 14 घंटे काम करती हूं और साल में 8 से 10 लाख रुपए कमाती हूं जो कि मेरे लिए पर्याप्त है। मैं इस प्रोफेशन में नाम और पैसे के लिए नहीं आई। मैं ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद करना चाहती थी।’

रजनी अपने काम के लिए अब कर 57 से ज्यादा अवॉर्ड्स पा चुकी है।

साभार- से

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