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सोच हो बड़ी, सुनो सबकी, करो मन की

जीवन में सफल होने के कई उपाय हो सकते हैं जिनमें से कुछ आप खुद बना सकते हैं पर इस मामले में सफलतम लोगों द्वारा अपनाये गए उपाय अपेक्षाकृत कम श्रम साध्य होते हैं। साथ ही इस रास्ते पर चलकर सफलता मिलने का अवसर और भी बढ़ जाता है।

सुनें अपने मन की ये पता लगाएं कि आपको क्या करना अच्छा लगता है और उसी काम को करें। काम यदि आपकी रूचि के अनुसार होता है तो आप उसमे अपना 100 प्रतिशत देते हैं। यदि आप अपना काम अच्छे से करते हैं और इसके बदले आपको कुछ भी नहीं मिलता है तो आप समझिए कि आप सफलता के मार्ग पर अग्रसर हैं। 

करियर काउंसलर अरविंद सेन कहते हैं कि जब आप ये निश्चय करते हैं कि चाहे कुछ भी हो, कितना भी मेहनत करना पड़े हमें अपना प्रयास करना है तो ये संकल्प हमें सफल बनाता है। इस संकल्प को निरंतर बनाए रखना पड़ता है। सोच हो बड़ी ज्यादातर लोग अपना गोल ही बहुत ही छोटा रखते हैं और उसे ही प्राप्त कर खुशी मना लेते हैं जबकि कुछ लोग बहुत बड़ा गोल पाने की कोशिश तो करते हैं लेकिन हासिल नहीं कर पाते। दोनों ही स्थिति सही नहींहै। इसलिए आप अपना गोल निश्चित करने से पहले खूब सोचे विचारे और काफी सोच समझ कर निर्धारित करें। 

बड़ा सोचेंगे तो बड़ी चीज पाएंगे। जिसके बारे में सोचेंगे ही नहीं उसे भला पाएंगे कैसे। अपने आप को कमतर मत समझें। अपने आप को कम आंकने के अपराध पर विजय प्राप्त करो। अपनी परिसंपत्तियों पर ध्यान लगाएं। जैसा आप अपने बारे में सोचते हो उससे कहीं बेहतर हो आप। बड़े सोच वाले लोगों की शब्दावली का प्रयोग करें। उज्ज्वल, हंसमुख, खुशी, आशा, से संबंधित शब्दों का प्रयोग करें। जीत का एहसास कराने वाले शब्दों का प्रयोग करें। 

विफलता या हार सूचक शब्दों का प्रयोग न करें। विस्तृत हो दायरा एक प्रसिद्ध उक्ति है कि असफलता का मतलब है कि सफलता का प्रयास पूरे मन से नहीं किया गया। असफलता किसी काम को दुबारा शुरू करना का एक मौका देता है कि उसी काम को और भी अच्छे तरीके से किया जाए। अपने विजन को विस्तृत करें। सोचें कि क्या हो सकता है, न कि क्या है। अपने आप को, लोगों को, वस्तुओ को मूल्य परक कैसे बना सकते हैं इसके बारे में सोचें। अपने काम का बड़ा दृश्य सामने रखें। अपने वर्तमान काम को महत्वपूर्ण समझें। आपकी अगली पदोन्नति ज्यादातर इस पर निर्भर करता है कि आप अपने वर्तमान नौकरी के बारे में किस प्रकार सोचते हैं। 

छोटी छोटी बातों से ऊपर उठकर सोचो। कुछ लोग ऐसे होते हैं तो उदेश्य तो निर्धारित कर लेते है लेकिन उसके अनुरूप कर्म नहीं करते है जिससे वे सफल नहीं हो पाते हैं। सफल होने के लिए उसी के हिसाब से मेहनत करनी पड़ती है। बाधाओं को दूर करें पता करें कि वो कौन सी चीज है जो आपको पीछे की तरफ खींच रही है, फिर उससे अपना पीछा छुड़ाए। पहले आप अपनी बाधा को हटाएं। कभी-कभी हम जब सफलता की राह पर अग्रसर होते हैं तो कुछ बातें हमारे सामने आतीं हैं अगर हम उन बातों पर ध्यान न देकर सिर्फ अपने लक्ष्य के बारे में सोचते हैं तो हमें सफलता जरूर मिलती है। 

बदलाव की हो गुंजाइश नए विचारों, नयी योजनाएं अपनाने में घबराएं नहीं। नए विचार नई क्रांति को जन्म देती है। नए विचार, नयी योजनाएं सफलता की धुरी होते हैं। निराशा की कोई भावना आपको रोक नहीं सकती है। सदैव कड़ी मेहनत की इच्छा बनाएं रखें। सफल होने के लिए आपको एक सामान्य आदमी से ज्यादा काम करना होगा तभी आप टॉप पर पहुंच सकते हो। 

लक्ष्य प्राप्ति की प्रक्रिया को लोचदार बनाएं। यात्रा के आरंभ में तो लक्ष्य बदल सकते हैं मध्य में नहीं तो अनपेक्षित स्थितियों में अपने व्यवहार में लोच बनाएं। मुश्किल आने पर उसका सामना करें और तुरंत उसका समाधान निकालें। और आखिर में जब भी हम कोई काम करते हैं, हम अपने आप से बातें करते हैं। हमें हमेशा अपने मन की सुनकर ही निर्णय करना चाहिए। 

अंत में, बकौल नीरज जी, हमेशा याद रखें –

रचना होगी !
होगी !

स्वप्न होता है सत्य 
विसर्जित होने के बाद 
बूँद बनती है समुद्र 
अतल में खोने के बाद 

रचन होगी !
होगी !

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प्राध्यापक, हिन्दी विभाग, शासकीय 
दिग्विजय पीजी कालेज,राजनांदगांव 

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