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ये वो ‘साध्वी ऋतुंभरा’ नहीं, ये ‘दीदी माँ’ है…

याद कीजिए 90 का दशक जब राम जन्म भूमि आंदोलन पूरे उफान पर था और लालकृष्ण आडवाणी से लेकर भाजपा के सभी नेता एक सुर में राम जन्म भूमि पर राम मंदिर बनाने को लेकर राजनीतिक हवा बनाने में लगे थे, तब साध्वी ऋतंभराके ओजस्वी भाषणों ने इस अभियान को ऐसा रंग दिया कि देश भर में उनको लेकर दीवानगी सी हो गई। अपने इन भाषणों की वजह से साध्वी ऋतंभरा के खिलाफ देश भर के कई शहरों में लोगों ने भड़काउ भाषण देने को लेकर मुकदमें भी दर्ज करा दिए, लेकिन ऋतंभरा जी चट्टान की तरह अपने वक्तव्यों पर कायम ही नहीं रही बल्कि राम जन्म भूमि के मुद्दे को घर-घर पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। आज भी जब वे अपने प्रवचन देती हैं तो रामधारी सिंह दिनकर से लेकर हिन्दी साहित्य के उन तमाम मनीषी कवियों और लेखकों की रचनाओँ का उल्लेख करती हैं जिनकी रचनाएँ किसी जमाने में युवा पीढ़ी में जोश भरने और संस्कारों के बीजारोपण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।

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आज साध्वी ऋतंभरा अपने चाहने वालों के बीच ‘दीदी माँ’ के रूप में जानी जाती है। वात्सल्य, करुणा ममता और दया की ऐसी प्रतिमूर्ति जिनके सान्निध्य में बच्चों से ठुकराए बुजुर्ग, माँ-बाप से ठुकराए अबोध बच्चों को ममतामयी आश्रय मिला हुआ है। वृंदावन में विशाल परिसर में फैला दीदी माँ ऋतंभरा का वात्सल्य ग्राम सही मायने में वात्सल्य और प्रेम से सराबोर है। इस परिसर में माँ-बाप द्वारा ठुकराए गए अबोध बच्चों को माँ-दादी, नानी, मौसी से लेकर हम उम्र भाई बहन भी मिल जाते हैं तो बेटों द्वारा ठुकराए बुजुर्गों को नन्हें बच्चों के रूप में नाती-पोते। पति या ससुराल वालों द्वारा ठुकराई गई माताएँ बच्चों के लिए माँ और मौसी बनकर एक आत्मीय रिश्ता कायम कर लेती है।

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यहाँ अपनों से ठुकराए हुए बुज़ुर्गों और बच्चों का एक ऐसा परिवार बस गया है जिन्होंने अपना एक अलग ही परिवार बना लिया है, इस परिवार में भले ही किसी का खून का रिश्ता न हो मगर आत्मीय और भावनात्मक रिश्ते के साथ सब एक संयुक्त परिवार की तरह रहते हैं। इस वात्सल्य परिवार की कल्पना भी अद्भुत और रोमांचकारी है। एक वात्सल्य परिवार में सात बच्चे, जिनमें पाँच बच्चियाँ और दो बच्चे, एक माँ, एक मौसी और एक नानी होती है। यह परिवार किसी पारंपरिक भारतीय संयुक्त परिवार का जीता जागता रुप होता है। यहाँ इन बच्चों की देखरेख भी इतनी आत्मीयता के साथ होती है कि किसी रईस परिवार में पलने वाले बच्चे को भी अपने माँ-बाप से वह भावनात्मक प्यार नहीं मिलता होगा जो इन बच्चों को सहजता से मिलता है। वात्सल्य ग्राम परिसर में रह रहे इन परिवारों को देखकर लगता नहीं है कि यहाँ समाज और परिवारों से उपेक्षित और ठुकराए हुए बच्चे व बुज़ुर्ग रहते होंगे। पूरा परिसर सर्वसुविधायुक्त होने के साथ ही एक अलग ही उर्जा का एहसास कराता है।

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वात्सल्य ग्राम परिसर में गौशाला, अध्यात्मिक प्रशिक्षण केंद्र, महिलाओं के लिए संस्कार केंद्र जिसमें उन्हें बच्चों की परवरिश से लेकर जीवन मूल्यों, पारिवारिक मूल्यों से लेकर संस्कारों की शिक्षा दी जाती है। आदिवासी महिलाओँ के लिए उद्यमिका नाम से एक प्रशिक्षण केंद्र है, जहाँ आसपास के गाँवों की महिलाएँ कसीदाकारी, बैकरी उत्पाद बनाने, खाद्य प्रसंस्करण जैसे काम सिखाए जाते हैं ताकि वे आत्मनिर्भर बन सके।

