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शेर के आगे फिंकवा देता था टीपू सुल्तान

1766 में जन्मे ब्रिटिश जेम्स स्करी 1780 में फ्रांसीसियों द्वारा बंधक बना लिए गए थे। वो पहले हैदर अली और उसके बाद टीपू सुल्तान के शासन में बंधक बनकर रहे थे।

भारत को गुलाम बनाने वाली ईस्ट इंडिया कंपनी से आखिरी सांस तक लड़ने वाले मैसूर के शासक टीपू सुल्तान का खुद के बारे में प्रसिद्ध कथन है, “जिंदगी भर भेड़ की तरह जीने के बजाय मैं एक दिन शेर की तरह जीना पसंद करूंगा।” टीपू सुल्तान और उनके पिता हैदर अली ने मैसूर रियासत पर 1758 से 1799 तक राज किया था। पिता-पुत्र दोनों को बाघों-शेरों से विशेष लगाव था। टीपू को उनकी निडरता, बहादुरी और शायद बाघों-शेरों से प्यार के कारण ही “मैसूर टाइगर” कहा जाता है। लेकिन हैदर और टीपू के बाघों से प्यार का एक दूसरा पहलू भी है जो 10 सालों तक उनकी कैद में रहने वाला ब्रिटिश सिपाही जेम्स स्करी ने अपने संस्मरण (द कैप्टिविटी, सफरिंग, एंड एस्केप, ऑफ जेम्स स्करी, हू वाज डिटेंड अ प्रिजनर ड्यूरिंग टेन ईयर्स) में दर्ज किया है। जेम्स स्करी के अनुसार हैदर और टीपू अपने दुश्मनों और दगाबाज साथियों को भयानक सबक सिखाने के लिए हाथियों के पैरों से कुचलवाने के अलावा बाघों के पिंजड़े में फेंकवा देते थे।

1766 में ब्रिटेन में जन्मे जेम्स स्करी कम उम्र में समुद्री यात्रा पर निकल गये थे। 1780 में उस समय ब्रिटेन के दुश्मन फ्रांस ने उनके समुद्री दल को पकड़ लिया। फ्रांसीसियों ने सभी 16 बंधकों को मैसूर के शासक हैदर अली को सौंप दिया। हैदर बंधकों के संग कठोर बरताव करते थे। टीपू दिसंबर 1782 में मैसूर के राजा बने। जेम्स स्करी के ब्योरे के अनुसार टीपू सुल्तान भी अपने पिता हैदर की तरह बंधकों के संग निर्ममता से पेश आते थे। जेम्स स्करी के अनुसार युद्धबंदियों और धोखा देने वालों को सजा देने का टीपू का पसंदीदा तरीका था हाथियों के पैरों तले कुचलवा देना। जेम्स स्करी के अनुसार जिन्हें सजा दी जा रही होती थी उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो जाने तक हाथी उनके शव रौंदा करते थे।

जेम्स स्करी के अनुसार जिन्हें और भयावह सजा देनी होती थी उन्हें टीपू बाघों के पिंजड़े में फेंकवा देते थे। जेम्स स्करी के अनुसार एक बार टीपू ने नौ बाघों को पिंजड़े में बंद करके एक कतार में रखवा दिया। जेम्स स्करी के अनुसार इनमें से एक बाघ पूरी तरह काला था और उन्होंने वैसा काला बाघ कभी नहीं देखा था। टीपू ने अंग्रेज सैनिकों और अफसरों को उनके पद के अनुसार बाघों के पिंजड़े के सामने खड़ा करवाया। टीपू ने सबसे पहले ब्रिटिश कर्नल बेली को बाघों के पिंजड़े में डलवाया। उसके बाद एक-एक कर बाकी बंधकों को बाघों के आगे फिंकवा दिया गया।
हैदर अली और टीपू सुल्तान के बंधक रहे जेम्स स्करी का चित्र विकीकॉमंस से साभार।
जेम्स स्करी के अनुसार ब्रिटिश बंधकों के अलावा टीपू अपने करीबियो को भी नाराज होने पर बाघों के आगे फेंकवा देता था। स्करी के अनुसार एक बार टीपू ने अपने तीन प्रमुख ओहदेदारों को बाघों के सामने फेंकवा दिया था। इन ओहदेदार में टीपू के इंचेवाला (डाक प्रमुख) और बक्शी (भुगतान प्रमुख) शामिल थे। बाघों ने सिर छोड़कर तीन ओहदेदारों का पूरा शरीर खा लिया था। जेम्स स्करी के अनुसार टीपू सजा देने के लिए काम आने वाले बाघों को भूखा रखा जाता था ताकि वो और भी खूंखार हो जाएं। जेम्स स्करी के अनुसार पिंजड़े में रहने के कारण टीपू के बाघ असमय मौत के भी शिकार हो जाते थे। स्करी के अनुसार एक बाघ केवल 11 महीने में मर गया था। बाघों की मौत के कारण टीपू लगातार बाघ खरीदते रहते थे। टीपू को शिकार का भी बहुत शौक था। टीपू 1799 में अंग्रेजी फौज से लड़ते हुए मारे गए थे। वहीं जेम्स स्करी आजाद होने के बाद ब्रिटेन वापस लौट गए। 1822 में उनका 57 साल की उम्र में देहांत हुआ।
साभार- इंडियन एक्सप्रेस से

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