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ये हैं वो सिपाहसालार, जिनके बिना राहुल गाँधी काम नहीं चलता

कांग्रेस में सोनिया युग खत्म हो चुका है और राहुल राज का आगाज। 19 साल पार्टी की बागडोर संभालने के बाद शुक्रवार को सोनिया गांधी की जगह राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष का कार्यभार सौंपा गया। लेकिन न्यूज18 के मुताबिक पुराने अध्यक्ष के जाने के बाद राहुल के पास अपनी एक खास टीम है, जो उन्हें कामकाज में मदद करेगी। आज हम आपको राहुल गांधी की खास टीम के सदस्यों से रूबरू कराएंगे।


कौशल के विद्यार्थी:
जब किसी को या राहुल को किसी से बात करनी होती है तो रास्ता कौशल से होकर गुजरता है। राहुल मानते हैं कि लोगों से जोड़ने में युवा पीढ़ी के कौशल अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि उनके इस प्लान को उस वक्त धक्का पहुंचा जब पार्टी को लगातार चुनावों में हार मिली। विद्यार्थी और उनके सहयोगियों को ‘कंप्यूटर के साथ बेहतर’ और जमीनी राजनीति की समझ न होने पर आलोचना झेलनी पड़ी।

कनिष्क सिंह: साल 2003 में शीला दीक्षित के चुनावी कैंपेन का हिस्सा बनकर सिंह राजनीति में आए थे। वह न्यू यॉर्क की एक कंपनी से नौकरी छोड़कर कांग्रेस से जुड़े थे। पार्टी आलाकमान की एक नजर उन पर तब पड़ी जब 2004 में उनका एक आर्टिकल आउटलुक में छपा। 2004 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस जीतेगी, इसकी भविष्यवाणी कर वह राहुल गांधी के करीबी बन गए।

केबी बायजू: उन्होंने साल 2010 में एसपीजी की नौकरी छोड़ी थी। अब वह राहुल गांधी के सुरक्षा विवरण के इन्चार्ज हैं। बायजू ट्विटर पर भी सक्रिय हैं और नरेंद्र मोदी और बीजेपी की आलोचना करने के अलावा लॉजिस्टिक्स और मीडिया का कार्यभार भी संभालते हैं।

अलंकार सावई: आईसीाईसीआई बैंक के पूर्व कर्मचारी अलंकार राहुल गांधी के दस्तावेजी व शोध विभाग के इन्चार्ज थे। वह और कौशल विद्यार्थी दिल्ली के बाहर राहुल की हर यात्रा में उनके साथ जाते हैं। वह दिव्या स्पंदा से पहले राहुल गांधी की सोशल मीडिया का कार्यभार संभाल रहे थे।

सचिन राव: मिशिगन बिजनेस स्कूल से कॉरपोरेट स्ट्रैटजी एंड इंटरनेशनल बिजनेस में एमबीए कर चुके हैं और युवा कांग्रेस और एनएसयूआई अॉर्गनाइजेशन का कामकाज देखते हैं।



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