अमरीका की संस्था गोल्डन बुक ऑफ वर्ड रेकॉर्ड्स के भारत स्थित प्रतिनिधि श्री मनीष विश्नोई ने जब वात्सल्य ग्राम का दौरा किया और यहाँ की गतिविधियों के बारे में अपने अमरीका स्थित संस्थान को बताया तो दीदी माँ के इन सेवा प्रकल्पों को गोल्डन बुक ऑफ रेकॉर्ड्स में शामिल कर इसका प्रमाण पत्र भी जारी किया गया।

लंदन में रह रहा एक भारतीय परिवार जब वात्सल्य ग्राम देखने आया तो इस परिवार की बेटी एनी दीदी माँ और उनकी सामाजिक व अध्यात्मिक सेवाओँ से इतनी प्रभावित हुई कि उसने दीदी माँ के साथ ही रहने का फैसला कर लिया, आज एनी दीदी माँ के साथ रहती ही नहीं है वो आज वात्सल्य ग्राम क व्यवस्था का एक प्रमुख हिस्सा हो गई हैं। वात्सल्य ग्राम के विशाल परिसर और यहाँ आने वाले मेहमानों, अतिथियों की आवभगत से लेकर हर तरह की व्यवस्था की जिम्मेदारी विभोर और वैभव पूरी निष्ठा से निभाते हैं।

इसी तरह बच्चों के लिए भी संस्कार केंद्र हैं, जहाँ उन्हें योग और ध्यान के साथ ही भारतीय संस्कारों की शिक्षा दी जाती है। सम्विद नाम से एक आवासीय विद्यालय भी हैं जहाँ बच्चों को पारंपरिक शिक्षा के साथ ही सामाजिक व नैतिक जीवन के साथ ही उनके व्यक्तित्व के विकास की शिक्षा दी जाती है।

मुंबई के जाने माने नैत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल दीदी माँ द्वारा संचालित इस वात्सल्य ग्राम में साल भर में तीन बार नैत्र चिकित्सा शिविर लगाकर मरीजों का निःशुल्क ऑप्रेशन करते हैं। उनके साथ उनके सहयोगी डॉक्टरों की एक पूरी टीम रहती है जो मरीजों की जाँच से लेकर ऑप्रेशन में अपना योगदान देती है। यहाँ ऑप्रशन के लिए आने वाले मरीजों की संख्या 300 से 500 तक होती है। इस शिविर में मथुरा-वृंदावन के आसपास के मरीज आते हैं और सबका ऑप्रेशन और इलाज तो निःशुल्क होता ही है बल्कि उनके खाने की भी व्यवस्था दीदी माँ की ओर से की जाती है। मरीजों को घर जाते समय दवाईयों की पूरी खुराक भी निःशुल्क दी जाती है। डॉ. श्याम अग्रवाल ऐसे भी मुंबई के आसपास के ग्रामीण व वनवासी क्षेत्रों में जाकर निःशुल्क नैत्र चिकित्सा शिविर आयोजित कर गरीब लोगों की आँखों की खोई हुई रोशनी लौटाते हैं। वात्सल्य ग्राम में एक सर्वसुविधायुक्त अस्पचाल भी बना है, जहाँ गरीब मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

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पचास एकड़ में फैला अध्यात्मिक, धार्मिक और आनंद की उर्जा से सराबोर वात्सल्यग्राम का ये हरा भरा परिसर आधुनिक सुविधाओँ से युक्त किसी वैदिक गाँव की कल्पना का साकार रूप लगता है।

ये हमारा सौभाग्य था कि दीदी माँ ने खुद समय निकालकर डॉ. श्याम अग्रवाल और उनके साथ गई डॉक्टरों की टीम को अपने साथ वात्सल्य ग्राम की सैर कराई और यहाँ चल रहे विभिन्न प्रकल्पों के बारे में विस्तार से बताया। वात्सल्य ग्राम में भगवती माँ सर्वमंगला का भव्य मंदिर आकार ले रहा है। 1.50 लाख वर्ग फीट के क्षेत्रफल वाला और 114 फीट की ऊँचाई का ये मंदिर बगैर सहारे के टिकी तीन छतों की वजह से वास्तु शास्त्र का एक अद्भुत चमत्कार होगा। इस मंदिर में एक विशाल संग्रहालय बनाया जाएगा जिसमें भारतीय संस्कृति की अनमोल वैज्ञानिक धरोहरों का प्रदर्शन होगा।

दीदी माँ के प्रशंसकों में देश की कई जानी मानी हस्तियों जिनमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह, लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्र महाजन, केंद्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी, मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हैं। दुनिया के कई देशों में दीदी माँ के भक्त हैं जो उनकी कथाओं का आयोजन कर विदेशों में बसे भारतीय परिवारों को भारतीय संस्कृति, भारतीय जीवन मूल्यों और धर्म व अध्यात्म की गंगा से आप्लावित करते रहते हैं।

वात्सल्य ग्राम की वेब साईट http://www.vatsalyagram.org/



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