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कैलिफ़ोर्निया में दीदी माँ ऋतम्भरा जी के परम शक्ति पीठ के लिए तीन मिलियन डॉलर की सहयोग राशि जुटाई गई

१७ सितम्बर 2022 को होटल हयात लॉंग बीच में परम शक्ति पीठ की अमेरिका इकाई द्वारा फंड रेजर कार्यक्रम आयोजित किया गया। श्री अनिल पारीख के नेतृत्व में श्री अभिनव मेहता, रामजी भाई पटेल और परम शक्ति पीठ के अनगिनत कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम को आयोजित किया और इसे सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

सुन्दर कार्यक्रम स्थल, स्वादिष्ट भोजन, शानदार वक्ता और फिल्म अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे ने इस कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। कार्यक्रम की शुरुआत मैं प्रमुख वक्ताओं ने अपनी बात कही और इस आयोजन के बारे में अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध कॉमेडियन राजीव सत्याल ने किया जिन्होंने अपनी मज़ेदार बातों से सबका दिल बहलाए रखा और साथ ही बहुत सुचारु रूप से कार्यक्रम का संचालन किया। भरत गारोडिया जो अमेरिका में समस्त बॉलीवुड का प्रतिनिधत्व करते हैं, वे मंच पर आये और उन्होंने पद्मिनी कोल्हापुरे जी का संक्षिप्त परिचय दिया और उन्हें मंच पर आने का न्यौता दिया। पद्मिनी जी को सम्मानित करते हुए अनिल जी ने उनसे आग्रह किया की पद्मिनी जी अपने विचार सबके साथ साझा करें। पद्मिनी जी ने इस पूरे प्रयास की बहुत सराहना की और सबसे आग्रह किया की वे दिल खोलकर परम शक्ति पीठ और उनके प्रयासों को अपना सहयोग और प्यार दें।

शुरू से अंत तक ये एक बहुत ही समायोजित कार्यक्रम था, जिसकी जितनी सराहना की जाए कम है। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि थी, साध्वी ऋतम्भरा जी (जिन्हें प्यार से लोग “दीदी माँ” कहते हैं) का वहाँ होना और अपनी गरिमामयी उपस्थति से सबको गौरवान्वित करना। उनके श्रीमुख से परम शक्ति पीठ के कार्यक्रमों के बारे में जानकार सबको बड़ा अच्छा लगा। परम शक्ति पीठ के सहयोग की बात कहते हुए उन्होंने कुछ एक बातें साझा कीं जो ह्रदय विदारक थीं।


अपने “वात्सल्य ग्राम” के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया की एक बार किसी ने एक नवजात शिशु को नमक में लपेट कर कूड़े के ढेर में छोड़ दिया। संयोग से किसी ने उस बच्चे को देखा जो अभी जीवित तो था पर बहुत ही बुरी अवस्था में था। उन लोगों ने तुरंत दीदी माँ को सन्देश पहुँचाया। दीदी माँ और परम शक्ति पीठ के कार्यकर्ताओं ने उस बच्चे को फ़ौरन अस्पताल पहुँचाया और एक लम्बी लड़ाई के बाद वो बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होकर आश्रम लौट आया। लगभग १९-२० वर्षों के बाद, आज वो बच्चा भारतीय सेना में भर्ती होने जा रहा है। इस घटना को याद करते हुए दीदी माँ ने एक बात कही कि “सन्तान अवैध नहीं होती, सम्बन्ध अवैध होते हैं इसलिए इन बच्चों को सहारा देना और उन्हें जीवन देना हम सबका दायित्व है”।

इसके अलावा जो लोग अपने वयोवृद्व माँ-बाप को वृद्धा आश्रम में छोड़कर चले जाते हैं, उन लोगों की देखभाल की जिम्मेदारी भी परम शक्ति पीठ लेता है। एक ऐसी ही बूढ़ी माँ को याद करते हुए दीदी माँ कहती हैं की अब वो ९५ वर्ष की हो गयी हैं। एक बार राजनाथ सिंह जी उनसे मिले और मज़ाक में पूछा नानी माँ अब तो चलने की बेला आ गयी है, अब क्या बचा रह गया है जीवन में करने को? तो उनकी आँखों में चमक आ जाती है और वो कहती हैं की बस पोते की शादी देख लूँ फिर चली जाऊँगी। मतलब जिस बेटे ने घर पर नहीं रखा, उनकी देखभाल नहीं की, उसके भी बेटे का सुख ही उनका सुख है और यही माँ-बाप होते हैं।

वात्सल्य ग्राम का मॉडल सचमुच अनोखा है। वे बेसहारा और अनाथ बच्चों को तो अपनाते ही हैं पर साथ ही वे असहाय वृद्ध माँ-बाप को भी अपनाते हैं। दोनों को एक दूसरे का सहारा मिले इसके लिए एक वृद्ध को इस अनाथ बच्चे की माँ बना देते हैं, दूसरी को मौसी और तीसरी को बुआ, ताकि वो एक परिवार की तरह रहें और एक दूसरे के सुख-दुःख का ख़्याल रखें। इस तरह एक अनाथ बच्चे को माँ मिल जाती है और माँ को बेटा या बेटी। अपने अनुभवों को साझा करते हुए दीदी माँ बताती हैं की वे एक-दूसरे को इतना प्यार करने लगते हैं अपनी सारी पीड़ा भूल जाते हैं और वे बदहाल और बेदखल किये हुए माँ-बाप फिर से उस बच्चे को अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद करते हैं। उनके लिए अपनी मेहनत से कमाए हुए पैसे से बैंक का अकाउंट तक खोल देते हैं।

इस वात्सल्य ग्राम की एक और बड़ी बात है कि जब वे अनाथ बच्चों को लेकर आते हैं तब उनको नहीं पता होता है कि वे किस धर्म या मज़हब के हैं, फिर भी परम शक्ति पीठ का वात्सल्य ग्राम उनका पूरा ध्यान रखता है और उन्हें एक बेहतर भविष्य के लिए तैयार करता है। आज वात्सल्य ग्राम में पले-बढ़े हुए बच्चे बहुत अच्छी जगहों पर अपनी सेवाएँ दे रहें हैं। इस वात्सल्य ग्राम में बड़ी हुई बच्चियों की शादी अमेरिका जैसे जगहों पर हुई है और वे सब आज बहुत सुखी और ख़ुश हैं और यही सुख और मानवता परम शक्ति पीठ का परम ध्येय और लक्ष्य है।

परम शक्ति पीठ की इस निःस्वार्थ सेवा से लोग इतने प्रभावित हैं की पूरा सभा स्थल खचा-खच भरा था और लोगों ने दिल खोलकर दान दिया। लगभग ३-मिलियन डॉलर की धनराशि इस आयोजन से इकठ्ठा की गयी जो अद्भुत था। प्रमुख दानकर्ताओं ब्रह्म अग्रवाल, अवधेश अग्रवाल, रामजीभाई पटेल, वसंत राठी, शेखर रेड्डी, रवि तिलक, MSE Surfaces और Tarsadia Foundation ने भरपूर सहयोग राशि दी। अकेले ब्रह्म अग्रवाल जी ने २-मिलियन डॉलर की राशि दान दी। ब्रह्म अग्रवाल जी परम शक्ति पीठ के एक समर्पित कार्यकर्त्ता हैं जो फ्लोरिडा से सिर्फ इसी कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए कैलिफ़ोर्निया आये थे।

इस समर्पण भाव और परम शक्ति पीठ के इस उत्सव को स्वादिष्ट रात्रि-भोज और रामशंकर और भावना चावला के मनोरंजक गीतों ने और सुन्दर बना दिया किया। इस तरह परम शक्ति पीठ को सहयोग राशि जुटाने के लिए हुआ ये कार्यक्रम समाप्त हो गया।

रचना श्रीवास्तव अमरीका में रहती हैं और वहाँ रह रहे भारतीय लोगोॆं की गतिविधियों पर नियमित रूप से लिखती हैं।

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